शकुंतला देवी से भी तेज़ ह्यूमन कैलकुलेटर बने 21 साल के नीलकंठ?

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स्कॉट फ्लेंसबर्गऔर शकुंतला देवी जैसे चर्चित ह्यूमन कैलकुलेटरों के रिकॉर्ड को तोड़ने का दावा हैदराबाद के नीलकंठ भानु प्रकाश ने किया है. नीलकंठ ने माइंड स्पोर्ट्स ओलंपियाड 2020 बीते 15 अगस्त को जीतने का भी दावा किया और यह भी कहा कि उसके नाम चार वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और 50 लिम्का बुक रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं. हैदराबाद का 21 वर्षीय लड़का अचानक इंटरनेट पर सनसनी बन गया है.

आमतौर पर लोगों को गणित के सवाल हल करने या लंबी कैलकुलेशन करने के लिए कैलकुलेटर का इस्‍तेमाल किया जाता है, लेकिन कुछ दिमाग बगैर कैलकुलेटर के बड़ी गणनाएं कर पाते हैं. ऐसा ही एक तेज़ दिमाग है हैदराबाद के नीलकंठ का, जो 13 देशों के प्रतियोगियों के बीच हुई प्रतियोगिता में अव्वल रहा. दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से ग्रैजुएशन करने वाले नीलकंठ से आपको मिलवाते हैं.

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कैसे चुने गए नीलकंठ?
एमएसओ प्रतियोगिता वर्चुअली आयोजित की जाती है, जिसमें यूके, जर्मनी, यूएई, फ्रांस, ग्रीस और लेबनान जैसे 13 देशों के 30 प्रतिभागी हिस्सा ले पाते हैं, जो 57 साल की उम्र तक के हो सकते हैं. यह प्रतियोगिता 1998 से आयोजित की जा रही है. इस साल इस स्पर्धा में नीलकंठ ने 65 पॉइंट्स के मार्जिन पर अव्वल स्थान हासिल किया, जबकि लेबनानी प्रतियोगी दूसरे और यूएई प्रतियोगी तीसरे नंबर पर रहा.

नीलकंठ का कहना है कि उनकी तेज़ रफ्तार देखकर जज इतने चौंक गए थे, कि उनकी स्पीड के साथ सटीक जवाबों को क्रॉस चेक करने के लिए उन्होंने नीलकंठ से और ज़्यादा गणनाएं करवाईं.

कैसे जीत पाए नीलकंठ?
अन्य कई प्रतियोगियों की तरह नीलकंठ ने भी अपनी कामयाबी के पीछे का राज़ अपनी तैयारी को बताया. लेकिन यह तैयारी ज़रा हटके थी. यह ऐसा नहीं ​था कि आप एक मेज़ और कुर्सी पर बैठ जाएं और घंटों किताबों में सिर खपाते रहें. हालांकि नीलकंठ जब छोटे थे, तब स्कूल के बाद अलग से छह से सात घंटे तक मैथ की प्रैक्टिस किया करते थे.लेकिन फिर इन तौर तरीकों में बदलाव आया. बीबीसी की रिपोर्ट कहती है कि जबसे नीलकंठ ने मैथ की प्रतियोगिताएं जीतना शुरू किया और कुछ रिकॉर्ड्स बनाना, तबसे घंटों की प्रैक्टिस करना बंद हो गया और वो दूसरे अनूठे तरीकों से प्रैक्टिस करने लगे.

कैसे मैथ्स की प्रैक्टिस करते हैं नीलकंठ?
इस राज़ को खोलते हुए नीलकंठ के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि हर वक्त नंबरों के साथ दिमाग में कुछ न कुछ गतिविधि चलती रहती है, यानी यह एक लगातार चलने वाला मेंटल स्पोर्ट है. नीलकंठ के मुताबिक वो तेज़ म्यूज़िक सुनते हुए, लोगों से बात करते हुए, क्रिकेट खेलते या देखते हुए भी मैथ की प्रैक्टिस करते रहते हैं ताकि वो अपने दिमाग को एक साथ कई काम करने का आदी बना सकें.

विज़न मैथ लैब’ नीलकंठ का सपना
नीलकंठ बच्‍चों को ऑनलाइन क्‍लासेज़ के ज़रिये पढ़ाते हैं और उनका सपना है कि वह एक विज़न मैथ लैब बनाएं. इस लैब के ज़रिये वह हज़ारों बच्‍चों तक पहुंच बनाना चाहते हैं. अस्ल में, देश और दुनिया में गणित के नाम से कई बच्चे डरते हैं या कतराते हैं इसलिए नीलकंठ गणित से बच्चों के प्‍यार को बढ़ाना चाहते हैं.इस बात को नीलकंठ आंकड़ों में बताते हैं कि भारत के सरकारी स्‍कूल में पढ़ने वाले हर 4 में से 3 बच्‍चे मैथ नहीं समझ पाते. गणित से डर दूसरा बड़ा कारण है कि ग्रामीण इलाकों में बच्चे स्कूल या पढ़ाई छोड़ देते हैं.

‘सरकार को बेहतर प्रोग्राम बनाना चाहिए’
नीलकंठ के हवाले से  गया है हालांकि सरकार साक्षरता बढ़ाने के लिए कई तरह के कार्यक्रम चला रही है, लेकिन गणित संबंधी योग्यताओं को विकसित करने के लिए कोई खास प्रोग्राम नहीं है. जबकि दुनिया भर में गणित संबंधी योग्यता का विकास ही सबसे ज़रूरी है. सरकार को इस दिशा में सोचकर एक बेहतर प्रोग्राम बनाना चाहिए ताकि भारत अपनी गणितीय क्षमता का प्राचीन गौरव हासिल कर सके.

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