साल का सबसे छोटा दिन और सबसे बड़ी रात ,आज दो बड़ी खगोलीय घटना देखने को मिलेगी

0
173

सौरमंडल (Solar System) में आज दो बड़ी खगोलीय घटना देखने को मिलेगी. आज एक तरफ जहां दो बड़े ग्रह बृहस्पति (Jupiter) और शनि (Saturn) एक दूसरे के बेहद नजदीक नजर आएंगे वहीं आज का दिन साल का सबसे छोटा दिन होगा. इस खुगोलीय घटना को Winter solstice कहा जाता है. आज के दिन सूर्य कर्क रेखा से मकर रेखा की तरफ उत्तरायण से दक्षिणायक की ओर प्रवेश करता है.

सूर्य में होने वाले इस बदलाव के कारण सूरज की किरणे बहुत कम समय के लिए पृथ्वी पर पड़ती हैं. बता दें कि आज सूर्य की मौजूदगी करीब 8 घंटे रहती है जबकि इसके अस्त होने के बाद लगभग 16 घंटे की रात होती है. इस खुगोलीय घटना के बाद ठंड भी काफी ज्यादा बढ़ जाती है.

इस खुगोलीय घटना के बाद पृथ्वी पर सूर्य की रोशनी काफी कम समय के लिए पड़ती है जिसका असर ठंड पर भी पड़ता है. हालांकि सूर्योदय और सूर्यास्त का सही समय टाइम जोन और भौगोलिक स्थिति पर भी निर्भर करता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक ये खुगोलीय घटना हर साल होती है. वैज्ञानिकों के मुताबिक पृथ्वी अपने घूर्णन के अक्ष पर लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई होती है. पृथ्वी के झुकाव के कारण हर गोलार्ध को पूरे साल अलग अलग मात्रा में ही सूरत की रोशनी मिल पाती है.

दिसंबर में सूरज की किरणें भूमध्य रेखा के दक्षिण की ओर मकर रेखा के साथ पहुंचती हैं. यही कारण है कि उत्तरी गोलार्ध में यह दिसंबर संक्रांति और दक्षिणी गोलार्ध में इसे जून संक्रांति के रूप में जाना जाता है.

इस दौरान दो बड़े ग्रह बृहस्पति (Jupiter) और शनि (Saturn) एक दूसरे के बेहद नजदीक आ जाएंगे. ऐसे में धरती से देखने पर ये दोनों एक ही ग्रह के समान दिखेंगे. ये दोनों ग्रह इससे पहले 17वीं शताब्दी में महान खगोलविद गैलीलियो के जीवनकाल में इतने पास आए थे. अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे सौरमंडल में दो बड़े ग्रहों का नजदीक आना बहुत दुर्लभ नहीं है. बृहस्पति ग्रह अपने पड़ोसी शनि ग्रह के पास से प्रत्येक 20 साल पर गुजरता है, लेकिन इसका इतने नजदीक आना खास है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि दोनों ग्रहों के बीच उनके नजरिए से सिर्फ 0.1 डिग्री की दूरी रह जाएगी. अगर मौसम स्थिति अनुकूल रहती है तो ये आसानी से सूर्यास्त के बाद दुनिया भर से देखे जा सकते हैं. यह घटना 21 दिसंबर 2020 को होने जा रही है.यह साल का सबसे छोटा दिन माना जाता है. वांदरबिल्ट विश्वविद्यालय में खगोलशास्त्र के प्रोफेसर डेविड वेनट्रॉब ने कहा, ‘मेरा मानना है कि यह कहना उचित होगा कि यह घटना आम तौर पर किसी व्यक्ति के जीवन में एक ही बार आता है.’

जुलाई, 1623 में दोनों ग्रह इतने करीब आए थे
उल्लेखनीय है कि इससे पहले जुलाई, 1623 में दोनों ग्रह इतने करीब आए थे लेकिन सूर्य के नजदीक होने की वजह से उन्हें देख पाना लगभग असंभव था. वहीं, उससे पहले मार्च, 1226 में दोनों ग्रह करीब आए थे और इस घटना को धरती से देखा जा सकता था. इसके बाद से अब तक पहली बार हो रहा है जब यह खगोलीय घटना हो रही है और इसे देखा भी जा सकता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.