बिहार चुनाव से पहले महागठबंधन को झटका, जीतन राम मांझी की पार्टी हुई अलग

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बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ही महागठबंधन टूट गया है। जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) ने महागठबंधन से अलग होने का फैसला किया है। गुरुवार को पार्टी की कोर कमिटी की बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया है। चर्चा है कि महागठबंधन से अलग होने के बाद जीतन राम मांझी फिर से एनडीए में शामिल हो सकते हैं। हालांकि इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

पार्टी की कोर कमिटी की बैठक के बाद हम प्रवक्ता दानिश रिजवान ने पत्रकारों को महागठबंधन से अलग होने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महागठबंधन में निरंतर उपेक्षा और समन्वय समिति की गठन करने की बात नहीं माने जाने के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी और कोर कमेटी ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया है।

रिजवान ने बताया कि किसी अन्य गठबंधन में जाने के संबंध में अगले दो-तीन दिनों में ही निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल अभी यह तय नहीं किया गया है कि आखिर मांझी कहां जाऐंगे। वहीं चर्चा है कि मांझी फिर से एनडीए में घर वापसी कर सकते हैं। उनकी जेडीयू के नेताओं से इस मामले में बातचीत भी हो चुकी है।

बताया जा रहा है कि जीतन राम मांझी की घर वापसी को लेकर जेडीयू की तरफ से पिछले कई महीनों से कवायद चल रही है। जेडीयू चाहती है कि मांझी की पार्टी ‘हम’ का पूरी तरह से जेडीयू में विलय हो जाए, लेकिन ऐसा नहीं होने की सूरत में मांझी की पार्टी के साथ कुछ सीटों पर समझौते का फॉर्मूला तय किया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को हुई ‘हम’ की कोर कमेटी बैठक में महागठबंधन से अलग होने का फैसला कर लिया गया है। हालांकि, अभी तय नहीं हुआ है कि जीतन राम मांझी की पार्टी जेडीयू से हाथ मिलाएगी या नहीं।

16 सीटों पर पार्टी की तैयारी पूरी

16 विधानसभा सीटों पर पार्टी ने पूरी तैयारी रखी है। बताया जा रहा है कि गठबंधन होता है तो पार्टी जेडीयू से इतनी ही सीटों की मांग भी करेगी। सीटों की संख्या में कुछ कमी बेशी कोर कमेटी की बैठक में तय किया जाएगा। पार्टी ने अधिकतर मगध प्रमंडल के सीटों पर ही अपनी दावेदारी की है। वैसे पार्टी का शीर्ष नेतृत्व कोसी और पूर्णिया क्षेत्र के कुछ सीटों को अपना प्रभाव क्षेत्र में मान रहा है।

चिराग की वजह से खुला मांझी का रास्ता
बिहार में दलितों का बड़ा वोटबैंक लोजपा के पास है। पिछले दिनों लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान कई मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमलावर रहे हैं। जदयू कुछ दिन तो शांत रही, लेकिन फिर इधर से भी जुबानी हमले होने लगे। चिराग के बयान से जदयू काफी असहज महसूस कर रही है। जदयू को इस बात का भी डर का है कि दलित वोटर उनसे नाराज न हो जाएं। सूत्रों के मुताबिक जदयू ने इसी वजह से दलित नेता जीतन राम मांझी को अपने पाले में लाने का फैसला किया है।

मांझी की जदयू से बात फाइनल हो चुकी है और वे एक-दो दिनों में एनडीए का दामन थाम लेंगे। पार्टी के करीबी सूत्रों के मुताबिक जदयू उन्हें 5 से 6 सीटें दे सकती है।

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