संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के शीर्ष इस्लामी निकाय ‘यूएई फतवा काउंसिल’ ने कोरोना वायरस वैक्सीन में पोर्क (सुअर के मांस) के जिलेटिन का इस्तेमाल होने पर भी इसे मुसलमानों के लिये जायज करार दिया है। वैक्सीन में सामान्य तौर पर पोर्क जिलेटिन का इस्तेमाल होता है और इसी वजह से टीकाकरण को लेकर उन मुस्लिमों की चिंता बढ़ गई है जो इस्लामी कानून के तहत पोर्क से बने उत्पादों के प्रयोग को ‘हराम’ मानते हैं। काउंसिल के अध्यक्ष शेख अब्दुल्ला बिन बय्या ने कहा कि अगर कोई और विकल्प नहीं है तो कोरोना वायरस वैक्सीन को इस्लामी पाबंदियों से अलग रखा जा सकता है क्योंकि पहली प्राथमिकता मनुष्य का जीवन बचाना है।

काउंसिल ने कहा कि इस मामले में पोर्क-जिलेटिन को दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाना है न कि भोजन के तौर पर। बता दें कि सोशल मीडिया पर खबर फैल रही है कि कोरोना वायरस वैक्सीन में सुअर की चर्बी मिलाई गई है। सुअर मुस्लिम समाज में हराम माना जाता है। इस वायलर मैसेज के चलते मुस्लिम समुदाय में इस वैक्सीन के खिलाफ आवाजें उठने लगी है।

मुंबई के 9 मुस्लिम संघटनों के लोगों ने दक्षिण मुंबई के 2 टाकी इलाके में स्थित बिलाल मस्जिद में कोरोना वैक्सिन के मुद्दे पर बैठक की। इस मीटिंग में वैक्सीन में सुअर की चरबी इस्तेमाल करने की सोशल मीडिया में खबरों पर चर्चा की गई। मीटिंग में सौ डेढ़ सौ लोग शामिल थे। इस मीटिंग में मुफ्ती, मौलाना, मस्जिदों के इमामों ने हिस्सा लिया।

मीटिंग में कहा गया कि  वैक्सीन में क्या क्या मिला है पहले हम ये जानेंगे। आज कल बार कोड से दो मिनट में पता चल जाता है। बड़े डॉक्टरों से मीटिंग करके जानकारी हासिल करंगे। सरकार जो तय करे वैक्सीन को लेकर लेकिन हमें भी अल्लाह ने अक्ल दी है कि हम अपनी सुरक्षा के लिए सोचे। वैक्सीन आने के फौरन बाद वैक्सीन नही लगाना है। वेट करना है। खाना सामने आया तो तुरंत खा लेंगे ऐसा नही है। पहले देखेंगे खाना अच्छा है या नही।

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