सुशांत केस: सीबीआई की मदद करेगी एम्स की फॉरेंसिक टीम, रिपोर्ट का करेगी विश्लेषण

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अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जांच कर रही सीबीआई टीम की मदद अब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली की एक फॉरेंसिक टीम भी करेगी। यह टीम सुशांत सिंह राजपूत के शरीर पर मिली चोट के निशानों का अध्ययन करेगी। टीम इस बात का भी अध्ययन करेगी कि अभिनेता की मौत आत्महत्या थी या उनकी हत्या हुई थी।

सीबीआई ने एम्स से इस मामले में उसकी मेडिको-लीगल (चिकित्सा विधिक) राय मांगी है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से बिहार सरकार की अनुशंसा पर इस मामले की जांच को सीबीआई के हवाले करने के कुछ दिन बाद यह फैसला लिया गया है। एम्स में फॉरेंसिक विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि सीबीआई उन्हें मामले से जुड़ी रिपोर्ट उपलब्ध कराएगी। 
डॉ. सुधीर गुप्ता ने कहा, ‘सीबीआई सुशांत सिंह केस से जुड़ी सभी रिपोर्ट एकत्र कर रही है और वह हमें ये रिपोर्ट जल्द ही भेज देंगे। हम परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर उनके शरीर पर मिली चोटों के पैटर्न का अध्ययन करेंगे। हम फांसी और हत्या के आरोपों के बीच अंतर करने के लिए पोस्टमार्टम के समय संरक्षित अन्य ट्रेस सबूतों की भी जांच करेंगे।’
सीबीआई ने एम्स के फॉरेंसिक विभाग से मामले की समीक्षा करने और मेडिको-लीगल राय देने का अनुरोध किया है।  इसके लिए डॉ. गुप्ता की अध्यक्षता में एक फॉरेंसिक विशेषज्ञों का एक मेडिकल बोर्ड गठित कर दिया गया है। 

एम्स दिल्ली के ही एक अन्य फॉरेंसिक विशेषज्ञ ने कहा कि टीम इस बात का भी मूल्यांकन करेंगी कि पोस्टमार्टम में सामने आई जानकारियां सही हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि हम यह देखेंगे कि रिपोर्ट में किसी निर्णायक गलती की संभावना तो नहीं है। डॉ. गुप्ता और उनकी टीम ने शीना बोरा और सुनंदा पुष्कर जैसे हाई प्रोफाइल मामलों में मेडिको-लीगल राय दी है। 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर उठे हैं सवाल
इस मामले में पोस्टमॉर्टम को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। ये सवाल हैं कि पोस्टमार्टम जल्दबाजी में रात में क्यों किया गया? सुशांत के शरीर पर चोट के निशानों का जिक्र क्यों नहीं किया गया? पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर मौत का वक्त क्यों नहीं डाला गया? उन्होंने मौत से पहली जूस पिया था तो उसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई?

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