चीन सीमा विवाद: राज्यसभा में राजनाथ सिंह बोले- चीन की हरकत से गल्वन में झगड़े की स्थिति बनी

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    • चीन की किसी भी कार्रवाई का जवाब देंगे, LAC पर हमारी सेना तैयार
    • वीर जवानों की वीरता की प्रशंसा करनी चाहिए

    भारत-चीन सीमा विवाद पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा के बाद आज राज्यसभा में बयान दिया है. राजनाथ सिंह ने कहा, चीन की हरकत से गल्वन घाटी में झगड़े की स्थिति बनी. जबकि दोनों देशों के बीच शांति बहाल करने के लिए कई समझौते हुए हैं. उन्होंने कहा, “भारत और चीन दोनों ने औपचारिक तौर पर यह माना है कि सीमा विवाद एक जटिल मुद्दा है जिसके समाधान के लिए शांति की आवश्यकता है. इस मुद्दे का समाधान, शांतिपूर्ण बातचीत के द्वारा निकाला जाए. हमने चीन को डिप्लोमेटिक और मिलिट्री चैनल के माध्यम से यह अवगत करा दिया कि इस प्रकार की गतिविधियां, स्थिति को एक तरफा बदलने का प्रयास है.  यह भी साफ कर दिया गया कि ये प्रयास हमें किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है.”

    रक्षा मंत्री ने कहा, 15 जून को कर्नल संतोष बाबू ने अपने 19 बहादुर सैनिकों के साथ भारत की अखंडता का बचाव करने के उद्देश्य से गलवान घाटी में सर्वोच्च बलिदान दिया. हमारे पीएम खुद सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए लद्दाख गए. केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर पर चीन का अवैध कब्जा जारी है. चीन अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के पूर्वी क्षेत्र में भारतीय क्षेत्र के लगभग 90,000 वर्ग किलोमीटर पर भी अपना दावा करता है. इन घटनाओं के दौरान हमारे सशस्त्र बलों के आचरण से पता चलता है कि उन्होंने उत्तेजक गतिविधियों के सामने ‘सयंम’ को बनाए रखा और भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए आवश्यक रूप से ‘शौर्य’ का भी प्रदर्शन किया. चीन द्वारा की गई कार्रवाई हमारे विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों की अवहेलना है. चीन द्वारा सैनिकों को इकट्ठा करना 1993 और 1996 में हुए समझौतों के खिलाफ है. वास्तविक नियंत्रण रेखा का सम्मान और कड़ाई से निरीक्षण करना सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता का आधार है. हमारे सशस्त्र बलों ने इसका स्पष्ट रूप से पालन किया है, वहीं चीनी पक्ष द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा है. चीन ने पिछले कई दशकों में सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी तैनाती क्षमताओं को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा निर्माण गतिविधियां की. हमारी सरकार ने भी सीमावर्ती अवसंरचना विकास के बजट को पिछले स्तरों से लगभग दोगुना कर दिया है.राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारी सेनाएं सीमा पर मजबूती के साथ डटी हुई हैं. मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं मैं इस मुद्दे पर ज्यादा विस्तार से नहीं बोलना चाहता हूं और इस संवेदनशीलता को सदन समझेगा. राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की तरफ से पहले सैन्य कार्रवाई नहीं की गई, जबकि चीन की तरफ से की गई है, लेकिन हमने उनके इरादों को कामयाब नहीं होने दिया.

    राज्यसभा के सभापति ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सलाह दी कि वह अपने चैंबर में कुछ वरिष्ठ सदस्यों को बुलाएं और उनके साथ विवरण साझा करें.

    राजनाथ ने लोकसभा में क्या कहा था
    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में कहा था कि मौजूदा स्थिति के अनुसार चीनी सेना ने एलएसी के अंदर बड़ी संख्या में जवानों और हथियारों को तैनात किया है. उन्होंने कहा कि पूर्वी लद्दाख में गोगरा, कोंगका ला और पैंगोंग झील के उत्तरी एवं दक्षिणी तट सहित क्षेत्र में दोनों देशों के सैनिकों के बीच टकराव के कई बिंदु हैं. हमारी सेना ने भी जवाबी तैनाती की हैं, ताकि देश के सुरक्षा हितों का पूरी तरह ध्यान रखा जाए. हमारे सशस्त्र बल इस चुनौती का डटकर सामना करेंगे. हमें अपने सशस्त्र बलों पर गर्व है.

    दरअसल, गलवान घाटी में 15 जून को दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई झड़प में भारत के 20 सैन्य कर्मियों के शहीद होने के बाद पूर्वी लद्दाख में तनाव बढ़ गया. पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर 29 और 30 अगस्त की दरम्यानी रात भारतीय भूभाग पर कब्जा करने की चीन की नाकाम कोशिश के बाद स्थिति और बिगड़ गई. भारत ने पैंगोंगे झील के दक्षिणी तट पर कई पर्वत चोटियों पर तैनाती की और किसी भी चीनी गतिविधि को नाकाम करने के लिये क्षेत्र में फिंगर 2 तथा फिंगर 3 इलाकों में अपनी मौजूदगी मजबूत की है.

    चीन फिंगर 4 और फिंगर 8 के बीच के इलाकों पर कब्जा कर रहा है. इस इलाके में फैले पर्वतों को फिंगर कहा जाता है. चीन ने भारत के कदम का पुरजोर विरोध किया है. हालांकि, भारत यह कहता रहा है कि ये चोटियां एलएसी के इस ओर हैं. भारत ने चीनी अतिक्रमण के प्रयासों के बाद क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक एवं हथियार भी भेजे हैं. साथ ही, क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई है.

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