पटना: प्लाज़्मा थेरेपी लेने से पहले सावधान नहीं तो जा सकती है जान, बिना अनुमति भी चल रहा प्लाज़्मा थेरेपी का खेल

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कोविड प्लाज्मा थेरेपी में जान का खतरा देखते हुए शुरू में AIIMS तक को इसके लिए हरी झंडी नहीं मिल रही थी। काफी प्रक्रिया और लगातार ट्रायल में सफलता के बाद भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने बिहार के 6 अस्पतालों को की अनुमति दी है, लेकिन अब कोविड का इलाज करने वाले अस्पताल भी गाइडलाइन तोड़ मरीज की जान से खेल रहे हैं। भास्कर सामने ला रहा है, वह 7वां अस्पताल जहां न केवल प्लाज्मा चढ़ाया जा रहा है, बल्कि 39 साल की महिला मरीज की इस प्रक्रिया में मौत भी हो चुकी है। इस मौत के बावजूद अस्पताल अब भी प्लाज्मा थेरेपी का खुला ऑफर दे रहा है। प्लाज्मा थेरेपी का यह बड़ा खेल सिविल सर्जन कार्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर गर्दनीबाग के नेस्टिवा जय आरोग्यम हॉस्पिटल में हो रहा है।

सबसे पहली और बड़ी बात: प्लाज्मा थेरेपी पर इतना ट्रायल यूं ही नहीं हुआ था 

प्लाज्मा थेरेपी को मेडिकल साइंस की भाषा में प्लाज्मा फेरेसिस कहते हैं। नालंदा मेडिकल कॉलेज के माइक्रो बॉयलोजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार का कहना है कि प्लाज्मा थेरेपी में प्लाज्मा ऐसे व्यक्ति से लिया जाता है जिसके अंदर कोविड की एंटीबॉडी तैयार हो गई हो। इस थेरेपी में एक्सपर्ट की मानीटरिंग जरूरी है क्योंकि यह फॉरेन बॉडी है उस पेशेंट के लिए। इसमें रिएक्शन का खतरा होता है। इस थेरेपी से मरीज का वाल्यूम बढ़ा रहे हैं तो इसके लिए एक्सपर्ट की ओपीनियन और मॉनिटरिंग बहुत जरूरी है। डॉक्टर बताते हैं कि रिएक्शन के कारण नस में खराबी, बेहोशी, ब्लड क्लॉटिंग, धुंधला दिखाई देने का खतरा सामने आ सकता है। खतरे को देखते हुए ही प्लाज्मा थेरेपी शुरू करने के पहले पूरे देश में कई बार ट्रायल किया गया। बिहार में भी ट्रायल की प्रक्रिया लंबी चली थी।

कोविड के इलाज की मान्यता, इसलिए परिजनों को नहीं हुआ शक

सीवान के दरौंदा थाना क्षेत्र के हड़सर गांव निवासी प्रमोद मिश्रा की 39 वर्षीया पत्नी संगीता मिश्रा को 24 नवंबर को पटना के नेस्टिवा जय आरोग्यम हॉस्पिटल भर्ती कराया गया था। प्रमोद मिश्रा भी कोविड पॉजिटिव हैं और पटना एम्स में भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि नेस्टिवा जय आरोग्यम हॉस्पिटल ने प्लाज्मा की डिमांड की तो कुछ असामान्य नहीं लगा, क्योंकि इस अस्पताल को कोविड के इलाज के लिए बहुत पहले मान्यता दी गई थी। 29 और 30 नवंबर को पटना एम्स से एक-एक यूनिट प्लाज्मा लाकर चढ़ाया गया, लेकिन हालत बिगड़ती गई। मंगलवार को संगीता की मौत हो गई।

पटना के 5 और भागलपुर में 1 अस्पताल को ही अनुमति 

पड़ताल में खुलासा हुआ कि नेस्टिवा जय आरोग्यम हॉस्पिटल को प्लाज्मा थेरेपी के लिए अनुमति ही नहीं मिली है। बिहार के औषधि नियंत्रक रविंद्र ने भी इसकी पुष्टि की। बताया गया कि एम्स पटना, महावीर हॉस्पिटल, जय प्रभा हॉस्पिटल, पारस हॉस्पिटल, निरामय हॉस्पिटल के अलावा भागलपुर मेडिकल कॉलेज ही प्लाज्मा थेरेपी के लिए रजिस्टर्ड हैं। औषधि नियंत्रण विभाग के अधिकारियों का कहना है अगर बिना अनुमति के कोई अस्पताल ऐसा करता है तो उसपर कार्रवाई की जाएगी। 

एम्स के ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग ने भी नहीं दिया ध्यान

नेस्टिवा जय आरोग्यम हॉस्पिटल ने 29 नवंबर को कोविड प्लाज्मा के लिए पटना एम्स के ब्लड बैंक के ट्रांसफ्यूजन विभाग को ब्लड रिक्वेस्ट लेटर दिया था। इसमें 39 साल की संक्रमित महिला के बारे में पूरी जानकारी दी गई थी। लिखा था कि मरीज कोरोना से गंभीर रूप से पीड़ित होने के कारण वेंटिलेटर सपोर्ट पर है। अस्पताल में प्लाज्मा थेरेपी की सुविधा नहीं होने के बावजूद उसकी डिमांड पर प्लाज्मा क्यों दिया गया, यह भी बड़ा सवाल है।

कहां-कहां थेरेपी होगी, यह सूची लेना भी नहीं है आसान

जब आम आदमी के रूप में थेरेपी के लिए अधिकृत अस्पतालों की सूची जाननी चाही तो सिविल सर्जन से लेकर स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव तक से बात करने को कहा जाता रहा। मतलब, अस्पतालों के बारे में पता करना आसान नहीं है। खास बात यह रही कि कहीं 3 तो कहीं 2 ही अस्पतालों को अनुमति की बात बताई गई। अंत में 6 अस्पतालों की सूची सामने आई, जिसे भास्कर मरीजों की सुविधा के लिए सामने ला रहा है।

अब भी खुलकर बोल रहे- मरीज लाइए, चढ़ जाएगा प्लाज्मा

नेस्टिवा जय आरोग्यम हॉस्पिटल के रिसेप्शन पर अब भी बेझिझक बताया जा रहा है कि मरीज लाइए, प्लाज्मा चढ़ जाएगा। यहां प्लाज्मा नहीं मिलता है, लेकिन बाहर से लाने पर चढ़ाया जाता है। पूर्व में किसी को चढ़ाया गया है कि नहीं, इस सवाल पर कर्मियों ने कहा कि “चढ़ाया जाता है, अभी दो दिन पहले ही चढ़ाया गया है।”

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