बिहार चुनाव २०२०: पहले चरण से अलग है दूसरे चरण का राजनीतिक और जातीय समीकरण

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बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग के बाद राजनीतिक दलों ने दूसरे दौर की सीटों पर चुनाव प्रचार तेज कर दिए हैं. दूसरे चरण के 17 जिलों की 94 विधानसभा सीटों पर 1463 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं, जहां 3 नवंबर को मतदान है. यह चरण बिहार की सत्ता की दशा और दिशा तय करने वाला है, जिसकी वजह से एनडीए और महागठबंधन दोनों अपनी-अपनी ताकत लगा रहे हैं. वहीं, किंगमेकर बनने के लिए एलजेपी से लेकर आरएलएसपी और बसपा तक कवायद में जुटी हैं.

कितने सीटों पर कौन लड़ रहा चुनाव
बिहार के दूसरे चरण में असल परीक्षा महागठबंधन की होनी है, जिनमें तेजस्वी यादव और उनके भाई तेजप्रताप यादव की किस्मत तय होनी है. महागठबंधन की ओर से आरजेडी 56 सीटों पर चुनाव लड़ रही है जबकि उसकी सहयोगी कांग्रेस 24 और वामपंथी दल 14 सीटों पर चुनावी मैदान में हैं. वहीं, नीतीश की अगुवाई वाले एनडीए की ओर से जेडीयू 43 सीटों पर चुनावी मैदान में उतरी है जबकि उसकी सहयोगी बीजेपी 46 सीटों पर किस्मत आजमा रही. इसके अलावा उसकी सहयोगी वीआईपी 5 सीटों पर मैदान में है.एनडीए से अलग होकर बिहार के सियासी रण में अकेले चुनाव लड़ने वाले चिराग पासवान की एलजेपी दूसरे चरण की 94 सीटों में से 52 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिनमें से 43 प्रत्याशी जेडीयू के खिलाफ हैं. इसके अलावा दो सीटों पर बीजेपी के खिलाफ भी एलजेपी प्रत्याशी मैदान में हैं. वहीं, बसपा ने 33 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं.

दूसरे चरण में 27 सीटों पर बीजेपी और आरजेडी आमने सामने हैं. ऐसे ही बीजेपी का कांग्रेस के साथ 12 सीटों पर और सीपीएम के साथ एक, सीपीआई के साथ दो और दो सीटों पर माले के साथ मुकाबला हो रहा है. वहीं, जेडीयू का 43 प्रत्याशियों में 25 पर आरजेडी से सीधा मुकाबला है. जेडीयू 12 सीटों पर कांग्रेस से दो-दो हाथ कर रही है. वहीं, माले के साथ 2, सीपीएम के साथ तीन और सीपीआई के साथ एक सीट पर लड़ाई है. 
 

किस पार्टी का कितना कब्जा

बिहार के दूसरे चरण की 94 सीटों के 2015 के विधानसभा चुनाव के नतीजों और वोट फीसदी के लिहाज से देखें तो मौजूदा एनडीए और महागठबंधन के बीच करीब 15 फीसदी वोटों का अंतर है. पिछले चुनाव में आरजेडी-जेडीयू-कांग्रेस ने मिलकर 70 सीटों पर जीत हासिल की थी. इनमें 33 सीटें आरजेडी, 30 सीटें जेडीयू और सात सीटें कांग्रेस ने जीती थीं. वहीं, बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने 22 सीटें जीती थीं, जिनमें 20 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी जबकि दो सीटें एलजेपी के खाते में गई थी. 

हालांकि, इस बार के चुनाव में समीकरण बदल गए हैं. जेडीयू और बीजेपी एक साथ मिलकर चुनाव मैदान में हैं तो एलजेपी अलग चुनाव लड़ रही है. वहीं, जेडीयू के बिना चुनावी मैदान में उतरी आरजेडी पुराने नतीजे दोहराने के लिए कांग्रेस के साथ वामपंथी दलों का सहारा है. एनडीए ने 2010 में इस इलाके में जबरदस्त जीत हासिल की थी और फिर उसी फॉर्मूले के सहारे अपने पुराने दुर्ग को पाने की जद्दोजहद कर रही है. 

15 फीसदी वोटों का अंतर
दूसरे दौर का मतदान जिन विधानसभा क्षेत्रों में होने जा रहा है, वहां अगर मौजूदा एनडीए के 2015 के वोट फीसद को देखें तो बीजेपी ने 25.86 फीसदी वोटों के साथ 20 सीटें जीती थीं जबकि जेडीयू ने 17.30 फीसदी के साथ 30 सीटें और हम को 2.07 फीसदी वोट मिले थे. इस तरह से एनडीए का कुल वोट 45.24 फीसदी और सीटें 50 होती हैं. वहीं, अगर मौजूदा महागठबंधन के वोट फीसदी को देखें तो आरजेडी को 20.34 फीसदी के साथ 33 सीटें, कांग्रेस 4.86 फीसदी के साथ 7 सीटें, सीपीआई को 1.65 फीसदी, सीपीएम 1.06 और सीपीआई माले को 2.07 फीसदी वोट व एक सीट मिली थी, जिन्हें मिलाकर 29.08 फीसदी वोट और 41 सीटें होती हैं. हालांकि, 6.68 फीसदी वोटों के साथ एलजेपी को 2 सीटें मिली थीं जबकि अन्य को 18.99 फीसदी वोट और एक सीट मिली थी. 

