सीरो सर्वे:बिहार के 7 जिलों में सबसे अधिक एंटीबॉडी समस्तीपुर में, पटना के 18.80% लोग काेरोना से बीमार होकर ठीक भी हो गए

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स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आज जारी किए गए अद्यतन आंकड़ों के अनुसार देश में कोविड-19 के कुल 27,02,742 मामले हैं। वहीं पिछले 24 घंटे में 876 और लोगों की जान जाने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 51,797 हो गई है। इसके अनुसार देश में मृत्यु दर अब 1.92 प्रतिशत है।

 देश में कोविड-19 के 55,079 नए मामले सामने आने के बाद,संक्रमण के मामले बढ़कर मंगलवार को 27 लाख के पार पहुंच गए। देश अब तक 19.77 लाख लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं और मरीजों के ठीक होने की दर अब 73.18 प्रतिशत है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी। मंत्रालय द्वारा सुबह आठ बजे जारी किए गए अद्यतन आंकड़ों के अनुसार देश में कोविड-19 के कुल 27,02,742 मामले हैं। वहीं पिछले 24 घंटे में 876 और लोगों की जान जाने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 51,797 हो गई है। इसके अनुसार देश में मृत्यु दर अब 1.92 प्रतिशत है।

सीरो सर्वे बिहार

बिहार में धीरे-धीरे लोगों में कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता (एंटीबॉडी) विकसित होने लगा है। यह खुलासा पूरे देश में किए गए सीरो सर्वे में हुआ है। देश के 66 जिलों में हुए सर्वे में सात जिले बिहार के भी हैं। पटना, वैशाली, भोजपुर, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, कटिहार और भागलपुर में यह सर्वे किया गया है। इस हिसाब से राज्य इन सात जिलों में औसतन 18.81% आबादी में कोरोना के विरुद्ध एंटीबॉडी विकसित हो गया है। इसमें सबसे अधिक समस्तीपुर में 27.8%, भोजपुर में 21%, वैशाली में 19.7%, पटना में 18.80%, भागलपुर में 18.60%, मुजफ्फरपुर में 16.80% और सबसे कम कटिहार के 9% आबादी में कोरोना से लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गई है।

सीरो सर्वे क्या है, इसमें किसे शामिल किया गया
कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए सीरोलॉजिकल सर्वे किया गया, जिसे शॉर्ट में सीरो सर्वे भी कहा जाता है। इस सर्वे की मदद से यह पता लगाया जाता है कि क्षेत्र विशेष में कोरोना संक्रमण कितना फैला है? कितनी बड़ी आबादी इस संक्रमण की चपेट में आई है? कितनी आबादी में लोगों के अंदर कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो चुकी है? दूसरे शब्दों में कहे तो उनके शरीर में एंटीबॉडी बन चुकी है। विशेषज्ञों की मानें तो अगर कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित होता है, लेकिन उनमें लक्षण नहीं दिखाई देते हैं तो ऐसे लोगों में 5-6 दिन के अंदर अपने आप एंटीबॉडी बनना शुरू हो जाता है। यह वायरस को शरीर में पनपने नहीं देता है। सीरो सर्वे का उद्देश्य इसी दर का पता लगाना है।

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