नवरात्रि के अंतिम दिन पूजी जाती हैं मां सिद्धिदात्री, शिव भी करते हैं उपासना

0
79

नवरात्रि के आखिरी दिन यानी नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैं। यह मां दुर्गा का नौंवा रूप हैं। कमल पर विराजमान चार भुजाओं वाली मां सिद्धिदात्री लाल साड़ी में विराजित हैं। इनके चारों हाथों में सुदर्शन चक्र, शंख, गदा और कमल रहता है। सिर पर ऊंचा सा मुकूट और चेहरे पर मंद मुस्कान ही मां सिद्धिदात्री की पहचान है। इस दिन भी कई भक्त अपने घरों में कुंजिकाओं को बिठाते हैं और उन्हें भोजन कराते हैं।

 कैसे करें सिद्धिदात्री की पूजा

घी का दीपक जलाने के साथ-साथ मां सिद्धिदात्री को कमल का फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा जो भी फल या भोजन मां को अर्पित करें वो लाल वस्त्र में लपेट कर दें। निर्धनों को भोजन कराने के बाद ही खुद खाएं।

कौन हैं मां सिद्धिदात्री?

भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही 8 सिद्धियों को प्राप्त किया था। इन सिद्धियों में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व शामिल हैं। इन्हीं माता की वजह से भगवान शिव को अर्द्धनारीश्वर नाम मिला, क्योंकि सिद्धिदात्री के कारण ही शिव जी का आधा शरीर देवी का बना। हिमाचल का नंदा पर्वत इनका प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। मान्यता है कि जिस प्रकार इस देवी की कृपा से भगवान शिव को आठ सिद्धियों की प्राप्ति हुई ठीक उसी तरह इनकी उपासना करने से अष्ट सिद्धि और नव निधि, बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है।

इनका मंत्र इस प्रकार है।

‘ॐ सिद्धिदात्र्यै नम:।

पूजन-अर्चन के पश्चात हवन, कुमारी पूजन, अर्चन, भोजन, ब्राह्मण भोजन करवाकर पूर्ण होता है।

समस्त स्त्रियों में मातृभाव रखने हेतु मां का मंत्र जपा जाता है जिससे देवी अत्यंत प्रसन्न होती हैं। भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। घृत, तिल, भोजपत्र होमद्रव्य हैं।

‘विद्या: समस्तास्तव देवि भेदा:
स्त्रिय: समस्ता: सकला जगत्सु।
त्वयैकया पूरितमम्बयैतत्
का ते स्तुति: स्तव्यपरा परोक्ति:।।’

स्वर्ग तथा मोक्ष पाने हेतु निम्न मंत्र का जप करें। पत्र, पुष्प, तिल, घृत होम द्रव्य हैं।

‘सर्वभूता यदा देवी स्वर्गमुक्ति प्रदायिनी।
त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तयः।।’

भूमि, मकान की इच्‍छा रखने वाले निम्न मंत्र को जपें। साधारण द्रव्य होम के लिए प्रयुक्त करें।

‘गृहीतोग्रमहाचक्रे दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरे।
वराहरूपिणि शिवे नारायणि नमोऽस्तुते।।’

संतान प्राप्ति की इच्‍छा रखने वाले व्यक्ति, स्त्री या पुरुष निम्न मंत्र का जप करें।

‘नन्दगोप गृहे जाता यशोदा-गर्भ-सम्भवा।
ततस्तौ नाशयिष्यामि, विन्ध्याचल निवासिनी।।’

घृत व मक्खन से आहुति दें। इच्‍छा अवश्य पूर्ण होगी।

देवी के पूजन, अर्चन, जप इत्यादि में समय का अवश्य ध्यान रखें अन्यथा कृपा प्राप्त न होगी। नैवेद्य जरूर चढ़ाएं तथा आर्तभाव से प्रार्थना करें।
नैवेद्य एवं प्रसाद- नवरात्रि की नवमी के दिन तिल का भोग लगाकर ब्राह्मण को दान दें। इससे मृत्यु भय से राहत मिलेगी। साथ ही अनहोनी होने की घटनाओं से बचाव भी होता है।

हमारे सनातन धर्म में किसी भी अनुष्ठान की पूर्णता हवन के माध्यम से ही की जाती है। देवी जी की आराधना में हवन का विशेष महत्व होता है। हवन के उपरांत कन्या-भोज कराया जाता है। श्रद्धालुगण ‘महानिशा-पूजा’ का हवन यथाशक्ति व सामर्थ्य अनुसार संपन्न कर सकते हैं। किन्तु जिन श्रद्धालुओं द्वारा नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती के संपूर्ण तेरह अध्यायों का पाठ किया गया हो उन्हें दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से हवन करना एवं प्रत्येक अध्याय की विशेष आहुति जिसे ‘महाआहुति’ कहा जाता है, अर्पण करना श्रेयस्कर रहता है।
जो श्रद्धालुगण सप्तशती के मंत्रों से हवन करने के स्थान पर मात्र देवी के नवार्ण मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’ का पाठ कर हवन एवं महाआहुतियां अर्पण करना चाहते हैं वे देवी के नवार्ण मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’ की माला के उपरांत प्रत्येक का अध्याय के निर्दिष्ट मंत्र का उच्चारण करके मां दुर्गा को ‘महाआहुति’ अर्पण कर सकते हैं।
आइए जानते हैं कि संपूर्ण तेरह अध्यायों की विशेष आहुतियां कौन-सी हैं-

1. पहला अध्याय-मंत्र- ॐ महाकाल्यै स्वाहामहा

आहुति- कमलगट्टा, काली मिर्च, शहद, महुआ, राई।
2. दूसरा अध्याय-मंत्र- ॐ महालक्ष्म्यै स्वाहामहा

आहुति- जायफल, जावित्री, कद्दू, पीली सरसों, राई।
3. तीसरा अध्याय-मंत्र- ॐ महालक्ष्म्यै स्वाहा

महाआहुति- उड़द का बड़ा।
4. चौथा अध्याय-मंत्र- ॐ महालक्ष्म्यै स्वाहा

महाआहुति- पंचमेवा व छुआरा (खारक)।
5. पांचवा अध्याय-मंत्र- ॐ महासरस्वत्यै स्वाहा

महाआहुति- शक्कर व गन्ना।
6. छ्ठा अध्याय-मंत्र- ॐ धूम्राक्ष्यै स्वाहा

महाआहुति- जासौन का फूल।

7. सातवां अध्याय-मंत्र- ॐ चामुण्डायै स्वाहा

महाआहुति- बिल्वफल, बिल्वपत्र, पालक।
8. आठवां अध्याय-मंत्र- ॐ रक्ताक्ष्यै स्वाहा

महाआहुति- रक्त चंदन।

9. नौवां अध्याय-मंत्र- ॐ भैरव्यै तारा देव्यै स्वाहा

महाआहुति- केला, नागरमोथा, अगर, तगर।
10. दसवां अध्याय-मंत्र- ॐ भगवत्यै स्वाहामहा

आहुति- बिजोरा नींबू।

11. ग्यारहवां अध्याय-मंत्र- ॐ नारायण्यै स्वाहामहा

आहुति- खीर-पूड़ी।
12. बारहवां अध्याय-मंत्र- ॐ राजराजेश्वर्यै स्वाहा

महाआहुति- दाड़िम (अनार)।

13. तेरहवां अध्याय-मंत्र- ॐ दुर्गा देव्यै स्वाहा

महाआहुति- श्रीफल


LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.