पटना: छठ घाट पर कोरोना मरीज़, खोजती रही मेडिकल टीम लेकिन परिजनों के साथ हो गया फ़रार

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दीघा के पाटीपुल घाट से कोरोना का एक संदिग्ध मरीज फरार हो गया। घाट पर कोरोना की आशंका से हड़कंप मच गया, लेकिन जब तक एम्बुलेंस आती वह परिजनों के साथ फरार हो गया। काफी देर तक मेडिकल टीम ने उसकी तलाश की, लेकिन न तो परिजन मिले और न ही संदिग्ध मरीज मिला।

बुजुर्ग में था कोरोना जैसा लक्षण
पाटीपुल घाट पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों के मुताबिक शुक्रवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी थी। महिलाएं और पुरुषों के साथ बच्चे भी अधिक संख्या में घाट पर मौजूद थे। शुक्रवार की शाम लगभग 7 बजे अचानक से सूचना मिली कि एक कोरोना का संदिग्ध मरीज है। एनडीआरएफ कैंप के पास संदिग्ध मरीज बैठा हुआ था। बताया जा रहा है कि वह काफी परेशान था और उसके साथ उसके परिजन भी परेशान दिख रहे थे। परेशान देख हर कोई उसके बारे में जानना चाह रहा था। इस बीच उसके अंदर कोरोना जैसे लक्षण दिख रहे थे। खांसी के साथ सांस फूलने की दिक्कत देखने से लग रही थी। घाट पर उसे घबड़ाहट हुई तो वह कैंप के पास ही जाकर बैठ गया।

आनन-फानन में दी गई हेल्थ कैंप को सूचना 
कोरोना के संदिग्ध मरीज की सूचना पाटीपुल घाट पर बनाए गए हेल्थ कैंप के मेडिकल स्टॉफ को दी गई। वहां लगाई गई एम्बुलेंस तत्काल निकली, लेकिन भीड़ में पलक झपकते ही परिजन वृद्ध को लेकर भाग गए। मेडिकल कैंप की एम्बुलेंस काफी देर तक इधर-उधर दौड़ी और मरीज की तलाश की। लेकिन वह नहीं मिला। भीड़ में वह कहां गया, कुछ पता ही नहीं चल सका। कैंप के कर्मियों का कहना है कि माइकिंग से एनाउंस भी किया गया। लेकिन संदिग्ध मरीज का कहीं कोई पता नहीं चला।

इनका क्या है कहना 

हेल्थ कैंप पर लगाए गए एम्बुलेंस के चिकित्साकर्मी विनोद शर्मा ने बताया कि शुक्रवार की शाम 7 बजे कोरोना का संदिग्ध मरीज के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद एम्बुलेंस लेकर पहुंच गए। लेकिन, इतनी देर में कोरोना संदिग्ध मरीज निकल चुका था। उसका कुछ पता ही नहीं चल सका। उन्होंने बताया कि एनाउंसमेंट के बाद परिजन डर गए होंगे, उन्हें लगा होगा कि कोरोना के कारण भर्ती कर लिया जाएगा। काफी तलाश के बाद भी उसका पता नहीं चला। स्वास्थ्य कर्मी के अनुसार उसकी उम्र 65 वर्ष के आसपास बताई गई थी, प्रशासन की मनाही के बाद बीमार और वृद्ध को परिजन क्यों लाए, यह भी बड़ा सवाल है।

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