बिहार:औद्योगिक क्षेत्रों में अब 10 प्रतिशत जमीन कमजोर वर्ग और महिलाओं के लिए रिजर्व

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बिहार के औद्योगिक क्षेत्रों में अब 10 प्रतिशत जमीन सिर्फ अनुसूचित जाति-जनजाति, अति पिछड़ों और महिलाओं के लिए आरक्षित होगी। राज्य सरकार ने कमजोर तबके के लोगों और खासकर महिलाओं को उद्योग के क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए यह निर्णय लिया है। इनके लिए आरक्षित भूखंडों का आकार अधिकतम 0.25 एकड़ का होगा।

राज्य सरकार ने कोरोना काल में उद्योग क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण प्रयोग किए हैं। सबसे बड़ा बदलाव तो औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति-2016 में किया गया है। पहले इसमें कोविड अध्याय को जोड़ते हुए एक साल में निवेश करने वालों को अतिरिक्त सुविधाएं देने की व्यवस्था की गई। वहीं एससी-एसटी की तर्ज पर अति पिछड़ों को भी उद्योग लगाने परह 15 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज अनुदान की व्यवस्था की गई है। बीते दिनों राज्य कैबिनेट ने औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन आवंटन को लेकर बियाडा की नई नीति को मंजूरी दी है। अब जहां उद्योगों के साथ-साथ स्टार्टअप को भी औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन मिलेगी, वहीं एससी-एसटी, अति पिछड़ों और महिलाओं के लिए अलग से जमीन आरक्षित करने की भी व्यवस्था कर दी है।

300 एकड़ जमीन हुई आरक्षित
बिहार आधारभूत संरचना प्राधिकार (बियाडा) अब उपलब्ध जमीन का 10 प्रतिशत हिस्सा केवल एससी-एसटी, अति पिछड़ों और महिलाओं को ही आवंटित करेगा। बता दें कि बियाडा के राज्य में इस वक्त 65 औद्योगिक क्षेत्र हैं, जिसमें से 13 हाल ही में चीनी मिलों की जमीन मिलने पर अधिसूचित हुए हैं। मौजूदा वक्त में बियाडा के पास आवंटन के लिए तकरीबन तीन हजार एकड़ से अधिक जमीन है। इस लिहाज से 300 एकड़ जमीन एससी-एसटी, अति पिछड़ों और महिलाओं के लिए आरक्षित हो गई है।

60 प्रतिशत जमीन सिर्फ एससी-एसटी को
बियाडा द्वारा जो 10 प्रतिशत जमीन आरक्षित की गई है, उसमें एससी-एसटी, अति पिछड़ों और महिलाओं की अलग-अलग हिस्सेदारी भी तय कर दी गई है। इसमें सर्वाधिक 60 प्रतिशत जमीन एससी-एसटी को आवंटित की जाएगी। 30 प्रतिशत जमीन अति पिछड़े वर्ग के लोगों को मिलेगी और शेष 10 प्रतिशत महिलाओं के लिए होगी।

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