गणाधिप संकष्टी चतुर्थी पर श्री गणेश का करें पूजन, जानें चांद न‍िकलने का समय

0
81

 गणाधिप संकष्टी चतुर्थी गणेश चतुर्थी व्रत गुरुवार 3 दिसंबर को है। यह व्रत हर तरह की सफलता प्रदान करने वाला माना गया है। चतुर्थी तिथि का शास्त्रों में महत्व बहुत अधिक माना गया है।संकष्टी चतुर्थी के दिन यदि मनुष्य पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से गणपति जी की पूजा करता है तो उसकी सभी मनचाही इच्छाएं पूरी होती है और माना जाता है कि उसके कोई कार्य नहीं रुकते। हर कार्य में उसे सफलता की प्राप्ति होती है। गणपति जी की पूजा सुख-समृद्धि के साथ ज्ञान और धन प्रदान करने वाली होती । इसलिए इस व्रत को करने से मनुष्य को समस्त सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है। ऐसे व्यक्ति के जीवन में किसी भी चीज का अभाव नहीं रहता। तो आइए आपको बताएं कि गणाधिप संकष्टी चतुर्थी पर गणपति जी की करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

गणाध‍िप संकष्‍टी चतुर्थी पर आज चांद न‍िकलने का समय

चतुर्थी त‍िथ‍ि आज शाम 7:36 से शुरू होगी और 4 द‍िसंबर को रात 8:03 तक रहेगी। वहीं आज यानी 3 द‍िसंबर को संकष्‍टी पूजन चांद न‍िकलने के साथ होगी। आज रात चांद 8:10 बजे न‍िकलेगा।

गणपति जी की पूजा में रखें इन बातों का ध्यान (Ganadhip Sankashti Chaturthi Puja Vidhi)

  1. भगवान गणपति की संकष्टी के दिन तीनों प्ररह पूजा करनी चाहिए। सुबह, दोपहर और शाम की पूजा इस दिन जरूरी होती है। साथ ही में रात के समय चंद्र पूजन भी करें।
  2. भगवान गणपति को आसन देकर विराजित करें और वस्त्र और पुष्प के साथ उनका श्रृंगार करें। उसके बाद उनके सिर पर दूर्वा दल रखें।
  3. जनेऊ न पहनने वाले केवल पुराण मंत्रों से गणपति जी की पूजा कर सकते हैं, जबकि जनेऊ पहनने वाले वेद और पुराण दोनों मंत्रों से पूजा कर सकते हैं।
  4. गणपति जी को तुलसी दल छोड़कर सभी तरह के फूल और वनस्पति अर्पित किए जा सकते हैं।सिंदूर, घी का दीप और मोदक भी पूजा में अर्पित जरूर करें।
  5. इसके बाद आरती करें और संकष्टी व्रत कथा का वाचन करें।
  6. अंत में प्रसाद वितरित कर गाय को हरा चारा और गरीबों को हरी मूंग की दाल दान में दें। इसके बाद गणेश स्तुति का पाठ करें।

श्री गणेश स्तुति

गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि।

गुणशरीराय गुणमण्डिताय गुणेशानाय धीमहि।

गुणातीताय गुणाधीशाय गुणप्रविष्टाय धीमहि।

एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि।

गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि॥

गानचतुराय गानप्राणाय गानान्तरात्मने।

गानोत्सुकाय गानमत्ताय गानोत्सुकमनसे।

गुरुपूजिताय गुरुदेवताय गुरुकुलस्थायिने।

गुरुविक्रमाय गुह्यप्रवराय गुरवे गुणगुरवे।

गुरुदैत्यगलच्छेत्रे गुरुधर्मसदाराध्याय॥

गणपति जी की पूजा से मनुष्य को हर क्षेत्र में सफलता मिलती है और सुख-समृद्धि, यश-कीर्ति, वैभव, सफलता और पराक्रम की प्राप्ति होती है।

