कांग्रेस में नेतत्व को लेकर जारी कलह के बीच महाराष्ट्र सरकार में उसकी सहयोगी शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए उसपर निशाना साधा और कहा कि भारत को एक ‘व्यावहारिक विपक्ष’ की जरूरत है लिहाजा कांग्रेस के पुराने सदस्यों को महाराष्ट्र में बगावत नहीं करनी चाहिए। 

महाराष्ट्र कांग्रेस के 11 विधायक विकास निधि को लेकर महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ अनशन पर बैठने वाले है और सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मिलकर महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ शिकायत करने वाले मुद्दे पर शिवसेना नाराज है और इसी को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। 

शिवसेना ने कहा कि तीनों पार्टियों के केंद्रीय नेतृत्व की सहमति के बाद बनी महाराष्ट्र में महाविकास आघाडी की सरकार का गठन किया गया है लिहाजा सरकार के खिलाफ विरोध करने के बजाय कांग्रेस को अपने आंतरिक संकट को हल करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि देश को जैसे विपक्ष की जरूरत है वैसा मिले। शिवसेना ने कहा कि अगर महाराष्ट्र में कांग्रेस नेता महाविकास आघाडी सरकार के खिलाफ बगावत करते हैं, तो इस स्थिति का भाजपा अनुचित लाभ उठाएगी। हालांकि, सेना ने यह भी कहा कि उद्धव ठाकरे राजनीतिक अराजकता से निपटने में सक्षम हैं, लेकिन कांग्रेस नेताओं को शांत करने की जिम्मेदारी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास है।

सोमवार को कांग्रेस में हुआ ‘महाड्रामा’

कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने सोमवार को करीब सात घंटे तक चली मैराथन बैठक  में फैसला हुआ है कि फिलहाल सोनिया गांधी कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी और उन्हें जरूरी संगठनात्मक बदलाव के लिए अधिकृत किया।पार्टी के 23 नेताओं की ओर से नेतृत्व के मुद्दे पर सोनिया को लिखे गए पत्र से खड़े हुए विवाद की पृष्ठभूमि में हुई यह बैठक हंगामेदार रही और इसमें तकरीबन सभी नेताओं ने सोनिया गांधी के नेतृत्व में विश्वास जताया। अहमद पटेल समेत कई नेताओं ने राहुल गांधी को फिर से पार्टी की कमान सौंपने की पैरवी की।

बैठक के बाद पारित प्रस्ताव में सीडब्ल्यूसी ने सोनिया गांधी से अंतरिम अध्यक्ष बने रहने का आग्रह करने के साथ ही उन्हें इस बात के लिए अधिकृत किया कि वह संगठन में जरूरी बदलाव करें।

कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई ने सोनिया गांधी को लिखे गए पत्र की पृष्ठभूमि में नेताओं को कांग्रेस का अनुशासन एवं गरिमा बनाए रखने के लिए अपनी बातें पार्टी के मंच पर रखने की नसीहत दी और कहा कि किसी को भी पार्टी एवं इसके नेतृत्व को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सूत्रों के मुताबिक सीडब्ल्यूसी की बैठक काफी हंगामेदार रही और अधिकतर सदस्यों ने पत्र लिखने वाले नेताओं को निशाने पर लिया। अंबिका सोनी और कुछ अन्य नेताओं ने पत्र लिखने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

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