संयुक्त राष्ट्र महासभा में बोले जिनपिंग- युद्ध नहीं चाहता चीन, बातचीत से सुलझाएंगे सभी मुद्दे

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संयुक्त राष्ट्र महासभा का 75वां सत्र 15 सितंबर से शुरू हो गया है। महासभा के 75वें सत्र की आम चर्चा 22 सितंबर से शुरू हुई है, जो 29 सितंबर तक चलेगी। संयुक्त राष्ट्र ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर महासभा सत्र पूरी तरह से ऑनलाइन आयोजित करने का फैसला किया है। पहली बार कई देशों के नेता सत्र में शामिल होने न्यूयॉर्क नहीं गए हैं। सभी ने रिकॉर्ड किए गए अपने वीडियो संदेश भेजे हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र में आम चर्चा के दौरान मंगलवार को अपने संबोधन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि ‘चीन विश्व का सबसे बड़ा विकासशील देश है जो शांतिपूर्ण, खुले, सहकारी और सामान्य विकास के लिए प्रतिबद्ध है। हम कभी भी प्रभाव के विस्तार, विस्तारवाद या क्षेत्र के विस्तार को लेकर नहीं सोचते हैं। किसी भी देश के साथ शीत युद्ध या गर्म युद्ध लड़ने का हमारा कोई इरादा नहीं है।’
चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि ‘हम बातचीत और समझौते के माध्यम से मतभेदों को दूर करने और दूसरों के साथ विवादों को हल करने के लिए प्रयास जारी रखेंगे। जिनपिंग ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के भाषण में ‘सभ्यताओं के टकराव’ के खतरों को लेकर दुनिया को सचेत किया।

चीनी राष्ट्रपति से पहले अपने संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना को लेकर बार-बार झूठ बोला और दुनिया को गुमराह किया। ट्रंप ने कहा कि हमें उस राष्ट्र को जवाबदेह ठहराना चाहिए जिसने इस वायरस को दुनिया पर फैलाया है, ये देश चीन है। ट्रंप ने कहा कि वायरस के शुरुआती दिनों में चीन ने घरेलू यात्राएं तो बंद कर दीं जबकि चीन से दुनियाभर के लिए उड़ाने जारी रहीं और सारी दुनिया में संक्रमण फैल गया।

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