बिहार चुनाव 2020: पप्पू यादव होंगे पीडीए के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार, मधेपुरा से लड़ेंगे चुनाव

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बिहार विधानसभा चुनाव में जन अधिकार पार्टी (लो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन (पीडीए) के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे. यह घोषणा गठबंधन में शामिल सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया (एसडीपीआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एम के फैजी, आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में की. इस अवसर पर एम के फैजी ने एलान किया कि पप्पू यादव मधेपुरा से चुनाव लड़ेंगे.

जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व सांसद पप्पू यादव ने कहा कि सुरक्षित और खुशहाल बिहार उनकी प्राथमिकता होगी और इसके लिए काम किया जायेगा. हर जरूरी जगह पर सीसीटीवी कैमरे लगवाये जायेंगे. उन्होंने कहा कि जातीय और साम्प्रदायिक दंगों को किसी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.

बिहार से पलायन नहीं रुका तो इस्तीफा दे देंगे- पप्पू यादव

पप्पू यादव ने वादा किया कि अगर वह मुख्यमंत्री बनते हैं तो बिहार से पलायन रूकेगा और ऐसा नहीं हुआ तो वे इस्तीफा दे देंगे. उन्होंने लालू प्रसाद और नीतीश कुमार पर परोक्ष निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछले 30 सालों में दोनों ने बिहार के किसानों की जिंदगी बर्बाद कर दी और बाजार समिति खत्म कर दी गयी. उन्होंने दावा किया कि भाजपा नीतीश कुमार को और नीतीश कुमार भाजपा को हराने में लगे हैं.

उन्होंने बिहार में बेहतरीन अस्पताल और स्कूल बनवाने का भी वादा किया. उन्होंने कहा कि फूड प्रोसेसिंग, शाहाबाद के धान, सीमांचल-मिथिला के माछ-मखान और मगध के पान से बिहार की जिंदगी बदल सकते हैं. साथ ही उन्होंने केला-लीची और जूट-गन्ना की खेती और इसपर आधारित उद्योग को बढ़ावा देने की बात भी कही. 

जाप अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पिछले 30 सालों में ‘दोनों भाइयों’ ने बिहार के किसानों की जिंदगी बर्बाद कर दी. बाजार समिति खत्म कर दी गयी. उन्होंने कहा कि यदि सरकार बनी तो इसे बहाल किया जाएगा और हर अनुमंडल में कोल्ड स्टोरेज खोला जाएगा. उन्होंने बिहार में प्रति व्यक्ति कम आय के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिममेदार ठहराया. 

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ऊंची जाति को लालू प्रसाद का डर दिखाना बंद करें और भाजपा दलितों और मुसलमानों को डराना बंद करे. पप्पू यादव ने भाजपा नेताओं से पूछा कि जब नीतीश कुमार ने पटना यूनिवर्सिटी को केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनाने का आग्रह किया तो प्रधानमंत्री मोदी ने उसे क्यों नहीं स्वीकार किया? उन्होंने राज्य सरकार से चमकी बुखार से बच्चों की मौत, 56 लाख बाढ़ पीड़ितों और अन्य मामलों पर सवाल पूछे।

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