राधास्‍वामी सत्‍संग ब्‍यास प्रमुख की मुश्किलें बढ़ीं, EOW ने फिनवेस्‍ट धोखाधड़ी मामले में भेजा नोटिस

0
51

राधास्‍वामी सत्‍संग ब्‍यास के प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्‍लों की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं. दरअसल, दिल्‍ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने ढिल्‍लों को नोटिस जारी कर रेलिगेयर फिनवेस्‍ट लिमिटेड के जरिये 2,000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा की हेराफेरी मामले की जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है. ईओडब्‍ल्‍यू ने रेलिगेयर फिनवेस्‍ट लिमिटेड की ओर से मामले में एफआईआर दर्ज कराने के बाद ये नोटिस जारी किया है. बता दें कि रेलिगेयर फिनवेस्‍ट लिमिटेड रेलिगयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड की 100 प्रतिशत सहायक कंपनी है.

मलविंदर सिंह ने हलफनामा दायर कर ढिल्‍लों पर लगाए आरोप
रेलिगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड के पूर्व प्रवर्तक मलविंदर मोहन सिंह ने दिल्‍ली हाईकोर्ट में दायर हलफनामा में आरोप लगाया कि गुरिंदर सिंह ढिल्‍लों ने फर्जी कंपनियों के जरिये पैसों की हेराफेरी की. ढिल्‍लों और उनके परिजनों ने दिखाया कि वे अपने कर्ज का भुगतान कर रहे थे. दिखाया गया कि ढिल्‍लों और उनके परिवार को कोई पैसे नहीं मिले हैं. दरअसल, ढिल्‍लों ने कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की थी. बता दें कि गुरिंदर सिंह ढिल्‍लों मलविंदर सिंह के चाचा हैं. हलफनामा के मुताबिक, ढिल्लों और उनके परिवार पर 2016 तक 1,473 करोड़ रुपये बकाया हैं.

ढिल्‍लों परिवार ने आरएचसी होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड और टुडेज होल्डिंग से कुल 578 करोड़ रुपये का कर्ज लिया. मलविंदर सिंह ने हलफनामे में आरोप लगाया कि कर्ज चुकाने के लिए ढिल्लों परिवार ने बेस्ट ग्रुप में विभिन्‍न कंपनियों से 489 करोड़ रुपये लिए, जो उस समय गुरिंदर सिंह ढिल्लों और उनके सहयोगियों के स्वामित्व में थीं. हालांकि, आरएसएसबी के प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों और उनके परिवार का कहना है कि उन पर मलविंदर व शिविंदर की कंपनी आरएचसी होल्डिंग्स का कोई बकाया नहीं है. ढिल्लों ने कहा था कि होल्डिंग का दावा झूठा है. इसके बाद अदालत ने दोनों पक्षों को हलफनामा देकर दावा पेश करने के निर्देश दिए थे.

ईडी ने कहा था, रेलिगेयर एंटरप्राइजेज के साथ की गई धोखाधड़ी
प्रवर्तन निदेशलय (ED) ने कहा था कि रेलिगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड के साथ धोखाधड़ी की गई है. रेलिगेयर कंपनी में रहते हुए शिविंदर सिंह ने बैंकों से 2,300 करोड़ रुपये का कर्ज लिया और उस पैसे को गलत तरीके से अपनी सहायक कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया. यही नहीं, जानबूझकर बैंक का कर्ज नहीं चुकाया. इस मामले में शिविंदर समेत आरोपियों को ईओडब्ल्यू ने 10 अक्टूबर 2019 को गिरफ्तार किया था. मामले में मलविंदर सिंह, सुनील गोधवानी, कवि अरोड़ा और अनिल सक्सेना को भी गिरफ्तार किया गया था. आर्थिक अपराध शाखा ने रेलिगेयर की एफआईआर और मलविंदर सिंह के हलफनामा में लगाए आरोपों की जांच में पाया कि डेरा मुखी और उनके दोनों बेटों को जांच में शामिल किया जा सकता है.

रेलिगेयर ने तत्‍काल वसूली और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की
आरईएल की सहायक कंपनी रेलिगेर फिनवेस्ट लिमिटेड ने दिसंबर 2018 में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में वित्तीय घोटाले का मामला दर्ज कराया था. कंपनी ने प्रमोटर्स मलविंदर मोहन सिंह और शिविंदर मोहन सिंह के खिलाफ ही शिकायत दर्ज कराई थी. इस शिकायत में रेलिगेयर के पूर्व सीएमडी सुनील गोधवानी समेत कई डायरेक्टर्स पर चीटिंग, फ्रॉड और गबन का आरोप लगाया था. रेलिगेयर की एफआईआर में कहा गया है कि 10 साल में 115 कंपनियों को पैसा दिया गया, जो 47,968 करोड़ रुपये है. रेलिगेयर ने पैसे की तत्‍काल वसूली और घोटाले के दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.