साइबर अपराध का नया केंद्र जामताड़ा की जगह बना नालंदा , जानें किन बैंक खातों पर है इनकी नजर

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साइबर अपराधियों का गिरोह अब झारखंड के जामताड़ा के बदले नालंदा से कंट्रोल हो रहा है। इस गिरोह की नजर सरकारी खातों की मोटी रकम पर रहती है। झारखंड में सरकारी बैंक खातों से 21 करोड़ की फर्जीवाड़े की जांच के बाद सीआईडी की ओर से दर्ज की गई चार्जशीट में इसका खुलासा हुआ है। इस गिरोह ने पलामू के भू अर्जन कार्यालय से 12.60 करोड़ तथा गुमला के समेकित जनजाति विकास अभिकरण (आईटीडीए) खाते से 9.05 करोड़ की निकासी की थी। 

नालंदा का साजन राज मास्टरमाइंड: चार्जशीट के अनुसार गिरोह का मास्टरमाइंड नालंदा का साजन राज है। इसके साथ देशभर में फैले गिरोह के गुर्गे खातों में सेंध लगाने के लिए मिलकर काम करते थे। साजन पुलिस की गिरफ्त में न आए इसके लिए वह मनीष जैन व मंगल नाम का इस्तेमाल करता था। झारखंड के जामताड़ा में साइबर अपराधियों के गैंग से अलग यह गिरोह न सिर्फ हाईप्रोफाइल तरीके से काम करता है, बल्कि गिरोह के सदस्य तकनीकी तौर पर भी काफी माहिर है। इनमें अधिकतर 25 से 40 साल के युवक शामिल हैं। सीआईडी को इस मामले में मुंगेर के भी एक और अपराधी की तलाश है। सीआईडी ने गिरोह के मास्टरमाइंड साजन राज, गणेश लोहरा, पंकज तिग्गा, मो इकबाल अंसारी उर्फ राज, मनीष पांडेय, राजकुमार तिवारी पर चार्जशीट दायर की है।

कैसे ऑपरेट करता है साइबर गैंग : दायर चार्जशीट के अनुसार नालंदा गैंग सरकारी बैंक खातों से जुड़े सिम को पहले ब्लॉक करवाता है। फिर उसका क्लोन सिम मोबाइल कंपनी से जारी करवाता है। फिर क्लोन सिम पर ओटीपी मंगवाकर रुपये की निकासी कर लेता था। रुपया ट्रांसफर करने के लिए चेक की क्लोनिंग भी करता है। नालंदा का साजन राज क्लोन चेक का इंतजाम करता था। इसके बाद गिरोह के गुर्गे चालाकी से सरकारी खातों से लिंक सिम कार्ड का फर्जी सिम जारी करवा लेते थे। पैसों के ट्रांसफर करने के घंटे दो घंटे पहले सिम कार्ड को ब्लॉक करवा दिया जाता था। दो अलग अलग खातों से पैसों को पहले ओडिशा के एक बैंक में शीतल कंस्ट्रक्शन और चंदूभाई पटेल के बैंक खातों में ट्रांसफर कराया गया।  इसके बाद यहां से पुणे, नागपुर, जमशेदपुर, पलामू समेत अन्य जिलों में रहने वाले साइबर अपराधियों के खाते में पैसे ट्रांसफर कराए गए।  सीआईडी ने तकरीबन 90 लाख रुपये राजकुमार तिवारी व मनीष पांडेय के खाते से जब्त किए हैं। सीआईडी ने मास्टरमाइंड के पास से फर्जी सिम, क्लोन चेक बुक की कॉपी भी बरामद की थी।

सरकार का पैसा लूटते हैं : मास्टरमाइंड नालंदा के साजन राज ने गिरफ्तारी के बाद बताया कि वह हमेशा सरकारी खातों को ट्रैक करके उनको लूटता था। वहां मोटी रकम मिलने की संभावना रहती है। उसका गिरोह कभी आमलोगों के खातों पर नजर नहीं डालता। सीआईडी के मुताबिक, गिरोह का मास्टरमाइंड फर्जी नाम मनीष जैन का इस्तेमाल करता था। लेकिन पुलिस ने पैसे ट्रांसफर होने वाले खातों की जांच की तो इसमें एक खाता साजन राज के नाम मिला। इस खाते पर जारी क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल की डिटेल सीआईडी ने तलाशना शुरू किया, तब झारखंड पुलिस उस तक पहुंची।

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