बिहार:तेजी से घटे कोरोना केस, लेकिन टेस्ट क्वालिटी सवालों के घेरे में

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रैपिड एंटीजन टेस्ट (RAT) का व्यापक उपयोग(92%),ज्यादा विश्वसनीय RT-PCR टेस्ट का इस्तेमाल महज 6 फीसदी हो रहा है

बिहार प्रशासन आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी में व्यस्त है, दूसरी तरफ राज्य में कोरोना से निपटने की रणनीतियों को लेकर राजनीति तेज हो गई है.

महामारी के शुरुआती दिनों में स्वास्थ्य विशेषज्ञ बिहार को लेकर चिंतित थे क्योंकि यहां न सिर्फ भारत की सबसे ज्यादा प्रवासी आबादी रहती है, बल्कि स्वास्थ्य सुविधाएं भी ठीक नहीं हैं.

लेकिन कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में बिहार काफी आगे निकलता दिख रहा है, क्योंकि यहां केसों की संख्या उल्लेखनीय ढंग से कम हो गई है. विशेषज्ञों की राय है कि रैपिड एंटीजन टेस्ट (RAT) का व्यापक उपयोग भी केसों में गिरावट का एक कारण हो सकता है जिसकी विश्वसनीयता पहले से ही सवालों के घेरे में है.

बिहार में तेजी से कम होते केस

अगर सितंबर के पिछले दो हफ्तों (11-23 सितंबर) की तुलना अगस्त की इसी अवधि (11-23 अगस्त) से करें तो राज्य के लगभग सभी जिलों में कम केस दर्ज किए गए हैं.

जिलेवार आंकड़ों से पता चलता है कि बिहार के 38 में से 36 जिलों में कोरोना केसों की संख्या कम हो गई है. सबसे ज्यादा गिरावट पटना में दर्ज हुई है. 11-23 अगस्त के बीच पटना में जितने केस दर्ज हुए थे, उसकी तुलना में 11-23 सितंबर के बीच 1,817 केस कम दर्ज हुए.

इसके अलावा, पश्चिम चंपारण में 1,325, बेगूसराय में 1,249 और मधुबनी में 1,188 कम केस दर्ज हुए. सिर्फ सुपौल और जमुई दो ऐसे जिले हैं जहां 11-23 अगस्त की तुलना में सितंबर की इसी अवधि में ज्यादा केस दर्ज हुए हैं. सुपौल में 270 और जमुई में 53 केस ज्यादा दर्ज हुए हैं.

नए केस में ये गिरावट ऐसे समय में दर्ज की गई है जब राज्य सरकार ने कोरोना की रोजाना टेस्टिंग बढ़ा दी है. 11 अगस्त को राज्य में 75,500 टेस्ट हुए थे. 21 सितंबर को एक दिन में होने वाले ​टेस्ट की संख्या 1.94 लाख रही.

इंडिया टुडे की डेटा इंटेलीजेंस यूनिट (DIU) ने विश्लेषण किया कि सितंबर और अगस्त के दो हफ्ते की अवधि (11 से 23 के बीच) में कितने नए केस जुड़े.

टेस्ट क्वालिटी पर सवाल

बिहार में ज्यादातर रैपिड एंटीजन टेस्ट किए जा रहे हैं. इसमें टेस्ट का रिजल्ट जल्दी मिल जाता है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता संदिग्ध है. 21 सितंबर के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 92 फीसदी एंटीजन टेस्ट हो रहे हैं. ज्यादा विश्वसनीय RT-PCR टेस्ट का इस्तेमाल महज 6 फीसदी हो रहा है.

पटना एम्स में मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ रवि कीर्ति के मुताबिक, “हम भी नोटिस कर रहे हैं कि पिछले महीने से कम केस आ रहे हैं. पिछले महीनों की तुलना में अब खासकर जुलाई और अगस्त में अस्पतालों पर कम दबाव है. रैपिड एंटीजन टेस्ट का उपयोग अब बड़े पैमाने पर किया जा रहा है. आरटी-पीसीआर टेस्ट की तुलना में ये कम संवेदनशील हैं. लेकिन केसों की संख्या में तेजी से आई गिरावट ​के लिए सिर्फ एंटीजन टेस्ट को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है.”

विशेषज्ञों का कहना है कि उन्होंने नहीं देखा कि कोई विशेष उपाय किया गया हो, लेकिन केस में भारी गिरावट का एक कारण एंटीजन टेस्ट हो सकता है क्योंकि टेस्ट का बड़ा हिस्सा एंटीजन टेस्ट के जरिये ही किया जा रहा है, जिसकी नगेटिव रिपोर्ट 30-50 फीसदी तक गलत हो सकती है.

पटना के सीनियर कंसल्टेंट फिजीशियन डॉ. दिवाकर तेजस्वी ने कहा, “मुझे यह भी हैरानी है कि बिना किसी विशेष अभियान के अचानक केस की संख्या में गिरावट देखी जा रही है. मुझे लगता है कि एंटीजन टेस्ट पर निर्भरता और कुशल लैब टेक्निशियन की कमी इसका प्रमुख कारण है. एंटीजन टेस्ट में इस बात की बहुत ज्यादा संभावना है कि संक्रमित लोगों का पता न चल पाए और उनका टेस्ट रिजल्ट नगेटिव आ जाए.”

हालांकि, ऐसा लगता है कि राज्य सरकार ज्यादा से ज्यादा टेस्ट संख्या बढ़ाने को लेकर चिंतित है.

11 सितंबर को एक रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था, “बिहार में कुछ लोग बिना किसी तथ्य के हमारी आलोचना करते रहते हैं. मार्च में हमने कोरोना टेस्ट की क्षमता बढ़ाने का फैसला किया और आज हर दिन 1.5 लाख से ज्यादा लोगों का टेस्ट किया जा रहा है. हमारे यहां कोरोना को लेकर पर्याप्त व्यवस्था है.”

भारत में 28 सितंबर को 24 घंटे के अंदर 82,000 से ज्यादा नए केस दर्ज हुए और कन्फर्म कसों की कुल संख्या 60 लाख को पार कर गई. बिहार में कोरोना केसों की कुल संख्या 178,882 है और कुल एक्टिव केस 13,457 हैं.

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