बन गईं बिहार विधानसभा समितियां: 7 भाजपा कीं, 6 राजद और 5 ही जदयू के पास, नंदकिशोर-प्रेम कुमार भी नहीं बनेंगे मंत्री

0
132

मंत्रिपरिषद् गठन के बाद पहली कैबिनेट मीटिंग से एक शाम पहले नीतीश कुमार का अहम फैसला सोमवार को सामने आया। यह फैसला विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा की ओर से आया और इसने साफ कर दिया कि विधानसभा चुनाव परिणाम की तरह सरकार में भाजपा भारी है और सबसे बड़े दल राजद के सामने जदयू कमतर है। इस फैसले के तहत विधानसभा की 7 समितियां भाजपा के पास आ गई हैं, जबकि 6 राजद और 5 जदयू के पास रही हैं। 2 कांग्रेस और 1-1 हम-वामदल के पास रही हैं। समितियों में 11 पूर्व मंत्रियों के नाम हैं, यानी अब मंत्रिमंडल विस्तार होगा तो इनमें से किसी के लिए मंत्रिमंडल में प्रवेश की संभावना नहीं रहेगी।

चिट्‌ठी-पत्री के बाद अब तेज प्रताप को भी पद

भाजपा के पास स्पीकर पद पहले से है। पिछले 10 दिनों से इन समितियों के लिए भाजपाई स्पीकर विजय कुमार सिन्हा और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के बीच कड़ी चिट्‌ठी-पत्री चल रही थी। उस कंट्रोवर्सी का रिजल्ट भी सोमवार को सामने आ गया, जब राजद को मिलीं छह समितियों में से एक का सभापति लालू यादव के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव को बनाया गया।

11 पूर्व मंत्री इसमें शामिल, नहीं बनेंगे मंत्री

विधानसभा में समितियों में जिन नामों को लिया गया है, उससे यह तय हो गया है कि उन नेताओं को अगले मंत्रिमंडल के विस्तार में नहीं रखा जाएगा। भाजपा ने पूर्व मंत्री नंदकिशोर यादव, डॉ. प्रेम कुमार, रामनारायण मंडल, कृष्ण कुमार ऋषि, विनोद नारायण झा और राम प्रवेश राय को समितियों का सभापति बनाकर इनके लिए मंत्रिमंडल का दरवाजा बंद कर दिया है। अब इन नेताओं को अगले विस्तार में मंत्री नहीं बनाया जाएगा। वहीं, जदयू ने ऐसे 5 नेताओं- नरेंद्र नारायण यादव, हरिनारायण सिंह, दामोदर रावत, अमरेंद्र कुमार पांडे और शशि भूषण हजारी के लिए मंत्रिमंडल का दरवाजा बंद कर दिया है।

कुछ नेताओं को मिले पद अब चर्चा में रहेंगे

विधानसभा में समितियों की जिम्मेदारी उन नेताओं को दी जाती है, जो गंभीरता के साथ सभापति पद का निर्वहन करते हैं। अमूमन लोक लेखा समिति की जिम्मेदारी विपक्ष के पास ही रहती है और इस बार भी राजद के सुरेंद्र प्रसाद यादव को इस समिति का सभापति बनाया गया है। वहीं, लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को गैर सरकारी विधेयक एवं संकल्प का सभापति बनाया गया है। जदयू के बाहुबली विधायक अमरेंद्र कुमार पांडे को प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति का सभापति बनाया गया है।

सभापति या सदस्‍य बनने से रुतबा-भत्ता बढ़ता है

ऐसी समितियों के सभापति या सदस्य बनने से विधायकों की सुविधा बढ़ जाती है। समितियों सभापति और सदस्यों को प्रतिदिन 2000 रुपए का दैनिक भत्‍ता मिलता है। समितियों का सभापति पद विधायकों की संख्‍या के अनुपात में पार्टियों को आंवटित किया जाता है, जबकि सदस्‍य के रूप में समिति में सभी पार्टियों को प्रतिनिधित्‍व देने की परंपरा रही है। विभिन्‍न पार्टियों की ओर से सभापतियों के नामों की सिफारिश के आलोक में विधानसभा अध्‍यक्ष सभापति के गठन की अधिसूचना जारी करते हैं। इसके बाद ही दैनिक भत्‍ता के रूप में प्रतिदिन दो हजार रुपए विधायकों को मिलने की शुरुआत होती है। जिन विधायकों को यह पद मिला है, अब इनकी गाड़ियों पर “सदस्य, विधानसभा” की जगह “सभापति, ……समिति, बिहार विधानसभा” का बोर्ड चमकने लगेगा।

लोक लेखासुरेंद्र प्रसाद यादवराजद
प्राक्कलननंद किशोर यादवभाजपा
सरकारी उपक्रमों संबंधीहरि नारायण सिंहजदयू
याचिकाप्रेम कुमारभाजपा
SC/ST कल्याणजीतन राम मांझीहम
आचारराम नारायण मंडलभाजपा
जिला परिषद एवं पंचायती राजनरेंद्र नारायण यादवजदयू
राजकीय आश्वासनदामोदर रावतजदयू
बिहार विरासत विकासभाई वीरेंद्रराजद
प्रत्यायुक्त विधानअजीत शर्माकांग्रेस
निवेदनविनोद नारायण झाभाजपा
पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रणराम प्रवेश रायभाजपा
महिला एवं बाल विकासअरुणा देवीभाजपा
कृषि उद्योग विकासकृष्ण कुमार ऋषिभाजपा
प्रश्न एवं ध्यानाकर्षणअमरेंद्र कुमार पांडेयजदयू
गैर सरकारी विधेयक एवं संकल्पतेज प्रताप यादवराजद
पुस्तकालयसुदामा प्रसादमाले
पर्यटन उद्योग संबंधीअनिता देवीराजद
आंतरिक संसाधनन एवं केंद्रीय सहायताशमीम अहमदराजद
शून्य कालचंद्रहास चौपालराजद
अल्पसंख्यक कल्याणमो. अफाक आलमकांग्रेस
आवासशशि भूषण हजारीजदयू

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.