कृषि विधेयक के विरोध में उतरे तेजस्वी, बोले- बेरोजगार युवा और किसान मिलकर सरकार को उखाड़ फेंकेंगे

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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाया गया किसान उपज व्‍यापार एवं वाणिज्‍य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक, 2020 और किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) का मूल्‍य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक, 2020 विवादों में घिर गया है. हालांकि ये दोनों ही विधेयक लोकसभा में पारित हो गया गया है पर विधेयक को किसान विरोधी बताते हुए गुरुवार को केंद्रीय मंत्री और शिरोमणि अकाली दल (SAD) की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया. जाहिर है विपक्षी दलों के विरोध के बीच अपने सहयोगियों का साथ खोना मोदी सरकार के लिए झटका माना जा रहा है. इसी क्रम में अब बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी विरोध का स्वर बुलंद करते हुए सरकार को किसान विरोधी करार दिया है.

अध्यादेश वापस लेने की मांग करते हुए तेजस्वी यादव ने अपने ट्वीट में लिखा, नौजवान के बाद किसान अब सरकार के निशाने पर. आरजेडी किसान विरोधी ड़बल इंजन सरकार द्वारा लोकसभा में पारित किसान विरोधी अध्यादेशों पर मुखरता से अपना पुरजोर विरोध प्रकट करती है. बेरोज़गार युवा और किसान मिलकर इस निकम्मी सरकार को उखाड़ फेकेंगे.

बता दें कि  किसान उपज व्‍यापार एवं वाणिज्‍य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक, 2020 में एक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण का प्रावधान किया गया है. इसमें किसान और व्‍यापारी विभिन्‍न राज्‍य कृषि उपज विपणन विधानों के तहत अधिसूचित बाजारों के भौतिक परिसरों या सम-बाजारों से बाहर पारदर्शी और बाधारहित प्रतिस्‍पर्धी वैकल्पिक व्‍यापार चैनलों के माध्‍यम से किसानों की उपज की खरीद और बिक्री लाभदायक मूल्‍यों पर करने से संबंधित चयन की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे.

हीं, किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) का मूल्‍य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक, 2020 में कृषि समझौतों पर राष्‍ट्रीय ढांचे के लिए प्रावधान है, जो किसानों को कृषि व्‍यापार फर्मों, प्रोसेसरों, थोक विक्रेताओं, निर्यातकों या बड़े खुदरा विक्रेताओं के साथ कृषि सेवाओं और एक उचित तथा पारदर्शी तरीके से आपसी सहमति वाला लाभदायक मूल्‍य ढांचा उपलब्ध कराता है.

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