पटना: राज्यपाल कोटे से विधान परिषद की 12 सीटों को लेकर एनडीए में मंथन, मंत्रिमंडल विस्तार से पहले होगा फैसला

0
85

राज्यपाल कोटे से मनोनयन वाली रेवड़ी अब किस-किस में बंटेगी, इसके खुलासे का वक्त नजदीक आ गया है। बिहार विधान परिषद में राज्यपाल कोटे से 12 सदस्यों का मनोनयन किया जाता है। इस मनोनयन पर सत्तारूढ़ दल का एकाधिकार रहता है। काफी लंबे अरसे से 12 सीटें खाली हैं।

लिस्ट जल्द राजभवन जाएगी
विधानसभा चुनाव से पहले यह चर्चा हुई थी कि इन 12 सीटों पर मनोनयन कर दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विधानसभा का चुनाव हुआ एनडीए की जीत हुई। उसके बाद मुख्यमंत्री समेत 14 सदस्यीय मंत्रिमंडल ने शपथ ली। अब मंत्रिमंडल विस्तार से पहले राज्यपाल कोटे से मनोनयन की चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि जल्द ही एनडीए के सभी घटक दल आपस में चर्चा करके राज्यपाल कोटे से मनोनयन के सदस्यों की लिस्ट राजभवन भेज देंगे।

चुनाव के बाद बड़ा भाई भाजपा
इन 12 सीटों के लिए चुनाव से पहले समीकरण अलग बैठता था। लेकिन अब चुनाव हो चुका है तो सीटों का बंटवारा 5-5-1-1 के फार्मूले पर किया जाना है। यानी पांच भाजपा, पांच जदयू , एक वीआईपी और एक जीतन राम मांझी की हम के हिस्से में जाएगी। हालांकि चुनाव से पहले जदयू का 7 सीटों पर हक बनता था। लेकिन चुनाव के बाद स्थितियां बदल गईं, भाजपा बड़े भाई की भूमिका में आ गई और कुछ घटक दल एनडीए में शामिल हो गए, तो हिस्सेदारी का फार्मूला अलग बैठा है।

जदयू से ये नाम जाएंगे
जदयू की तरफ से एक बार फिर से मंत्री बने अशोक चौधरी का एमएलसी बनना तय है। वहीं, पार्टी के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह और रघुवंश प्रसाद के पुत्र सत्य प्रकाश में से किसी एक को इस कोटे से एमएलसी बनाया जा सकता है। लल्लन श्रॉफ को नीतीश कुमार की मित्रता का इनाम एक बार फिर से मिल सकता है। पार्टी के महासचिव रविंद्र सिंह या फिर संजय कुमार उर्फ गांधी जी को नीतीश कुमार मनोनीत नामों में डाल सकते हैं। वहीं, पांचवीं सीट पर राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी को भेजा जा सकता है, हालांकि अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि सिद्दीकी राजद छोड़कर जदयू में आएंगे या नहीं। यदि वह नहीं आते हैं तो प्रवक्ता अजय आलोक या फिर रणवीर नंदन का नाम भेजा जा सकता है।

भाजपा से इनकी चर्चा
उधर, भाजपा की 5 सीटों पर अलग-अलग नेताओं की चर्चा है। लेकिन जो प्रमुख नाम है उसमें गोपालगंज के पूर्व सांसद जनक राम या अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कामेश्वर चौपाल को एमएलसी बनाया जा सकता है। काफी दिनों से वेटिंग में पड़े प्रदेश महासचिव देवेश कुमार या फिर राधा मोहन शर्मा का भी नाम जा सकता है। भाजपा ब्राह्मण कोटे से आने वाले मिथिलेश तिवारी को एमएलसी बना सकती है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिंह भी इस फेहरिस्त में खड़े हैं। प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश वर्मा का भी नाम इस लिस्ट में हो सकता है। अति पिछड़ा वर्ग से आने वाले सतपाल नरोत्तम भी इसलिस्ट में शामिल हो सकते हैं। हालांकि भाजपा का कोई भी फैसला दिल्ली मुख्यालय से होता है, ऐसे में अंतिम समय में भी कई फेरबदल संभव है।

मुकेश सहनी बनेंगे एमएलसी
बाकी बची 2 सीटों में से एक पर वीआईपी पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी का एमएलसी बनना तय है। उन्होंने मंत्रिमंडल में शपथ भी ले ली है और वह दोनों सदनों में से एक भी सदन के सदस्य नहीं हैं। वहीं, जीतन राम मांझी की पार्टी से एक नेता को एमएलसी बनाया जा सकता है। इसमें हम के राष्ट्रीय प्रवक्ता दानिश रिजवान या फिर जीतन राम मांझी के दामाद देवेंद्र मांझी को एमएलसी के रूप में सदन भेजा जा सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.