पटना: मंत्रिमंडल विस्तार में देरी पर बोले प्रदेश अध्यक्ष,बीजेपी का काम करने का तरीका अलग है

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बिहार की सरकार को चलाने के लिए नीतीश कुमार को अब बीजेपी की कार्यशैली समझनी होगी. नीतीश ने मंगलवार को कहा था कि बीजेपी के कारण मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो रहा है. अब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल का बयान आया है. यही बीजेपी की कार्यशैली है.

मंत्रिमंडल विस्तार पर फंसा है पेंच 
दरअसल एक महीने पहले जब बिहार में नयी सरकार का गठन हुआ था तो सिर्फ 14 मंत्रियों ने शपथ लिया था. सूत्रों के मुताबिक बीजेपी और जेडीयू के बीच ये तय हुआ था कि नवंबर महीने के ही आखिर में मंत्रिमंडल का पूर्ण विस्तार कर लिया जाये. इस बीच जेडीयू के एक मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा. यानि सिर्फ 13 मंत्रियों के सहारे बिहार सरकार चल रही है. जबकि यहां 36 मंत्री बनाये जा सकते हैं. आलम ये है कि एक एक मंत्री को 5-5 विभाग देखना पड़ रहा है.

नीतीश को नयी नसीहत
दरअसल मंगलवार को जब मीडिया ने नीतीश कुमार से पूछा था कि मंत्रिमंडल का विस्तार क्यों नहीं हो रहा है तो उन्होंने कहा कि बीजेपी से बात नहीं हो पायी है. नीतीश ने इशारों में ही ये बता दिया था कि बीजेपी के कारण मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पा रहा है. इसके लिए जेडीयू जिम्मेवार नहीं है.

आज बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने नीतीश कुमार को जवाब दे दिया. संजय जायसवाल ने कहा कि बीजेपी का काम करने का तरीका अलग है. बीजेपी अपने तरीके से काम करती है. वैसे उन्होंने ये भी कहा कि बीजेपी जेडीयू से बात कर मंत्रिमंडल विस्तार पर फैसला कर लेगी. लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार पर फैसला कब तक हो जायेगा ये बताने को संजय जायसवाल तैयार नहीं हुए.

अस्त-व्यस्त बिहार सरकार 
बिहार मे मंत्रिमंडल विस्तार नहीं होने से क्या हाल है इस पर नजर डालना जरूरी है. फिलहाल नीतीश कुमार के अतिरिक्त कैबिनेट में 13 मंत्री हैं जिन पर 22 विभागों की जिम्मेवारी है. बीजेपी कोटे से डिप्टी सीएम बने तारकिशोर प्रसाद के पास 6 विभाग हैं. वहीं जेडीयू कोटे से मंत्री विजय कुमार चौधरी और अशोक कुमार चौधरी पर 5-5 विभागों का जिम्मा है. दिलचस्प बात ये है कि मंत्री जानते हैं कि उनके विभाग हटेंगे. लेकिन कौन सा विभाग हटेगा और कौन उनके  पास रहेगा ये उन्हें पता नहीं. लिहाजा मंत्री किसी विभाग की कार्ययोजना ही नहीं बना पा रहे हैं.

नीतीश को सीखनी पड़ेगी बीजेपी की कार्यशैली
उधर नीतीश कुमार और संजय जायसवाल के बयानों को देख कर साफ लग रहा है कि नीतीश कुमार को मैसेज दिया जा रहा है. अब सरकार चलाने के  लिए उन्हें बीजेपी की कार्यशैली जाननी पड़ेगी. नीतीश कुमार और बीजेपी की दोस्ती लगभग ढ़ाई दशक पुरानी है. लेकिन इस अवधि में नीतीश कुमार बिहार में अपनी मर्जी से बीजेपी को चलाते रहे. पहली दफे हालात बदले हैं. अब नीतीश सिर्फ इसलिए मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं कर पा रहे हैं कि बीजेपी ने हरी झंडी नहीं दिखायी है.

जानकारों की मानें तो बीजेपी ने विभागों को लेकर भी नीतीश कुमार पर दबाव बना रखा है. पिछली सरकार में जेडीयू के पास जितने अहम विभाग थे इस दफे भी नीतीश ने उन्हें अपने कोटे में रख लिया है. बीजेपी विधायकों की संख्या के आधार पर जेडीयू कोटे के विभागों को अपने हिस्से लाना चाह रही है. शिक्षा, ग्रामीण कार्य और जल संसाधन जैसे मलाईदार विभागों पर बीजेपी की नजर है.

बीजेपी के एक नेता ने बताया कि नीतीश कुमार को गृह और सामान्य प्रशासन विभाग अपने पास रखने की छूट दे दी गयी है. कायदे से ये विभाग बीजेपी के हिस्से में आने चाहिये थे. लेकिन अब उन्हें बाकी के अहम विभाग बीजेपी को दे देना चाहिये. मंत्रिमंडल विस्तार का पेंच इस मसले पर भी फंसा है. जब तक नीतीश कुमार अपने हिस्से के कुछ विभाग बीजेपी को नहीं देते तब तक शायद मंत्रिमंडल विस्तार का मामला नहीं सुलझ पाये. 

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