मंत्रमुग्ध करता बिहारी लोकगीत:मनोज वाजपेयी, पंकज त्रिपाठी भी कह रहे वाह,आप भी सुनिए

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  • ऐसे संगीत भोजपुरी गीतों को सम्मान दिलाते हैं

सदियों से कोई गीत घर-आंगन में रचा-बसा हो और वर्षों से उसकी आवाज कानों तक नहीं पहुंची हो तो अचानक सुनकर मन खिल जाता है। मनोज वाजपेयी, पंकज त्रिपाठी जैसे दिग्गजों को भी यही लगा और उन्होंने भी दूसरों को सुनाने के लिए इसे शेयर किया। मोबाइल के जमाने में पहली बार बिहार में गूंज सुनाई दे रही- कहवां के पीयर माटी, कहां के कुदार हे…। सिंगर और म्यूजिक डायरेक्टर सुशांत अस्थाना के इस प्रयोग को एक महीने में मिलियन व्यूअर्स पसंद कर चुके हैं।

सुशांत के गीतों को इम्तियाज अली ने भी किया शेयर
सुशांत ने इससे पहले “गाई के गोबर महादेव अंगना लिपाई…” भी गाया था। यह भी काफी पॉपुलर रहा। कुछ दिनों पहले ही रघुवर नारायण जी के लिखे राष्ट्रगीत ‛बटोहिया’ में सुशांत ने बतौर म्यूजिक डायरेक्टर का काम किया था, जिसे हिंदी सिनेमा के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर इम्तियाज अली ने शेयर किया था। यह ग्रुप सॉन्ग था। इसके वीडियो डायरेक्टर नितिन चंद्रा थे।

10 साल से छोड़ रखी थी भोजपुरी, जुलाई में जागा बिहार-भाव
भास्कर से बातचीत में सुशांत अस्थाना कहते हैं- “अश्लीलता इतनी ज्यादा हावी हो रही थी कि भोजपुरी गाना-बजाना दस साल पहले ही छोड़ दिया था। अपनी भाषा से प्यार कहीं छिप-सा गया था। हिंदी गाने पर ज्यादा काम करता रहा था। जुलाई में एकदम से मन हुआ कि क्यूं ना भोजपुरी गाने को एक बार फिर से ऐसे गाया जाए कि नई पीढ़ी भी जुड़े-सुने। भोजपुरी गीतों में नयापन लाकर लोगों के बीच आया तो हर तरफ से लोगों ने उत्साह बढ़ाया। 10 दिनों के अंदर दूसरा गीत भी कंपोज किया। गिटार के साथ भोजपुरी पर पहला एक्सपेरिमेंट था और लोगों का भरपूर प्यार भी मिला।”

20 देशों में प्रस्तुति दे चुके हैं सुशांत
सुशांत मॉरीशस, दुबई, कनाडा, यूएस, सिंगापुर, अटलांटा, नॉर्वे जैसे 20 देशों में अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। वे बताते हैं लोगों का खूब प्यार मिलता रहा है। आगे की प्लानिंग बताते हैं कि वेस्टर्न म्यूजिक को भोजपुरी से जोड़ने की कोशिश है, ताकि लोगों को संगीत में नयापन मिले। वे बताते हैं कि जो लोग बिहार से बाहर जाकर अन्य देश-प्रदेश में बस चुके हैं, उनके बच्चे माटी की खुशबू से अनजान हैं। इस नजरिए से भोजपुरी को अलग एक्सपेरिमेंट कर वैसे ही प्रस्तुत करना है, जैसा वे आज के जमाने में सुनना चाहते हैं। जिस तरह से पंजाबी, हरयाणवी या अन्य भाषाओं के गानों पर लोग काम करते हैं, वह काम भोजपुरी में नहीं हो रहा है। इसलिए गजल, सोहराई आदि पर नया एक्सपेरिमेंट करना है, तभी लोग ज्यादा पसंद करेंगे।

पिता के शौक ने सुशांत को बना दिया सिंगर
बिहार के सीवान जिले के सहलौर गांव के रहने वाले सुशांत अस्थाना की पढ़ाई बिहार से ही हुई। सुशांत फिलहाल काम के सिलसिले से दिल्ली-मुंबई आते-जाते रहते हैं। वे बताते हैं कि सिंगिंग में आने के लिए सबसे ज्यादा पिता से इंस्पायर हुआ। पिता बचपन से मुकेश चंद माथुर के गीत खुद भी सुनते और मुझे भी सुनाते थे। मुकेश जी के गीतों से ही फैमिली के मूड को रिलैक्स भी कराते थे। इसी से मेरा रुझान म्यूजिक की ओर बढ़ता चला गया, लेकिन मां हमेशा से डॉक्टर बनाना चाहती थी। बाद में पिता ने म्यूजिक क्लास में एडमिशन भी करा दिया। फिर 16 साल बनारस और दिल्ली घराने में शास्त्रीय संगीत और कई वाद्य यंत्र जैसे पियानो, ड्रम, तबला, सितार आदि की शिक्षा ली।

कई नामचीन गायक ने सुशांत के निर्देशन में गाया
10 साल से संगीत निर्देशन में काम कर चुके सुशांत बॉलीवुड के कई नामचीन गायकों को अपने संगीत निर्देशन में गवाया है, जिसमें जावेद अली, उदित नारायण, कल्पना, बिनोद राठौर, खुशबू जैन, कविता कृष्णमूर्ति, मोहम्मद अज़ीज़, कुमार सानू इत्यादि हैं। सुशांत झारखंड भोजपुरी रत्न, माटी के लाल पुरस्कार, द ग्लोरी ऑफ इंडिया, बिहार अस्मिता सम्मान, पूर्वांचल गौरव सम्मान से सम्मानित भी हो चुके हैं।

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