बिहार चुनाव में खेल सत्ता का : कुर्सी एक और दावेदार 6, बहुत ……..है भाई ?

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विधानसभा चुनाव प्रचार का काम जोरों पर है. चुनावी मैदान में उतरने के पहले कई बार गठबंधन में लड़ रहे दल या अकेले चुनाव लड़ रहे दल पहले से मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर देते हैं और उस चेहरे के साथ चुनावी दंगल में शामिल होते हैं और कई बार परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री तय किए जाने की बात होती है. 2015 के चुनाव में भाजपा-लोजपा गठबंधन ने बगैर किसी मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव लड़ा था मगर इस बार दोनों ने अलग राह पकड़ राखी है. भाजपा जहां नीतीश कुमार को अपना मुख्यमंत्री मानने की घोषणा कर चुकी है तो लोजपा इसी कारण एनडीए से अलग चुनाव लड़ रही है. दूसरी तरफ राजद -कॉंग्रेस सहित इसबार 3 और गठबंधन चुनाव में बन गए है और सभी ने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर दावा भी ठोंक रखा है. ये अलग बात है कि इन गठबंधनों को जनता कितनी सीट देती है ये तो 10 नवंबर को ही पता चलेगा मगर मैदान में मुख्यमंत्री पद के सभी दावेदार वादों का पिटारा खोल जनता को लॉलीपॉप दे रहे हैं.

पिछले दो चुनाव में मुख्यमंत्री पद के अकेले दावेदार थे नीतीश कुमार

पिछले दो चुनावों की बात करें तो साल 2010 में एनडीए ने सीधे नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था जबकि आरजेडी के साथ चुनाव मैदान में उतरी पार्टियों ने चुनाव परिणाम बाद मुख्यमंत्री तय करने के करार पर चुनाव लड़ा था, उसके बाद पिछली बार 2015 में विधानसभा चुनाव के जेडीयू और आरजेडी ने साथ महागठबंधन दल बन कर जब चुनाव लड़ा था तब महागठबंधन की ओर से नीतीश कुमार का चेहरा सीएम के लिए सामने रखा गया था, जबकि एनडीए बनाम बीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे के साथ चुनाव लड़ा और चुनाव परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री तय करने की बात कही थी.यानि 10- साल के शासन काल मे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने कोई और विकल्प नहीं था, लेकिन इस बार डगर मुश्किल है और मैदान में मुख्यमंत्री पद के दावेदार एक-दो नही बल्कि 6 हैं.

Bihar Election: 6 CM Candidate in bihar election battle...First time in bihar when half dozen claiming to be CM ann

इस बार मुख्यमंत्री पद के 6 दावेदार

बिहार विधान सभा में पिछले दो  विधान सभा चुनाव की बात करें तो नीतीश कुमार के सामने कोई नहीं था. इस बार चुनावी मैदान में कुल 6 मुख्यमंत्री के दावेदार हैं .एनडीए की बात करें तो बीजेपी जेडीयू बनाम एनडीए ने अपना मुख्यमंत्री पद का दावेदार नीतीश कुमार को माना है तो महागठबंधन में आरजेडी के साथ कांग्रेस और वाम दल सहित सभी ने पहली बार लालू के लाल तेजस्वी यादव को अपने मुख्यमंत्री पद का दावेदार चुना है. तीसरे नंबर पर दावेदारी की है एलजेपी ने एलजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान सीएम पद के दावेदार है, वहीं ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट ने पूर्व मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा को सीएम पद का दावेदार बनाया है. पांचले नंबर पर हैं पांच बार सांसद रहे पप्पू यादव, पीडीए गठबंधन ने पप्पु को मुख्यमंत्री का दावेदार बनाया है वहीं छठे नंबर पर हैं स्वघोषित पुष्पम प्रिया चौधरी, प्लुरल्स पार्टी से चुनावी मैदान में उतरी ये छठी मुख्यमंत्री पद की दावेदार हैं जिन्होने खुद को अखबारों में विज्ञापन के जरिए खुद की दावेदारी कर दी थी .
बिहार में चुनावी सरगर्मी के बीच इन दावेदारों की दावेदारी का चुनावी गणित कितना सुलझ पाता है किसके सर ताज पोशी होती है इसके लिए चुनावी परिणाम का इंतजार करना होगा.

किसमे कितना है दम

नीतीश कुमार

मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों की लिस्ट में सबसे पहला नाम आता है बिहार के मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का, नीतीश 15 सालों से बिहार के मुख्यमंत्री है उनके राजनीतिक अनुभव के आगे कोई भी उम्मीदवार पानी भरता हुआ नजर नहीं आता.

नीतीश ने पहली बार 1985 में विधायक बन अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करी. इसके बाद 1989 में 9वीं लोकसभा के लिए चुने गए , नीतीश ने अबतक अपने राजनितिक करियर में कई प्रमुख पद संभाले जिसमें कृषि मंत्री, रेल मंत्री पद शामिल है. नीतीश 24 नवम्बर 2005 से अबतक बिहार के मुख्यमंत्री है.

तेजस्वी यादव

मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में अब दूसरा नाम आता है बिहार के लोकप्रिय नेता लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव का, तेजस्वी महागठबंधन का मुख्यमंत्री फेस है. वे एक युवा नेता है जिन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर राजनीति में कदम रखा था.

नीतीश कुमार की अगुवाई में बनी महागठबंधन की सरकार में उनके पास सड़क और भवन विभाग था. लेकिन, बाद में जदयू के महागठबंधन से अलग होने से वह सरकार से बाहर हो गये. एक ही कार्यकाल में उन्हें उप मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष दोनों का अनुभव मिला.

उपेन्द्र कुशवाहा 

बीस साल के राजनीतिक अनुभव वाले उपेन्द्र कुशवाहा इस बार डेमोक्रेटिक सेकुलर एलायंस के मुख्यमंत्री उम्मीदवार है. कुशवाहा साल 2000 में पहली बार विधायक बने, साल 2013 में जदयू से अलग हो कर उन्होंने अलग पार्टी रालोसपा का गठन किया.

पप्पू यादव

प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन के सीएम प्रत्याशी पप्पू यादव पहली बार साल 1990 में सिंहेश्वरस्थान विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक बने थे, साल 2015 में उन्होंने अपनी पार्टी जन अधिकार पार्टी ( लोकतांत्रिक ) गठन किया, पप्पू यादव के नाम कई सामाजिक कार्य है.

पुष्पम प्रिया चौधरी  

पुष्पम जदयू के पूर्व एमएलसी विनोद चौधरी की पुत्री हैं, पहली बार मार्च, 2020 में राजनीति में आई और प्लुरल्स पार्टी बनाई, उन्होंने राजनीति में आते ही खुद को बतौर मुख्यमंत्री पेश कर दिया, राजनीति में अब तक उनकी कोई उपलब्धि नहीं रही है. इस बार चुनाव में उन्होंने सभी सीटों पर उम्मीदवार देने की घोषणा की है.

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