बिहार चुनाव: बदले की आग ने बना दिया ‘डॉन’,जेल में किया Ph.D और नाचती थीं डांसर्स

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बिहार की राजनीति में आपराधिक प्रवृत्ति वाले नेताओं का हमेशा से ही बोलबाला रहा है. बीते दो दशकों से राज्य में चाहे लालू प्रसाद यादव या फिर नीतीश कुमार की सरकार रही हो, लेकिन इन बाहुबलियों का बोलबाला रहता ही है. इन बाहुबलियों की आपराधिक किस्से और कहानियों का कोई अंत नहीं है. बिहार के इन बाहुबलियों की करतूत आए दिन मीडिया की सुर्खियां बनती रहती है. वैसे तो बिहार में कई बाहुबली हुए हैं, लेकिन बीते कुछ सालों से शहाबुद्दीन, सूरजभान सिंह, अनंत सिंह, आनंद मोहन, पप्पू यादव, सुनील पांडे, राजन तिवारी और विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला जैसे कुछ बड़े नाम की चर्चा किए वगैर बिहार में बाहुबलियों का इतिहास अधूरा रह जाता है. बाद में ये सभी अपराध की दुनिया के रास्ते राजनीति में कदम रखा.

कहानी अपराध के रास्ते राजनीति में पहुंचने की
ऊपर बताए गए सभी नामों में एक सामनता यह है कि पहले इनकी पहचान एक दबंग अपराधी के तौर पर बनी थी और बाद में इन लोगों ने राजनीति में अपनी धाक जमाई. एक ऐसे ही बाहुबली हैं मुन्ना शुक्ला इनके किस्से किसी फिल्मी हीरो की कहानी से कम नहीं है. इस बार के विधानसभा चुनाव में भी शुक्ला वैशाली संसदीय क्षेत्र में पड़ने वाले लालगंज विधानसभा सीट से अपना किस्मत आजमा रहे हैं. इस बार शुक्ला निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पर्चा दाखिल किया है. चुनाव आयोग को दिए एफिडेविट में इन्होंने करीब आठ करोड़ की सपत्ति बताई है. इन पर इस समय भी 13 आपराधिक मामले चल रहे हैं.

उत्तर बिहार का सबसे बड़ा बाहुबली

मुन्ना शुक्ला को उत्तर बिहार का सबसे बड़ा बाहुबली माना जाता है. इनके दबंगई के किस्से भी कम दिलचस्प नहीं है. बहरहाल इनके डॉन बनने की खबर पर नजर डालते हैं. मुन्‍ना शुक्ला चार भाइयों में तीसरे नंबर के हैं. 90 के दशक में मुन्ना शुक्ला के बड़े भाई छोटन शुक्ला मुजफ्फरपुर के आस-पास इलाकों में अपराध जगत का बेताज बादशाह हुआ करता था. साल 1994 में छोटन शुक्ला की हत्या हो जाती है और हत्या का आरोप उस समय के मंत्री और आरजेडी नेता बृजबिहारी प्रसाद पर लगता है.

भाई की हत्या के बाद अपराध की दुनिया में कदम रखा
मुन्ना शुक्ला तब पढ़ाई कर रहे थे. कहा जाता है कि भाई की हत्या के बाद ही मुन्ना शुक्ला ने अपराध की दुनिया में कदम रखा. छोटन शुक्ला की हत्या के बाद साल 1994 में मुजफ्फरपुर में प्रदर्शन हो रहा था. गोपालगंज के उस समय के तात्कालीन डीएम जी कृष्णैया की गाड़ी उसी रास्ते से गुजर रही थी जहां पर प्रदर्शन हो रहे थे. तभी भीड़ ने कृष्णैया की गाड़ी को घेर लिया और उन्हें पीट-पीटकर मान डाला. डीएम की हत्या का आरोप मुन्ना शुक्ला सहित 7 लोगों पर लगता है.

मुन्ना शुक्ला दोषी करार दिए जा चुके हैं
कुछ साल पहले ही इस हत्याकांड में कोर्ट ने फैसला सुनाया था. डीएम की हत्या मामले में मुन्ना शुक्ला, आनंद मोहन और उनकी पत्नी लवली आनंद, पूर्व विधायक अखलाक अहमद, प्रोफेसर अरूण कुमार सिंह और जेडीयू नेता हरेंद्र कुमार दोषी करार दिए गए. बाद में कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ मुन्ना शुक्ला और लवली आनंद जमानत दे दी. डीएम की हत्या में एक और बाहुबली आनंद मोहन भी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं.

जेल में रहते PHD और नर्तकी के डांस को लेकर आए थे चर्चा में
शुक्ला एक और मामले में मुजरिम करार दिए गए. 3 जून 1998 को इंदिरा गांधी आयुर्वेदिक संस्थान में पूर्व मंत्री बृजबिहारी प्रसाद की हत्या के मामले में भी मुन्ना शुक्ला दोषी करार दिए जा चुके हैं. साल 1998 में अस्पताल के पार्क में टहलते वक्त बृजबिहारी प्रसाद को एके-47 से भून दिया गया था. इस मामले में एक और डॉन सूरजभान सिंह का नाम भी सामने आया. शुक्ला जेल के अंदर रहते हुए नर्तकी के डांस का लुत्फ भी उठाते पाए गए. इनका फोटो सोशल मीडिया पर सामने आ चुका है. शुक्ला जेल के अंदर रहते पीएचडी की डिग्री हासिल कर भी चर्चा में आए थे.

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