बिहार चुनाव 2020: कैदी वैन से नामांकन भरने पहुंचे मोकामा के ‘छोटे सरकार’,

0
79

अपना नामांकन रद्द होने की आशंका कारण पत्नी से भी निर्दलीय करवाया नामांकन

बिहार की राजनीति में वैसे तो कई बाहुबली नेताओं के बारे में आपने सुना होगा, लेकिन हम बात कर रहे हैं मोकामा के ‘छोटे सरकार’ यानी की बाहुबली अनंत सिंह की जो पांचवीं बार चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं.

अनंत सिंह को इस क्षेत्र के लोग ‘छोटे सरकार’ के नाम से बुलाते हैं. बिहार विधासभा चुनाव 2020 में ‘छोटे सरकार’ को आरजेडी से टिकट मिला है. जेल में बंद मोकामा के ये बाहुबली विधायक कैदी वैन से नामांकन भरने के लिए बाढ़ अनुमंडल मुख्यालय पहुंचे. यह पहली बार नहीं है जब अनंत सिंह जेल में रहकर ही चुनाव लड़ रहे हैं.

पहले विरोध अब थमा दिया टिकट

गंगा किनारे बसे मोकामा शहर की बात की जाए तो जो एक नाम वहां के लोगों की जुबान पर सबसे पहले आता है वो है अनंत सिंह.

निर्दलीय विधायक अनंत सिंह इस बार आरजेडी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे हैं. पिछले चुनाव में आरजेडी ने अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास को मुद्दा बनाया था लेकिन राजनीतिक बाजी ऐसी पलटी कि इस विधानसभा चुनाव में उन्हें ही टिकट थमा दिया.

2015 मे बतौर निर्दलीय उम्मीदवार उन्होंने महागठबंधन के प्रत्याशी नीरज कुमार को शिकस्त दी थी. 

बता दें कि अनंत सिंह पिछली चार बार से लगातार मोकामा विधानसभा सीट से विधायक हैं, 2005 फरवरी, 2005 अक्टूबर, 2010 में वे जेडीयू के टिकट पर चुनाव जीते. 2015 में उन्होंने निर्दलीय पर्चा भर दिया और जीत हासिल की.

अनंत सिंह का क्या है सियासी खेल
नीतीश कुमार से बगावत करने के बाद अनंत सिंह ने लोकसभा में कांग्रेस का साथ दिया था. कांग्रेस की तरफ से अनंत सिंह ने अपनी पत्नी को मुंगेर से प्रत्याशी बनाया. लेकिन पत्नी नीलम देवी हार गईं. उसके बाद अनंत सिंह पर कई मामले में एक्शन हुए और अनंत सिंह को जेल में भेज दिया गया. लेकिन अनंत सिंह को राजद ने इस बार मौका दिया और मौकामा से उन्हें टिकट दिया. आज अनंत सिंह ने मोकामा से नामांकन भी कर दिया. लेकिन इन सब के बीच चौंकाने वाली बात यह है कि अनंत सिंह ने मोकामा से ही अपनी पत्नी को निर्दलीय नामांकन करवा दिया है.अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने मोकामा सीट से ही निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन के पीछे अनंत सिंह ने सियासी खेल कर दिया है. अनंत सिंह जानते हैं कि उन्होंने बगावत सरकार से की इसलिए अनंत सिंह किसी भी हाल में अपनी विधायकी को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं. जानकारी बताते हैं कि अनंत सिंह ने अपनी पत्नी नीलम देवी को यूं ही मोकामा से सियासी मैदान में नहीं उतारा है. जानकार बताते हैं कि अनंत सिंह अभी जेल में हैं ऐसा में किसी भी कारण से उनका नॉमिनेशन रिजेक्ट हो जाता है कि वो अपनी पत्नी को मोकाम से जीताने में लगेंगे अगर अनंत सिंह का नॉमिनेशन सही पाया जाता है और कोई ऑब्जेक्शन नहीं होता है तो अनंत खुद चुनावी मैदान में ताल ठोकेंगे और पत्नी नीलम देवी बैक हो जाएंगी.

जेल में बंद हैं अनंत सिंह

अनंत सिंह इस वक्त अवैध एके- 47 रायफल की कथित तौर पर बरामदगी के मामले में जेल में बंद हैं. बता दें कि बीते साल अगस्त में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें अनंत सिंह का रिश्तेदार दो एके- 47 राइफल के साथ दिख रहा था. बाद में पुलिस ने उनके मोकामा स्थिति लदमा गांव में दबिश देकर यहां से एके- 47 रायफल बरामद की थी. अनंत सिंह ने इसी केस में सरेंडर किया था, फिलहाल वह पटना के बेउर जेल में बंद हैं.

इस तरह मोकामा के ‘छोटे सरकार’ बने अनंत सिंह 

बताया जाता है कि बिहार के बाढ़ इलाके में राजपूत और भूमिहारों का खूनी इतिहास रहा है. रात को लोग घरों से निकलने से भी डरते थे. ऐसे में अनंत सिंह भूमिहार समुदाय के रक्षक के रूप में उभरे. 

अनंत सिंह की किस्मत के सितारे उस वक्त चमक उठे जब नीतीश कुमार ने साल 2005 में जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर उन्हें मोकामा विधानसभा से चुनाव मैदान में उतार दिया. 

अनंत सिंह को टिकट मिला, तो उनके आपराधिक इतिहास को लेकर भी खूब चर्चाएं हुईं. इसके बावजूद अनंत सिंह मोकामा विधानसभा सीट से जीतने में कामयाब रहे. 

इसके बाद छठ पर धोती बांटना, रोजगार के लिए गरीबों को तांगे देकर मदद करना और रमजान के दिनों में इफ्तार करना. उनके घर पर लोगों का जमावड़ा लगने लगा और वो खुद ही लोगों की समस्या सुलझाने लगे जिससे पूरे इलाके में उनकी छवि गरीबों के मसीहा की बन गई और वो लोगों के छोटे सरकार बन गए.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.