फारुक अब्दुल्ला ने महबूबा मुफ्ती के साथ गठबंधन की घोषणा की, अनुच्छेद 370 को बहाल करने की मांग की

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नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला ने आज बैठक बुलाई. बैठक में पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती भी शामिल हुईं. इस बैठक के बाद फारुक अब्दुल्ला ने बताया कि राजनीतिक दलों ने गठबंधन को औपचारिक रूप दिया है.

फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि ‘पीपल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन’ का उद्देश्य जम्मू कश्मीर का वह संवैधानिक दर्जा बहाल करना है, जो पिछले साल पांच अगस्त से पहले तक था.

उन्होंने कहा कि ‘पीपल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन’ जम्मू कश्मीर मुद्दे के हल के लिए सभी पक्षों के बीच बातचीत की पहल का समर्थन करता है.

नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष अब्दुल्ला ने कहा कि हम कुछ दिन बाद फिर मुलाकात करेंगे, जिसमें आगे के जो कदम हमें उठाने हैं, वो आपके सामने लाएंगे.

बैठक में कौन हुए शामिल
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के आवास पर बैठक हुई और इसमें पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, पीपल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन, पीपल्स मूवमेंट के नेता जावेद मीर और माकपा नेता मोहम्मद युसूफ तारिगामी ने भी हिस्सा लिया.

बता दें कि मोदी सरकार ने पिछले साल पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का एलान किया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था. पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस इस फैसले का विरोध कर रही है.

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को 14 महीने की हिरासत के बाद मंगलवार को रिहा किया गया था. इसके बाद फारुक अब्दुल्ला ने उनके आवास पर बुधवार को मुलाकात की थी.

गुपकार समूह, छह राजनीतिक दलों का वह समूह है जो जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए लड़ाई लड़ रहा है. इस समूह का गठन 22 अगस्त 2019 को फारूक अब्दुल्ला के गुपकार रोड स्थित आवास पर हुई बैठक में किया गया था. गुपकार समूह ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को असंवैधानिक करार देते हुए इसकी बहाली के लिए संघर्ष करने का ऐलान किया था.

हालांकि, गुपकार समूह के गठन की नींव जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के एक दिन पहले ही पड़ गई थी, जब फारूक अब्दुल्ला के गुपकार रोड स्थित आवास पर इन्हीं छह दलों की बैठक हुई थी जो समूह के सदस्य हैं. बैठक के बाद साझा बयान जारी किया गया था, जिसमें जम्मू कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा, पहचान और संविधान बरकरार रखने को लेकर सभी सदस्य दलों ने सहमति जताई थी.

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