आइए जानें संकष्टी गणेश चतुर्थी के दिन अपनी राशिनुसार कैसे करें भगवान श्रीगणेश की आराधना। यहां पढ़ें 12 राशियों के लिए संकष्टी गणेश चतुर्थी पर पूजन एवं विशेष उपाय :-

मेष राशि : मेष राशि वालों को ‘वक्रतुण्ड’ रूप में गणेश जी की आराधना करनी चाहिए और ‘गं’ या ‘ॐ वक्रतुण्डाय हूं’ मंत्र की एक माला प्रतिदिन जप कर गुड़ का भोग लगाना चाहिए। इससे तुरंत ही जीवन में जो भी समस्या होगी उसका समाधान हो जाएगा।

विशेष उपाय : मेष राशि के ईष्ट देव गणेश और हनुमानजी हैं। मंगलवार को हनुमानजी का प्रसाद चढ़ाएं और पूरा प्रसाद मंदिर में ही बांट दें।
वृषभ राशि : वृषभ राशि वालों को गणेशजी के ‘शक्ति विनायक’ रूप की आराधना करना चाहिए और उन्हें भी ‘गं’ या ‘ॐ हीं ग्रीं हीं’ मंत्र की एक माला प्रतिदिन जपकर घी में मिश्री मिलाकर भोग लगाएं। निश्चित ही उन्हें सभी तरह की समस्याओं का समाधान मिलेगा।
विशेष उपाय : हनुमान या गणेश मंदिर में मंगलवार को शुद्ध घी का दोमुखी दिया लगाएं। आमदनी में दिक्कत हो तो केसर का टीका माथे पर लगाएं।
मिथुन राशि : मिथुन राशि वाले गणेशजी की आराधना ‘लक्ष्मी गणेश’ के रूप में करें। गणेशजी के लिए मूंग के लड्डू बनाएं और ‘श्रीगणेशाय नम: या ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र की प्रतिदिन एक माला जपें।
विशेष उपाय : गणेशजी को बुधवार के दिन मंदिर में लड्डू का भोग लगाए। गरीब व्यक्ति को काला कंबल दान दें, काम सुचारू चलेगा।
कर्क राशि : कर्क राशि वालों को ‘वक्रतुण्ड’ रूप में गणेशजी की पूजा करना चाहिए और उन्हें ‘ॐ वरदाय न:’ या ‘ॐ वक्रतुण्डाय हूं’ की एक माला प्रतिदिन जपना चाहिए। पूजन के दौरान गणेशजी को सफेद चंदन लगाकर सफेद फूल चढ़ाएं।

विशेष उपाय : प्रतिदिन रोज चंदन का टीका लगाएं और बुजुर्गों का सम्मान करें।
सिंह राशि : सिंह राशि वालों को ‘लक्ष्मी गणेश’ रूप में गणेशजी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए और उन्हें लाल पुष्प चढ़ाकर मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाएं। ‘ॐ सुमंगलाये नम:’ मंत्र की एक माला का जाप करना चाहिए जिससे सभी तरह की समस्याओं का समाधान होगा।
विशेष उपाय : लाल रंग का रूमाल अपने पास रखें जिससे भाग्योदय होगा और मंदिर में जाकर गणेशजी को किशमिश चढ़ाएं।
कन्या राशि : कन्या राशि के जातकों को भी गणेशजी के ‘लक्ष्मी गणेश’ रूप का ध्यान करना चाहिए। पूजन के दौरान दूूर्वा के 21 जोड़े अर्पित कर ‘ॐ चिंतामण्ये नम:’ मंत्र की एक माला प्रतिदिन जपना चाहिए। इससे उनके जीवन की सभी तरह की चिंताएं मिट जाएंगी।
विशेष उपाय : गणेशजी की प्रतिदिन पूजा करें। स्थायी सफलता के लिए तुलसी की माला पहनें और घर में कभी कुत्ता न पालें।
तुला राशि : तुला राशि वाले लोगों को ‘वक्रतुण्ड’ रूप में गणेशजी की पूजा करना चाहिए और पूजा के दौरान गणेशजी को 5 नारियल का भोग लगाएं। तत्पश्चात्य एक माला ‘ॐ वक्रतुण्डाय नम:’ मंत्र का जप करें। इससे उनकी जो भी समस्याएं होंगी वह भगवान गणेश जल्द ही दूर करेंगे।
विशेष उपाय : छोटे भाई-बहनों की मदद करें और गणेशजी के मंदिर में शुद्ध घी का दीया दिन में 11 बजे के पूर्व जिस किसी दिन मन करें लगाकर आएं।

