शरद पूर्णिमा 30 अक्टूबर को, ये 5 शुभ काम अवश्य करें और न करें ये 5 अशुभ काम

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आश्‍विन माह की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन आसमान में चंद्र नीले रंग का दिखाई देते है इसलिए इसे ब्लू मून भी कहते हैं। इस दिन खासतौर पर यह 5 कार्य जरूर करें।


1.चंद्रमा की चांदनी में रखें दूध या खीर : कहते हैं कि इस दिन चांद से अमृत बरसता है जो सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक है। अत: इस दिन आप छत पर या गैलरी में चांद की रोशनी में चांदी के बर्तन में दूध या खीर रखें। ताकि चंद्रकिरणों से बरसता अमृत उसमें समा जाए। फिर उस दूध या खीर का चंद्रदेव को नैवेद्य अर्पण करने के बाद प्रसाद ग्रहण करें।


2.शरद पूर्णिमा पर करें इनका पूजन : शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी, चंद्रदेव, भगवान शिव, कुबेर, हनुमान और भगवान श्री कृष्ण की आराधना की जाती है। शरद पूर्णिमा की रात में की गई चंद्र पूजन और आराधना से साल भर के लिए लक्ष्मी और कुबेर की कृपा प्राप्ति होती है।


3.हनुमानजी की पूजा : शरद पूर्णिमा की रात में हनुमानजी की पूजा का बहुत ही महत्व है। इसके लिए उनके सामने मिट्टी का चौमुखा दीपक जलाएं जिसमें घी मिला हो। इससे आपको हनुमानजी की विशेष कृपा प्राप्त होगी और सभी तरह के संकट मिट जाएंगे।


4.पूर्णिमा का व्रत करें : शरद पूर्णिमा पर दिनभर विधि विधान से व्रत रखा जाता है। इस व्रत में सिर्फ दूध ही पिया जाता है या खीर ही खाई जाती है। रात को चन्द्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और फिर इसके बाद भोजन किया जाता है। लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस व्रत को विशेष रूप से किया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन जागरण करने वाले की धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।


5.पौराणिक कथा श्रवण : इस दिन शरद पूर्णिका की व्रत कथा सुनने के बाद व्रत का विसर्जन किया जाता है। व्रत कथा सुनने से जहां व्रत का लाभ मिलता है वहीं संतान सुख की प्राप्ति भी होती है।

मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि शरद पूर्णिमा की रात मन ज्यादा बेचैन रहता है और नींद कम ही आती है। कमजोर दिमाग वाले लोगों के मन में आत्महत्या या हत्या करने के विचार बढ़ जाते हैं। अत: यदि इस दिन आप ये 5 वर्जित कार्य करेंगे तो नुकसान उठाएंगे। यह नियम शरद पूर्णिमा के साथ सभी पूर्णिमा पर लागू होते हैं।


1.भोजन : इस दिन किसी भी प्रकार की तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। जैसे मांस, मटन, चिकन या मसालेदार भोजन, लहसुन, प्याज आदि।
2.शराब : इस दिन किसी भी हालत में आप शराब ना पिएं क्योंकि इस दिन शराब का दिमाग पर बहुत गहरा असर होता है। इससे शरीर पर ही नहीं, आपके भविष्य पर भी दुष्परिणाम हो सकते हैं।
3.क्रोध : इस दिन क्रोध नहीं करना चाहिए। वैज्ञानिकों के अनुसार इस दिन चन्द्रमा का प्रभाव काफी तेज होता है इन कारणों से शरीर के अंदर रक्‍त में न्यूरॉन सेल्स क्रियाशील हो जाते हैं और ऐसी स्थिति में इंसान ज्यादा उत्तेजित या भावुक रहता है। एक बार नहीं, प्रत्येक पूर्णिमा को ऐसा होता रहता है तो व्यक्ति का भविष्य भी उसी अनुसार बनता और बिगड़ता रहता है।
4.भावना : जिन्हें मंदाग्नि रोग होता है या जिनके पेट में चय-उपचय की क्रिया शिथिल होती है, तब अक्सर सुनने में आता है कि ऐसे व्यक्‍ति भोजन करने के बाद नशा जैसा महसूस करते हैं और नशे में न्यूरॉन सेल्स शिथिल हो जाते हैं जिससे दिमाग का नियंत्रण शरीर पर कम, भावनाओं पर ज्यादा केंद्रित हो जाता है। अत: भावनाओं में बहें नहीं खुद पर नियंत्रण रखकर व्रत करें।
5.स्वच्छ जल : चांद का धरती के जल से संबंध है। जब पूर्णिमा आती है तो समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पन्न होता है, क्योंकि चंद्रमा समुद्र के जल को ऊपर की ओर खींचता है। मानव के शरीर में भी लगभग 85 प्रतिशत जल रहता है। पूर्णिमा के दिन इस जल की गति और गुण बदल जाते हैं। अत: इस दिन जल की मात्रा और उसकी स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें।
6.अन्य सावधानियां : इस दिन पूर्ण रूप से जल और फल ग्रहण करके उपवास रखें। यदि इस दिन उपवास नहीं रख रहे हैं तो इस दिन सात्विक आहार ही ग्रहण करें तो ज्यादा बेहतर होगा। इस दिन काले रंग का प्रयोग न करें।

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