पटना: पद गंवा कर भी मंत्रियों वाले बंगले में ही रह गये पूर्व मंत्री, नंदकिशोर, प्रेम, संजय झा, नीरज कुमार

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बिहार सरकार ने आज अपने नये मंत्रियों को बंगला आवंटित कर दिया. दो उप मुख्यमंत्रियों के साथ साथ 13 मंत्रियों को बंगले का आवंटन कर दिया गया है. लेकिन आलीशान बंगलों में विराजमान पूर्व मंत्रियों के घर पर सरकार ने मेहरबानी दिखा दी. पिछली सरकार में मंत्री रहे और इस दफे मंत्री नहीं बन पाने वाले ज्यादातर नेताओं की कोठी बची रह गयी.

नये मंत्रियों को मिला बंगला
राज्य सरकार ने आज नये मंत्रियों को बंगले के आवंटन की अधिसूचना जारी कर दी. बिहार के भवन निर्माण विभाग ने पत्र जारी किया है. सरकार ने पहले से ही डिप्टी सीएम के लिए बंगला तय कर रखा था. इसमें ही सुशील मोदी रहते थे. पांच देशरत्न मार्ग का ये बंगला  उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद को आवंटित किया गया है. वहीं, सूबे की दूसरी उप मुख्यमंत्री रेणु देवी को 3 स्ट्रैंड रोड स्थित कोठी दी गयी है.

सरकारी अधिसूचना के मुताबिक मंत्री विजय कुमार चौधरी को पांच, सर्कुलर रोड स्थित आवास,  मंत्री शीला कुमारी को 23 एम, स्ट्रैंड रोड स्थित आवास, मंत्री संतोष कुमार सुमन को 25 एम, स्ट्रैंड रोड स्थित आवास, मंत्री मुकेश सहनी को 6 स्ट्रैंड रोड स्थित आवास,  मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह को 12, बेली रोड स्थित आवास, मंत्री डॉ. रामप्रीत पासवान को 43 हार्डिंग रोड स्थित आवास, के मंत्री जीवेश कुमार को 5, पोलो रोड स्थित आवास और मंत्री रामसूरत कुमार को 33, ए, हार्डिंग रोड स्थित आवास आवंटित किया गया है. सरकार ने पिछली सरकार में भी मंत्री रहे विजेंद्र यादव, अशोक चौधरी और मंगल पांडेय को उनका पुराना आवास ही फिर से आवंटित कर दिया गया है.

पूर्व मंत्रियों पर मेहरबानी
नये मंत्रियों को बंगले के आवंटन के दौरान राज्य सरकार ने पिछली सरकार में मंत्री होने के नाते आलीशान बंगलों में रह रहे नेताओं पर मेहरबानी दिखायी. 2, स्ट्रैंड रोड के मंत्री वाले बंगले में रह रहे नंदकिशोर यादव, 3 सर्कुलर रोड में रह रहे प्रेम कुमार के साथ साथ संजय झा, नीरज कुमार जैसे नेताओं के बंगले को सरकार ने उनके पास ही छोड़ दिया है. हालांकि राज्य सरकार ने मंत्रियों के लिए बंगला तय कर रखा है और मंत्री पद जाने के बाद नेताओं से बंगला खाली कराया जाता रहा है. 2017 में जब नीतीश कुमार ने आरजेडी का साथ छोड़कर बीजेपी के साथ सरकार बनायी थी तो तेजस्वी, तेजप्रताप और अब्दुल बारी सिद्दीकी जैसे नेताओं को बंगला खाली करना पड़ा था. 

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