वृश्चिक राशि : वृश्चिक राशि मंगल की राशि है अत: इस राशि वाले जातकों को ‘श्वेतार्क गणेश’ रूप की पूजा करनी चाहिए तथा पूजा में सिंदूर और लाल फूल अर्पित करना चाहिए। उस जातक के जीवन में किसी भी प्रकार का संकट नहीं रहेगा जो ‘ॐ नमो भगवते गजाननाय’ मंत्र की एक माला रोज जपेगा।
विशेष उपाय : केले के पेड़ की पूजा करें और जल चढ़ाएं। कभी भी नशा न करें।
धनु राशि : जिसकी भी राशि धनु है उन्हें प्रतिदिन ‘ॐ गं गणपते मंत्र’ का जप करना चाहिए। धनु राशि गुरु की राशि होती है अत: गणेशजी को पीले फूल चढ़ाकर बेसन के लड्डुओं का भोग लगाएं। ऐसा करने से जहां समस्याएं समाप्त होंगी वहीं मनोकामनाएं भी पूर्ण होगी। धनु राशि वालों को गणेशजी के ‘लक्ष्मी गणेश’ रूप की पूजा करनी चाहिए।
विशेष उपाय : शांति और समृद्धि के लिए घर में कचरा या गंदगी ना रहने दें। पीले वस्त्र के आसन पर गणेशजी को ईशान कोन में विराजमान कर उनके समक्ष गुरुवार को घी का शुद्ध दीपक लगाएं।

मकर राशि : जिस किसी की राशि मकर है वह प्रतिदिन ‘शक्ति विनायक’ गणेश की आराधना करें। पूजन के दौरान गणेशजी को पान, सुपारी, इलायची व लौंग अर्पित करें और ‘ॐ गं नम:’ मंत्र की एक माला रोज जपें।
विशेष उपाय : गुरुवार को गणेश, लक्ष्मी या विष्णु मंदिर में पीले फूल चढ़ाएं। लाल सांड को मीठी रोटी खिलाएं।
कुंभ राशि : कुंभ राशि वालों को भी ‘शक्ति विनायक’ गणेशजी की पूजा करना चहिए और ‘ॐ गण मुक्तये फट्‍’
मंत्र की एक माला रोज जपना चाहिए। इससे सभी तरह के कष्टों का निवारण होगा।
विशेष उपाय : ध्यान रखें कि आपके यहां से कोई भूखा न जाएं और भोजन में कभी भी ऊपर से नमक न डालें। मंगल, गुरु या रविवार का व्रत रखें।

मीन राशि : मीन राशि वाले जातक ‘हरिद्रा गणेश’ की पूजा करना चाहिए। ‘ॐ गं गणपतये नमः‘ या ‘ॐ अंतरिक्षाय स्वाहा‘ मंत्र की एक माला प्रतिदिन जपना चाहिए। पूजा के दौरान शहद और केसर का भोग लगाएं।
विशेष उपाय : गणेश मंदिर में प्याऊ के लिए पैसा दान करें। पीपल के पेड़ की जड़ में पानी डालें और कभी भी झूठ न बोलें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.