विश्वकर्मा पूजा: जानें कब से कब तक है पूजा करने के लिए शुभ समय…

0
143

विश्वकर्मा पूजा हर साल 17 सितंबर को मनाई जाती है. इस बार देश के कुछ हिस्सों में आज 16 सितंबर दिन बुधवार को विश्वकर्मा पूजा की जा रही है, तो वहीं कई राज्यों में कल 17 सितंबर को पूजा की जाएगी. राशि के अनुसार विश्वकर्मा पूजा कन्या संक्रांति को मनाई जाती है. बता दें कि इसी दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था. विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है. इसलिए इस दिन उद्योगों, फैक्ट्र‍ियों और हर तरह के मशीन की पूजा की जाती है. मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही देवताओं के लिए अस्त्रों, शस्त्रों, भवनों और मंदिरों का निर्माण किया था. विश्वकर्मा ने सृष्टि की रचना में भगवान ब्रह्मा की सहायता की थी, ऐसे में इंजीनियरिंग काम में लगे लोग उनकी पूजा करते हैं. यह पूजा सभी कलाकारों, बुनकर, शिल्पकारों और औद्योगिक घरानों द्वारा की जाती है. आइए जानते है इस बार विश्वकर्मा पूजा पर कई विशेष संयोग बन रहे है. इस शुभ समय में पूजा करने पर आपको विशेष फल की प्राप्ति होगी…

मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा के पूजन-अर्चन किए बिना कोई भी तकनीकी कार्य शुभ नहीं माना जाता. इसी कारण विभिन्न कार्यों में प्रयुक्त होने वाले औजारों, कल-कारखानों में लगी मशीनों की पूजा की जाती है. भगवान विश्वकर्मा के जन्म को लेकर शास्त्रों में अलग-अलग कथाएं प्रचलित हैं.

इस तरह पूजा करने से जीवन में आएगी सुख समृद्धि

विश्वकर्मा दिवस के दिन पूजा करने से घर और काम नें सुख समृद्धि आती है. इस दिन सबस् पहले कामकाज में इस्तेमाल होने वाली मशीनों को साफ करना चाहिए. फिर स्नान करके भगवान विष्णु के साथ विश्वकर्माजी की प्रतिमा की विधिवत पूजा करनी चाहिए. ऋतुफल, मिष्ठान्न, पंचमेवा, पंचामृत का भोग लगाएं. दीप-धूप आदि जलाकर दोनों देवताओं की आरती उतारें.

भगवान विश्वकर्मा के जन्म को लेकर कई कथाएं हैं

भगवान विश्वकर्मा के जन्म को लेकर शास्त्रों में अलग-अलग कथाएं प्रचलित हैं। वराह पुराण के अनुसार ब्रह्माजी ने विश्वकर्मा को धरती पर उत्पन्न किया. वहीं विश्वकर्मा पुुराण के अनुसार, आदि नारायण ने सर्वप्रथम ब्रह्माजी और फिर विश्वकर्मा जी की रचना की. भगवान विश्वकर्मा के जन्म को देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन से भी जोड़ा जाता है.

हर वर्ष 17 सितंबर को ही क्यों मनाई जाती है विश्वकर्मा पूजा

भगवान विश्वकर्मा की जयंती को लेकर कुछ मान्यताएं हैं. कुछ ज्योतिषाचार्यो के अनुसार भगवान विश्वकर्मा जी का जन्म आश्विन कृष्णपक्ष का प्रतिपदा तिथि को हुआ था. वहीं कुछ लोगों का मनाना है कि भाद्रपद की अंतिम तिथि को भगवान विश्वकर्मा की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है. वैसे विश्वकर्मा पूजा सूर्य के पारगमन के आधार पर तय किया जाता है.

विश्वकर्मा के दामाद हैं भगवान सूर्य

कहा जाता है कि भगवान सूर्य विश्वकर्मा के दामाद हैं. विश्वकर्मा की पत्नी का नाम आकृति है. इसके अलावा उनकी तीन और पत्नी भी हैं. जिनसे उन्हें 6 पुत्र हुए है. इनके उनकी दो पुत्रियां भी हैं. जिसमें से संज्ञा नाम की पुत्री का विवाह सूर्य देव से हुआ था. इसलिए भगवान सूर्य विश्वकर्मा के दामाद हैं.

दुनिया के सबसे पहले इंजीनियर है भगवान विश्वकर्मा

शास्त्रों की माने तो विश्वकर्मा वास्तुदेव के पुत्र हैं. जिन्होंने सृष्टि में कई चीजें बनाई हैं. माना जाता है कि पांडवों के इंद्रप्रस्त में मौजूद माया सभा भी भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाई थी. रावण के सोने की लंका को भी बनाने वाले विश्वकर्मा ही थे. इस तरह उन्होंने कई दर्लभ चीजों का निर्माण किया किया. जिससे उन्हें दुनिया का पहला इंजीनियर कहा जाता है.

विश्वकर्मा पूजा मंत्र

ओम आधार शक्तपे नम:, ओम कूमयि नम:, ओम अनन्तम नम:, पृथिव्यै नम:।

आज विश्वकर्मा पूजा है. पूजा के समय रुद्राक्ष की माला से विश्वकर्मा पूजा मंत्र का जाप करें, जाप के समय इस बात का ध्यान रखें कि मंत्र का उच्चारण सही हो. गलत उच्चारण करने से आपको इस पूजा का फल नहीं मिलेगा.

पूजा करने के लिए जानें शुभ समय

इस साल विश्वकर्मा पूजा पर कई संयोग बन रहे हैं. जिसमें पूजा करने से आपको कई लाभ प्राप्त होगा. इस दिन एक योग सुबह 7 बजकर 22 मिनट तक रहेगा और उसके बाद साध्य योग का प्रारंभ हो जाएगा. इसके अलावा आज के दिन कोई भी अभिजित मुहूर्त नहीं है. लेकिन अमृत काल मुहूर्त बन रहा है जो सुबह 10 बजकर 9 मिनट से सुबह 11 बजकर 37 मिनट तक रहेगा. वहीं दोपहर 02 बजकर 19 मिनट से दोपहर 3 बजकर 08 मिनट तक विजय योग रहेगा. इसके अलावा शाम 06 बजकर 12 मिनट से शाम 6 बजकर 36 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त रहेगा. इन सभी योग में विश्वकर्मा जी की पूजा करने से आपको उनकी खास आशीर्वाद प्राप्त होगा.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.