हाईकाेर्ट ने सरकार से पूछा-लालू प्रसाद काे क्यों निदेशक के बंगले में शिफ्ट किया गया, मोबाइल कैसे मिला

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चारा घाेटाले में सजायाफ्ता राजद प्रमुख लालू प्रसाद की मुश्किलें कम नहीं हाे रही हैं। अब झारखंड हाईकाेर्ट के चीफ जस्टिस डाॅ. रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सरकार से पूछा है कि लालू प्रसाद काे पेइंग वार्ड से रिम्स निदेशक के केली बंगले में किस नियम के तहत शिफ्ट किया। लालू काे केली बंगले में शिफ्ट करने का फैसला किसका था। उन्हें मोबाइल कैसे मिला। हाईकाेर्ट के वकील मनाेज टंडन ने इस संबंध में जनहित याचिका दायर कर लालू प्रसाद के लिए जेल मैनुअल के उल्लंघन का आराेप लगाया था। उन्हाेंने सवाल उठाया था कि क्या एक कैदी काे बंगले में शिफ्ट किया जा सकता है। लालू काे काैन सी बीमारी है, जिसका इलाज जेल में न कराकर बंगले में कराया जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई अब आठ जनवरी काे हाेगी। उसी दिन सरकार काे जवाब देना है।

माेबाइल पहुंचना जेल मैनुअल का उल्लंघन

सुनवाई के दाैरान याचिकाकर्ता मनाेज टंडन ने कहा कि बंगले में दरबार लगाया जा रहा है। लालू काे फाेन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वह बिहार के विधायक से बात कर रहे हैं। यह जेल मैनुअल का उल्लंघन है। सुप्रीम काेर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए उन्हाेंने कहा कि पटना के बीएमपी गेस्ट हाउस में लालू काे ठहराया गया था, जबकि वह एक कैदी थे। सुप्रीम काेर्ट काे जानकारी मिली ताे तत्काल गेस्ट हाउस से जेल भेज दिया गया था। इस पर काेर्ट ने कहा-मीडिया रिपाेर्ट के मुताबिक लालू की एक ऑडियाे वायरल हुई थी। उनके पास माेबाइल कैसे पहुंचा। जेल के अंदर माेबाइल फाेन का पहुंचना एक गंभीर मामला है।

जेल प्रशासन से भी 18 दिसंबर तक मांगी रिपाेर्ट

लालू प्रसाद द्वारा जेल मैनुअल उल्लंघन मामले में भी शुक्रवार काे हाईकाेर्ट के जस्टिस अपरेश सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। काेर्ट ने जेल प्रशासन से विस्तृत रिपाेर्ट मांगी। साथ ही जेलर काे भी विस्तृत जवाब देने काे कहा। काेर्ट ने पूछा कि सजायाफ्ता कैदी काे अटेंडेंट देने की क्या प्रक्रिया है, यह भी बताएं। इस मामले की अगली सुनवाई अब 18 दिसंबर काे हाेगी।

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