बिहार: 9 सरकारी अस्पतालों में बेमियादी हड़ताल, एक को छोड़ किसी में नहीं दिखा इलाज पर असर

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पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (PMCH) सहित बिहार के सभी 9 मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर बुधवार की सुबह से अनिश्चतकालीन हड़ताल पर हैं। जूनियर डॉक्टरों ने OPD के अलावा इमरजेंसी में भी कार्य बहिष्कार कर रखा है। इन लोगों ने स्टाइपेंड बढ़ाने का मांग की है। हालांकि सभी मेडिकल कॉलेजों में सीनियर डॉक्टरों को तैनात कर दिया गया है। इसके कारण पटना के NMCH को छोड़कर बाकी के 8 अस्पतालों में हड़ताल का असर नहीं पड़ा है। IGIMS में तो कुछ जूनियर डॉक्टर भी ड्यूटी पर नजर आ रहे हैं।

बड़े ऑपरेशन फिलहाल टाले
PMCH के प्राचार्य विद्यापति चौधरी ने बताया कि सीनियर डॉक्टरों का रोस्टर तैयार कर लिया गया है और उसी अनुसार ड्यूटी लगाई जा रही है। सभी OPD चल रहे हैं और इमरजेंसी में भी काम हो रहा है। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का असर सामान्य इलाज पर तो नहीं पड़ रहा है, लेकिन डॉक्टरों की कमी होने की वजह से PMCH में ऑपरेशन की तारीखें बढ़ाई जा रही हैं। बुधवार के कई ऑपरेशन टाल दिए गए। पश्चिम चंपारण से आए पारस प्रसाद सड़क हादसे में घायल हो गए थे। PMCH में बुधवार को उनके पैर का ऑपरेशन होना था, लेकिन उन्हें बताया गया कि आज हड़ताल है इसलिए ऑपरेशन नहीं हो पाएगा। पश्चिम चंपारण से ही आए विद्यासागर के पाइल्स का ऑपरेशन होना था, लेकिन उसकी तिथि भी बढ़ा दी गई है।

IGIMS के OPD में भीड़
पटना के IGIMS में भी जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का कोई खास असर नहीं दिख रहा है। हर दिन की तरह आज भी OPD में मरीजों की काफी भीड़ रही। हर दिन की तरह रसीद कटी, यहां सीनियर डॉक्टर के साथ कई जूनियर डॉक्टर मिलकर भी ड्यूटी कर रहे हैं।

OPD सिर्फ NMCH में प्रभावित
NMCH में आपातकालीन सेवा के साथ साथ OPD सेवा पूरी तरह से प्रभावित हो गई है। सीनियर डॉक्टरों के भरोसे पूरा अस्पताल चल रहा है। यहां वार्ड में भर्ती मरीजों का इलाज भी बाधित हो रहा है। हालांकि नर्स अस्पताल में सेवा दे रही हैं लेकिन मरीज को कोई बड़ी परेशानी होती है तो उसे देखने वाला कोई नहीं है।

हड़ताल लंबी चली तो पड़ेगा असर
PMCH में कुछ घंटों के लिए रुकी OPD सेवा ठप रही सीनियर डॉक्टरों के आने के बाद शुरू कर दी गई। इस दौरान मरीजों की लाइन भी दिखी। मरीजों के मुताबिक कुछ जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल के बारे में उन्हें समझाकर वापस भी कर दिया। हालांकि, कोरोना मरीजों के इलाज में जिनकी ड्यूटी लगी है वे जूनियर डॉक्टर कार्य करेंगे। प्राचार्य विद्यापति चौधरी ने बताया कि सीनियर डॉक्टरों की ड्यूटी रोस्टर के अनुसार लगा तो दी गई है, लेकिन जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का असर तो होगा ही। अगर जूनियर डॉक्टर लगातार हड़ताल पर रहते हैं तो सिविल सर्जन को अतिरिक्त डॉक्टर के लिए भी वे लिखेंगे। हड़ताल पर गए जूनियर डॉक्टरों की कुल संख्या 1200 से 1500 मानी जा रही है।

भागलपुर और गया में भी असर नहीं
भागलपुर के मायागंज अस्पताल में भी सीनियर डॉक्टरों ने कमान संभाल ली है। हर दिन की तरह मरीजों का इलाज चल रहा है। सुबह सात बजे के बाद कुछ देर के लिए मरीज परेशान दिखे लेकिन सीनियर डॉक्टरों के आने के बाद इलाज शुरू हो गया। वहीं, मायागंज अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि 2017 से उनके स्टाइपेंड में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। गया के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल (ANMMCH) की स्थिति भी सामान्य दिख रही है। यहां भी सीनियर डॉक्टरों ने कमान संभाल ली है। वे मरीजों का इलाज कर रहे हैं। हालांकि, अन्य दिनों की तरह यहां भीड़ आज कम दिख रही है।

ANMMCH में पर्याप्त संख्या में हैं डॉक्टर

ANMMCH के सुपरिटेंडेंट बीके प्रसाद का कहना है कि हमारे यहां स्थिति सामान्य है। बुधवार को हड़ताल का पहला दिन था। इस बाबत किसी जूनियर डॉक्टर द्वारा कोई सूचना न तो लिखित में दी गई है और न ही मौखिक। दोपहर बाद जूनियर डॉक्टरों (पीजी) की ओर से मौखिक जानकारी दी गई है कि गुरुवार को वे OPD बंद रखेंगे, लेकिन कोविड वार्ड व इमरजेंसी में अपनी सेवा सामान्य रूप से देते रहेंगे। रही बात आगे की तो समय के साथ ठोस निर्णय लिए जाएंगे। मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पास पर्याप्त संख्या में डॉक्टर हैं। सीनियर्स से सेवाएं ली जाएंगी।

क्या है जूनियर डॉक्टरों की मांग
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) के प्रेसिडेंट हरेंद्र ने बताया कि स्ट्राइक पर जाने की सूचना मौखिक रूप से कॉलेज प्रशासन को मंगलवार को दे दी गई थी। सरकार के संकल्प के अनुसार हर 3 साल पर स्टाइपेंड का पुनरीक्षण करना है। जनवरी 2020 में यह बढ़ना चाहिए था। लेकिन कई बार के अनुरोध के बावजूद इसे नहीं बढ़ाया गया, न इसके लिए अब तक कोई आश्वासन दिया गया है। JDA के अनुसार 2017 के बाद स्टाइपेंड में रिवीजन नहीं किया गया। अभी स्टाइपेंड प्रथम वर्ष में 50 हजार, दूसरे में 55 हजार और तीसरे वर्ष में 60 हजार रुपए मिलते हैं। जूनियर डॉक्टर इसे बढ़ाकर क्रमश: 80 हजार, 85 हजार और 90 हजार करने की मांग कर रहे हैं। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी समर्थन दिया है।

हड़ताली डॉक्टरों से वार्ता बेनतीजा
उधर, बुधवार की दोपहर 12:30 बजे जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन और PMCH प्रशासन के बीच वार्ता हुई, लेकिन यह बेनतीजा रही। जूनियर डॉक्टरों ने साफ-साफ कह दिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी, तब तक वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव से दो बार मिलने की कोशिश की गई पर मुलाकात नहीं हुई।

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