बिहार चुनाव में काला धन :कहाँ से आ रही है फंडिंग,अब तक 15.67 करोड़ से अधिक बरामद

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राहुल गांधी के बिहार आगमन से एक दिन पहले ही कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में बड़ी रकम बरामद हुई है। पुलिस को सूचना 50 लाख की थी लेकिन छापेमारी में लगभग साढ़े 8 लाख हाथ आया है। पटना एसएसपी उपेंद्र कुमार शर्मा ने भी 50 लाख की सूचना मिलने की पुष्टि की है, जिसमें जांच जारी है। अब पड़ताल की जा रही है कि कुल मामला कितनी बड़ी रकम का है। जांच यह भी हो रही है कि पैसा कहां से आया, कौन लाया और किसके लिए लाया, यह राज जांच में खुल ही जाएगा।

चुनाव में जिस तरह से पैसा उड़ रहा है, वह बड़ा सवाल है। इसमें फंडिंग के गेम से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। चुनाव के दौरान अब तक प्रदेश में 15.67 करोड़ रुपया बरामद हुआ है। बिना किसी हिसाब किताब वाले इन रुपयों को चुनाव में इस्तेमाल किया जाना था। अब तक जो भी रुपया बरामद हुआ है वह लग्जरी गाड़ियों से ही मिला है। इसे एक जगह से दूसरे जगह ले जाने की तैयारी थी।

अब तक कहां कितना बरामद हुआ रुपया

चुनाव में एसटीएफ और एफएसटी सहित कई एजेंसियां कार्रवाई में जुटी हैं। अब तक की गई कार्रवाई में 15.67 करोड़ नगद बरामद किया गया है। इसी कड़ी में कई एजेंसियों ने मिलकर 80 लाख 85 हजार 780 नेपाली मुद्रा भी बरामद किया है। अब तक 44 चार पहिया वाहनों को भी बरामद किया गया है। इसमें कुछ ऐसी भी गाड़ियां हैं जिनसे रुपए लाए जा रहे थे। अब एजेंसियां इसकी जांच पड़ताल में जुटी हैं। अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी 75 लाख पटना में हुई थी। पटना के बिस्कोमान भवन के नीचे 30 सितंबर को 75 लाख रुपए एक गाड़ी से बरामद हुआ था। यह कार्रवाई तब हुई थी जब भारत निर्वाचन की टीम पटना में चुनाव की तैयारियों को लेकर जांच में आई थी। नेपाल सीमा से लेकर प्रदेश के कई एरिया में आधा दर्जन से अधिक एजेंसियां ब्लैक मनी जांच में जुटी हैं।

नेपाल से हो रही बिहार विधानसभा फंडिंग

नेपाली करेंसी के बरामद होने से मामला काफी गंभीर हो गया है क्योंकि नेपाल में बैठकर भारत विरोधी गतिविधयों के संचालन में लगे लोगों की राजनीति में भी बड़ी पैठ होती है। यह गठजोड़ कई बार खुल चुकी है। बिहार विधानसभा में लगातार रुपए की बरामदगी ने जो सवाल खड़ा किया है उसकी जांच में कई एजेंसियां जुट हैं। सूत्रों का कहना है कि बिहार में बरामद रुपए में ऐसे कनेक्शन खंगाले जा रहे हैं। नेपाल की खुली सीमा के रास्ते भारतीय क्षेत्र में रुपए के कनेक्शन का यह मामला काफी पुराना है। नोटबंदी के दौरान भी भारी मात्रा में ब्लैक मनी नेपाल सीमा के जिलों में पकड़ी गई थी। नेपाल में भारतीय करेंसी को ब्लैक से व्हाइट करने का भी खेल उजागर हो चुका है।

जांच का दायरा बढ़ा तो खुलेगा बड़ा कनेक्शन

चुनाव के दौरान रुपए की बरामदगी की जांच में लगी एजेंसियां अगर तह तक पहुंचकर पड़ताल की तो बड़ा कनेक्शन सामने आएगा। इसमें नेपाल से लेकर बिहार के अन्य लोगों को भी एक्सपोज किया जा सकता है। इस जांच में ऐसे लोगों की पोल खुल सकती है जो चुनाव तो नहीं लड़ते हैं लेकिन नेताओं को फंडिंग कर चुनाव की गणित सेट करते हैं। इसमें पूंजीपतियों से लेकर बड़े व्यापारियों का भी नाम हो सकता है।

लग्जरी गाड़ियों में नहीं आए रुपए तो पकड़ से बाहर

अब तक जितने भी रुपए बरामद हुए हैं वह लग्जरी गाड़ियों से ही बरामद हुए हैं। लेकिन कहानी डाल और पात वाली है। लग्जरी गाड़ियों की चेकिंग अधिक होती है ऐसे में फंडिंग करने वाले रुपए के एक जगह से दूसरे जगह ले जाने का काम सामान्य गाड़ियों से किया जा सकता है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हर वाहन की चेकिंग की जा रही है। कोई भी वाहन हो चुनाव के दौरान सभी की जांच की जा रही है। आटो से लेकर बाइक तक की जांच की जा रही है।

कांग्रेस में लगा था टिकट बेचने का आरोप

कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय से पैसा बरामद होने के बाद एक बार फिर कांग्रेसियों का विरोध चर्चा में आ गया है जिसमें आरोप लगाया गया था कि पैसा लेकर टिकट बेचा जा रहा है। काग्रेस के कुछ प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों ने दिल्ली में केंद्रीय कमेटी को शिकायत की थी, कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी से लेकर जिलाध्यक्ष तक आरोप लगाया गया था। दिल्ली में कार्रवाई नहीं हुई और शिकायत करने वालों की बात नहीं सुनने पर वह टिकट बेचने के आरोप में प्रदेश कार्यालय में धरने पर बैठ गए थे।

50 हजार से अधिक कैश, तो बताना होता है स्रोत

50 हजार से अधिक कैश नहीं ले जाया जा सकता है। अगर इससे अधिक पकड़ा जाता है तो संबंधित को उस रकम का पूरा हिसाब किताब देना होगा। यह बताना होगा कि पैसा का स्रोत क्या है और इसे कहां और किसलिए ले जाया जा रहा है। ऐसे मामलों में कोई एजेंसी जब पैसा पकड़ती है तो आयकर विभाग के साथ अन्य संबंधित इकाईयों को इसकी सूचना देती है। फिर कई एजेंसियां एक साथ मिलकर जांच करती हैं। पैसा जिसके पास से बरामद होता है वह अगर कोई स्रोत नहीं बता पाता है या संबंधित रुपए से जुड़ी जानकारी नहीं दे पाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।

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