सुशील मोदी हमारे संरक्षक, उन्हें डिप्टी सीएम से भी बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी: तारकिशोर प्रसाद

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बिहार के नए डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद ने पद संभालने के साथ ही राजनीतिक पंडितों को अचंभित कर दिया है। तारकिशोर की जन्मस्थली कोशी और कर्मस्थली सीमांचल है। भाजपा से चार बार विधायक चुने गए तारकिशोर का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है। इसके बाद भी उन्होंने कभी चुनावी हार का मुंह नहीं देखा है। वह अक्तूबर 2005 से लगातार कटिहार सीट से विधायक हैं। पिछले चुनाव (2015) में जदयू-राजद गठबंधन के बाद भी कटिहार सीट पर तारकिशोर को ही सफलता मिली थी।  

शायद यही कारण है कि भाजपा ने लगभग एक दशक बाद सुशील मोदी की जगह तारकिशोर प्रसाद को डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी सौंपी है। सुशील मोदी के सभी विभाग भी तारकिशोर प्रसाद को मिले हैं। सुशील मोदी के बारे में पूछने पर तारकिशोर का कहना है कि वह हमारे संरक्षक हैं। उनसे हमने बहुत कुछ सीखा है। उन्हें डिप्टी सीएम से भी बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी।

बिहार की राजनीति से अचानक सुशील मोदी के हटने के सवाल पर प्रसाद ने कहा कि मैं इस पर कुछ नहीं कह सकता। बस यही कहूंगा कि यह पार्टी का निर्णय था और हम सभी कार्यकर्ता पार्टी और राष्ट्र के हित में शीर्ष नेताओं द्वारा दी गई जिम्मेदारियों को पूरा कर रहे हैं।

1956 में सहरसा के सलखुवा में जन्मे प्रसाद का परिवार मिरचाईबाड़ी में पारंपरिक व्यवसाय करता है। लेकिन प्रसाद ने पारिवारिक व्यवसाय में जाने के बजाय आरएसएस में शामिल हो गए। इस दौरान कई जिलास्तरीय पदों पर रहे। उन्होंने 1980 में एबीवीपी ज्वाइन कर ली और छात्रों से जुड़े कई मुद्दों को उठाया।

उनका राजनीति के प्रति समर्पण ही था जो भाजपा ने 2005 में टिकट दिया। उन्होंने भाजपा और उसके नेताओं को निराश भी नहीं किया। चुनाव जीतकर विधायक बने। तारकिशोर का जन्म भले कोसी में हुआ लेकिन सीमांचल के कटिहार की राजनीति में सक्रिय रहे। इस बारे में उनका कहना है कि मैं दोनों क्षेत्रों को अपना मानता हूं। अब तो पूरे बिहार के बारे में सोच रहा हूं। उन्होंने कहा कि मेरे पद पर आने के बाद दोनों क्षेत्रों के लोगों की उम्मीद बढ़ी है। मैं लोगों को कभी निराश नहीं करूंगा।

राजनीति में आने के बारे में उनका कहना है कि मैं लंबे समय तक संघ का स्वयंसेवक रहा। इसके साथ ही एबीवीपी में भी कई पदों पर रहा। सबसे पहले 1982 में बीजेपी ने कटिहार का नगर अध्यक्ष बनाया। मुझे खुशी है कि कभी मैंने पार्टी और बड़े नेताओं को निराश नहीं किया। 

सबसे पहले 2005 में विधानसभा का चुनाव मात्र 116 वोटों से जीता। अगली बार 2010 में 20 हजार से ज्यादा वोटों से जीत मिली। 2015 में राजद और जदयू के गठबंधन के बाद भी बीजेपी से मुझे जीत मिली। 

तारकिशोर से जब पूछा गया कि आप आरएसएस से आए हैं। क्या आपको नहीं लगता कि आरएसएस की पृष्ठभूमि नीतीश कुमार के साथ आपके संबंधों को प्रभावित करेगी? इस पर उन्होंने कहा कि नहीं, आरएसएस एक ऐसा संगठन है जो हमेशा राष्ट्र के बारे में सोचता है। अपने लोगों की भलाई के बारे में, राष्ट्र की ताकत के बारे में सोचता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कारण नीतीश कुमार के साथ किसी भी तरह के मतभेद का कोई सवाल ही नहीं उठता है। बीजेपी में ज्यादातर नेता आरएसएस की पृष्ठभूमि से आते हैं।

क्या आपने कभी इतने प्रतिष्ठित पद के बारे में सोचा? इस सवाल पर कहा कि नहीं, मैं पद के बारे में नहीं सोच रहा था। मैंने हमेशा पार्टी के लिए काम किया है। यह उन सभी शीर्ष नेताओं के लिए है, जिन्होंने मुझ पर विश्वास रखा। 

प्राथमिकताओं पर उन्होंने कहा कि मेरी प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं। मुझे नरेंद्र मोदी जी के आत्मानिर्भर बिहार को आगे ले जाना है। बिहार में नीतीश कुमार जी के सात संकल्प भाग-2 को भी आगे ले जाना है। मैं आत्मनिर्भर बिहार चाहता हूं, जो पीएम और सीएम दोनों की धारणा को आगे बढ़ा सके।

बिहार की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए आपका कदम क्या होगा? क्या आपको नहीं लगता कि बिहार में बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती है? इस पर उन्होंने कहा कि मैंने अभी अपना काम शुरू किया है और हम रोडमैप तैयार कर रहे हैं। सब कुछ सही दिशा में और सही रास्ते पर होगा।

बेरोजगारी की तरह कई अन्य मुद्दे हैं। हमारी सरकार ने बेरोजगारी के मुद्दे को गंभीरता से लिया है और हम सभी ने इस पर काम करना शुरू कर दिया है। हम यहां उन सभी चीजों को बढ़ावा देने के लिए हैं जो हमारे राज्य को समग्र विकास में मदद कर सकते हैं।

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