बिहार चुनाव2020: PM मोदी के ‘चेहरे’ पर फोकस, NDA प्रत्याशी चुनाव में करेंगे इस्तेमाल

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 बिहार में 2014 के बाद से होने वाले कोई भी चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम चर्चा में रहा है, लेकिन इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में मोदी का ‘चेहरा’ मुद्दा बना हुआ है. मोदी के चेहरे को लेकर दो दलों में ‘चखचख’ हो रही है.

केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल लोक जनशक्ति पार्टी ने बिहार चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व को नकारते हुए अकेले चुनावी मैदान में उतरकर चुनाव को रोचक बना दिया है. पहले चरण में 71 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव में एलजेपी ने बीजेपी के खिलाफ तो उम्मीदवार नहीं उतारे, लेकिन उन सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं, जहां से जेडीयू चुनाव मैदान में उतरी है.

इस बीच, एलजेपी स्पष्ट कह रही है वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांगेगी. इधर, बीजेपी का कहना है कि बिहार राजग में शामिल दल ही प्रधानमंत्री के चेहरे का इस्तेमाल चुनाव में कर सकते हैं.

कहा जा रहा है कि एलजेपी ने एक रणनीति के तहत बिहार में राजग में नहीं रहकर भी नरेंद्र मोदी के नाम का लाभ उठाने और प्रधनमंत्री के ‘चेहरे’ को मुद्दा बना दिया है. एलजेपी के एक नेता ने नारा देते हुए कहा, ‘मोदी से बैर नहीं, नीतीश तेरी खैर नहीं.’

दीगर बात है कि इसे लेकर जेडीयू अब तक खुलकर सामने नहीं आई है. हालांकि, बीजेपी इसे लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुकी है.

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी तो स्पष्ट कर चुके हैं कि बिहार चुनाव में राजग में शामिल बीजेपी, जेडीयू, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा को छोड़कर कोई और पार्टी प्रधानमंत्री के चेहरे का इस्तेमाल नहीं कर सकते. अगर ऐसा कोई दल करेगा, तो इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की जाएगी. लेकिन अब रामविलास पासवान के निधन के बाद स्तिथि बदल गई , लोजपा के लिए रामविलास पासवान का चेहरा ही काफी होगा ऐसा माना जा रहा है.

इस बीच, हालांकि कार्यकर्ताओं में उलझन जरूर है. जेडीयू और बीजेपी के कार्यकर्ता तो एकजुट हैं, लेकिन एलजेपी को लेकर उलझन है. कार्यकर्ता एलजेपी को राजग का हिस्सा मानते हैं, लेकिन उन्हें इस बात का भी डर सता रहा है कि एलजेपी और जेडीयू की तनातनी में महागठबंधन को लाभ ना हो जाए. कार्यकर्ता तो यहां तक कहते हैं कि इस तनातनी को शीर्ष नेतृत्व को मिल बैठकर निपटाना चाहिए.

बहरहाल, केंद्र की सत्ता में बीजेपी की सहयोगी पार्टी एलजेपी के बिहार चुनाव में बीजेपी की सहयोगी जेडीयू प्रत्याशियों के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतारे जाने के बाद चुनाव रोचक हो गया है, लेकिन देखने वाली बात होगी कि प्रधानमंत्री के चेहरे को लेकर मतदाता किस पार्टी को पसंद करते हैं.

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