सरकार ने कल 3 बजे विज्ञान भवन में किसान नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया

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नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्‍ली सिंघू सीमा पर (दिल्ली-हरियाणा सीमा) पर किसानों का प्रदर्शन जारी है। किसान संगठनों ने केंद्र सरकार के बुराड़ी मैदान में जाने के बाद बातचीत शुरू करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। वहीं सरकार ने अब किसानों को 1 दिसंबर को दोपहर 3 बजे विज्ञान भवन में बातचीत के लिए बुलाया है। पहले 3 दिसंबर को बातचीत होनी थी, लेकिन अब किसानों को 1 दिसंबर को बुलाया है।

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, ‘जब कृषि कानून लाए गए, तो उन्होंने किसानों के बीच कुछ गलतफहमी पैदा की। हमने किसान नेताओं के साथ 14 अक्टूबर 14 और 13 नवंबर को 2 बार वार्ता की। उस समय भी हमने उनसे आग्रह किया था कि वे आंदोलन के लिए न जाएं और सरकार वार्ता के लिए तैयार है। यह निर्णय लिया गया कि अगले दौर की वार्ता 3 दिसंबर को आयोजित की जाएगी, लेकिन किसान आंदोलन कर रहे हैं, यह सर्दियों का समय है और कोविड भी है। इसलिए बैठक पहले होनी चाहिए। इसलिए पहले दौर की बातचीत में मौजूद किसान नेताओं को विज्ञान भवन में 1 दिसंबर को दोपहर 3 बजे आमंत्रित किया गया है।’

टैक्सी यूनियन भी किसानों के साथ

टैक्सी यूनियनों ने केंद्र को दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर किसानों की मांगों को नहीं माना गया तो प्राइवेट कैब, टैक्सी, ऑटो और ट्रक दिल्ली-एनसीआर में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

सांगवान खाप प्रधान और दादरी विधायक सोमबीर सांगवान ने कहा, ‘मैंने किसान आंदोलन के समर्थन में हरियाणा पशुधन बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में इस्तीफा दे दिया है। कल सुबह 10 बजे, सांगवान खाप के सभी सदस्य दिल्ली के लिए आगे बढ़ेंगे और हम किसानों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करेंगे।’

दिल्ली-गाजियाबाद सीमा पर कंक्रीट के अवरोधक लगाए गए

केन्द्र के तीन नए कृषि कानून के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन पांचवें दिन सोमवार को भी जारी है और इस दौरान गाजीपुर बॉर्डर के पास प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ने से पुलिस ने उत्तर प्रदेश से की प्रवेश सीमा पर सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करते हुए कंक्रीट के अवरोधक लगाए हैं। किसानों द्वारा आज राष्ट्रीय राजधानी को जोड़ने वाले और राजमार्गों को जाम करने की दी गई चेतावनी के बाद बाद सुरक्षा बढ़ाई गई है।

किसानों की है ये मांग

मोदी सरकार द्वारा लागू तीन नये कृषि कानूनों में कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) कानून 2020, कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन व कृषि सेवा पर करार कानून 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम 2020 शामिल हैं। प्रदर्शनकारी किसान नेताओं का कहना है कि इन तीनों कानूनों से किसानों को कोई फायदा नहीं है, बल्कि इनका फायदा कॉरपोरेट को होगा, इसलिए वे इन्हें वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

नए कानूनों के विरोध में हैं प्रदर्शन

 केन्द्र सरकार सितंबर महीने में 3 नए कृषि विधेयक लाई थी, जिन पर राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद वे कानून बन चुके हैं। जिसके खिलाफ किसानों का ये आंदोलन छिड़ा हुआ है। देश के करीब 500 अलग-अलग संगठनों ने मिलकर संयुक्त किसान मोर्चे का गठन किया। वहीं इन सभी संगठनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर डेरा जमाए हुए हैं। किसानों की मांग है कि इन तीनो कानूनों को केंद्र सरकार वापस ले।

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