इस लिहाज से एनडीए और महागठबंधन के बीच करीब 15 फीसदी वोटों का अंतर है. इस चरण में पटना, मिथिलांचल, कोसी और सारण प्रमंडल की सीटों पर चुनाव होने हैं. ऐसे में अगर एनडीए अपने वोट फीसदी को बनाए रखने में सफल रहता है तो निश्चित तौर सीटों में बड़ा फेरबदल हो सकता है. इसका सीधा असर महागठबंधन की सीटों पर पड़ेगा. वहीं, तेजस्वी यादव अगर वोट के अंतर के गैप को खत्म करने में सफल रहते हैं तो निश्चित तौर पर अपनी सीटों को बचाए रखने में सफल रहेंगे.

इन नेताओं की साख दांव पर
नीतीश कुमार सरकार के तीन मंत्रियों की भी साख दांव पर होगी. इनमें मधुबन सीट से बीजेपी विधायक व सहकारिता मंत्री राणा राणा रंधीर, गौड़ा बोराम से जेडीयू व मंत्री विधायक मदन सहनी और पटना साहिब से बीजेपी विधायक व मंत्री नंद किशोर यादव हैं. इस तरह से बीजेपी कोटे के दो और जेडीयू कोटे से एक मंत्री की साख दांव पर होगी. 

तेजस्वी यादव राघोपुर सीट से चुनाव मैदान में हैं जबकि उनके बड़े भाई और पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव हसनपुर से लड़ रहे हैं. आरजेडी के प्रधान महासचिव आलोक कुमार मेहता उजियारपुर जबकि पूर्व सांसद व युवा राजद के अध्यक्ष शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल बिहपुर सीट से मैदान में हैं.

बाहुबलियों में रीतलाल यादव पटना की दानापुर सीट, पूर्व सांसद आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद शिवहर से चुनाव मैदान में हैं जबकि पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के बेटे रंधीर सिंह छपरा और भाई केदारनाथ सिंह बनियापुर से लड़ रहे हैं. वहीं, पूर्व सांसद रामा सिंह की पत्नी बीना सिंह वैशाली की महनार सीट से चुनावी भाग्य आजमा रही हैं. 

94 विधानसभा सीटों पर 3 नवंबर को वोटिंग
पश्चिम चंपारण की नौतन, चनपटिया, बेतिया सीट. पूर्वी चंपारण की हरसिद्धि, गोविंदगंज, केसरिया, कल्याणपुर, पिपरा, मधुबन सीट. सीतामढ़ी जिले की सीतामढ़ी, रून्नीसैदपुर, बेलसंड. मधुबनी जिले की मधुबनी, राजनगर, झंझारपुर, फुलपरास सीट. दरभंगा जिले की कुशेश्वरस्थान, गौड़ाबौराम, बेनीपुर, अलीनगर, दरभंगा ग्रामीण सीट शामिल हैं. इसके अलावा मुजफ्फरपुर जिले की मीनापुर, कांटी, बरुराज, पारू, साहेबगंज सीट जबकि शिवहर जिले की शिवहर सीट शामिल है. पटना जिले की बख्तियारपुर, दीघा, बांकीपुर, कुम्हरार, पटना साहिब, फतुहा, दानापुर, मनेर और फुलवारी सीट है. 

गोपालगंज जिले की बैकुंठपुर, बरौली, गोपालगंज, कुचायकोट, भोरे, हथुआ सीट. सिवान जिले की सिवान, जीरादेई, दरौली, रघुनाथपुर, दरौंदा, बड़हरिया, गौरेयाकोठी, महराजगंज और सारण जिले की एकमा, मांझी, बनियापुर, तरैया, मढ़ौरा, छपरा, गरखा, अमनौर, परसा, सोनपुर सीट शामिल है. ऐसे ही वैशाली जिले की हाजीपुर, लालगंज, वैशाली, महुआ, राजापाकर, राघोपुर, महनार. समस्तीपुर जिले की उजियारपुर, मोहिउद्दीननगर, विभूतिपुर, रोसड़ा, हसनपुर. बेगूसराय जिले की चेरिया बरियारपुर, बछवाड़ा, तेघड़ा, मटिहानी, साहेबपुर कमाल, बेगूसराय, बखरी. खगड़िया जिले की अलौली, खगड़िया, बेलदौर, परबत्ता. भागलपुर जिले की बिहपुर, गोपालपुर, पीरपैंती, भागलपुर, नाथनगदा. नालंदा जिले की अस्थावां, बिहारशरीफ, राजगीर, इस्लामपुर, हिलसा, नालंदा, हरनौत सीट शामिल हैं.

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