बताया जा रहा है कि शीर्ष माओवादी नेता गणपति ने बीमारी के कारण आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया है. और इसके लिए सरकार के साथ उसके अनुयायियों की बातचीत अंतिम चरण में है. ऐसा तेलंगाना पुलिस की पहल के बाद संभव हुआ है. बताया जा रहा है कि मोदी सरकार भी इसके लिए तैयार है. सीपीआई-माओवादी के पूर्व नेता और पार्टी के पूर्व सचिव गणपति उर्फ ​​मुप्पला लक्ष्मण राव के सरकार के सामने आत्मसमर्पण करने की संभावना है. खुफिया सूत्रों ने कहा कि इस मुद्दे पर उनके अनुयायियों और सरकार के बीच बातचीत अंतिम चरण में है. 71 साल के गणपति ने बीमार होने के कारण दो साल पहले पार्टी से इस्तीफा दे दिया था.

यह पता चला है कि गणपति, जो अस्थमा, घुटनों के दर्द और मधुमेह की गंभीर बीमारी से पीड़ित है, अगर वह कोरोना महामारी , वित्तीय संकट, चीनी आक्रमकता जैसे मुद्दों के बीच आत्मसमर्पण करता है तो उसके लिए जो भी किया जा सकता है, किया जायेगा. अधिकारी यह भी मूल्यांकन कर रहे हैं कि क्या मोदी सरकार को लगता है कि यह उनके लिए राजनीतिक रूप से उपयोगी होगा. ऐसा लगता है कि केसीआर सरकार भी अपने राजनीतिक लाभ के लिए स्थिति को बदलने की कोशिश कर सकती है.

कौन है गणपति?
लक्ष्मण राव उर्फ ​​गणपति ने एक शिक्षक के रूप में तीस साल में अपना करियर शुरू किया था. उन्होंने एक शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया और माओवादी पार्टी में शामिल हो गए. लक्ष्मण राव का जन्म 1950 में बीरपुर, जगताला जिले में मुप्पला गोपाल राव और शुभम्मा के दूसरे पुत्र के रूप में हुआ था. 1973 में उन्हें सरकारी शिक्षक (ऑन-ट्रेन) के रूप में नौकरी मिली. रुद्रंगी में काम करते हुए, वह 1975 में बेड (इन-सर्विस) के साथ वारंगल चले गए.
लक्ष्मण राव उर्फ ​​गणपति उर्फ ​​राधाकृष्ण उर्फ ​​मल्लन्ना माओवादी पार्टी में शामिल होने वाले पहले व्यक्ति थे. 1990-91 में पीपुल्स वार पार्टी में विभाजन के बाद, गणपति नवगठित माओवादी पार्टी की केंद्रीय समिति के सचिव चुने गए. लंबे समय तक उन जिम्मेदारियों को वहन किया.गणपति के सिर के लिए 1 करोड़ रुपये देने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले ने उस समय एक नई बहस ही छेड़ दी थी. दो साल पहले नामबाला केशवराव को गणपति को बदले केंद्रीय समिति का सचिव चुना गया था. गणपति की  पत्नी विजया और एक पुत्र वासुदेव है.

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