बिहार विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के खराब प्रदर्शन और पिछले दिनों अरुणाचल प्रदेश में 6 पार्टी विधायकों के बीजेपी में शामिल हो जाने के बाद आज पटना में JDU कार्यकारिणी की बैठक हुई. बैठक में नीतीश कुमार ने राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह को पार्टी की कमान सौंपते हुए उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का ऐलान किया. बता दें कि अप्रैल 2016 में शरद यादव के JDU राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटने के बाद से ही नीतीश कुमार पार्टी के अध्यक्ष रहने के साथ-साथ मुख्यमंत्री के पद पर भी बने हुए थे.

जानिए कौन हैं आरसीपी सिंह

बता दें कि वर्तमान में आरसीपी सिंह JDU के राज्यसभा सांसद हैं. 62 वर्षीय आरसीपी सिंह मूल रूप से नालंदा के रहने वाले हैं जहां से नीतीश कुमार भी हैं. नालंदा जिले के मुस्तफापुर में 6 जुलाई 1958 को जन्में आरसीपी सिंह के पिता का नाम स्वर्गीय सुखदेव नारायण सिंह था. माता का नाम स्वर्गीय दुख लालो देवी. आरसीपी सिंह की प्रारंभिक शिक्षा हुसैनपुर, नालंदा और पटना साइंस कॉलेज से हुई. बाद में जेएनयू में पढ़ने के लिए गए. राजनीति में शामिल होने से पहले आरसीपी सिंह प्रशासनिक सेवा में रहे. यूपी कैडर से आईएएस रहे, वो रामपुर, बाराबंकी, हमीरपुर और फतेहपुर के जिलाधिकारी रहे. इस दौरान आरसीपी सिंह की सपा के कद्दावर नेता रहे बेनी प्रसाद वर्मा से नजदीकियां बढ़ी. आरसीपी सिंह कुर्मी जाति से हैं और नीतीश कुमार भी कुर्मी समाज से ही आते हैं. सिंह को नीतीश कुमार का बेहद करीबी माना जाता है. उनको पार्टी में नीतीश के बाद नंबर 2 का दर्जा हासिल है. राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पहले आरसीपी सिंह JDU के राष्ट्रीय महासचिव थे.  

कैसे बने आरसीपी सिंह नीतीश कुमार के करीबी

जब बेनी प्रसाद वर्मा केंद्रीय संचार मंत्री थे तो आरसीपी सिंह उनके निजी सचिव थे. इसके बाद नीतीश कुमार रेल मंत्री बने तो बेनी प्रसाद वर्मा ने उनसे आरसीपी सिंह का परिचय कराया और उन्हें अपने साथ रखने की सलाह दी थी. नीतीश कुमार ने इसी के बाद उन्हें अपना निजी सचिव रखा था. इतना ही नहीं नीतीश मुख्यमंत्री बने तो वह पांच सालों तक उनके प्रधान सचिव रहे. उसके बाद नीतीश जब बिहार के मुख्यमंत्री बने तो आरसीपी को अपना प्रधान सचिव बनाया. फिर उन्हें राजनीति में ले आए, और अब राज्यसभा का सांसद बना दिया, तब से दोनों नेताओं के बीच अच्छी केमिस्ट्री है.  

2005 से 2010 के बीच आरसीपी सिंह नीतीश कुमार के प्रधान सचिव के तौर पर कार्यरत रहे. इस दौरान पार्टी में आरसीपी सिंह की पकड़ मजबूत होने लगी.

आरसीपी सिंह ने 2010 में आईएएस की सेवा से समय से पहले रिटायरमेंट ले लिया. इसके बाद नीतीश कुमार ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया. 2015 में एक ऐसा भी समय आया जब नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद से साथ हाथ मिला लिया. बताया जाता है कि नीतीश कुमार और लालू प्रसाद के एक साथ लाने में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की भी बड़ी भूमिका थी. 2015 विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को मिली जीत के बाद एक ऐसा वक्त था जब JDU में प्रशांत किशोर का ग्राफ तेजी से ऊपर बढ़ रहा था और आरसीपी सिंह पार्टी में हाशिए पर चले गए थे.

हालांकि, 2016 में नीतीश कुमार ने दोबारा आरसीपी सिंह पर भरोसा जताया और उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया. 2019 लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार और प्रशांत किशोर के बीच में टकराव की स्थिति पैदा हो गई जिसके बाद प्रशांत किशोर को जेडीयू से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. इसके बाद एक बार फिर से पार्टी में आरसीपी सिंह की पकड़ मजबूत होने लगी.

2019 में नरेंद्र मोदी सरकार दोबारा बनने के बाद सहयोगी JDU को एक केंद्रीय मंत्री का ऑफर दिया गया. बताया जाता है कि आरसीपी सिंह मंत्री बनने के लिए बीजेपी की पसंद है, मगर नीतीश कुमार के एक और करीबी ललन सिंह भी मंत्री बनना चाहते थे और दोनों नेताओं के टकराव की वजह से नीतीश कुमार ने फैसला लिया कि, मोदी सरकार में JDU का कोई प्रतिनिधित्व नहीं होगा.

चर्चित आईपीएस लिपि सिंह के पिता हैं आरसीपी सिंह

आरसीपी सिंह की एक दूसरी पहचान यह है कि वह दबंग आईपीएस अधिकारी और लेडी सिंघम के नाम से मशहूर 2016 बैच के आईपीएस अधिकारी लिपि सिंह के पिता हैं. बताया जाता है कि आईएएस लॉबी में अपनी मजबूत पकड़ के कारण ही आरसीपी सिंह ने लिपि सिंह को बिहार में पोस्टिंग दिलवाई.

लिपि सिंह की पहली पोस्टिंग बाढ़ अनुमंडल में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) के तौर पर हुई. यह इलाका बाहुबली नेता और निर्दलीय विधायक अनंत सिंह का था. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के तौर पर काम करते हुए लिपि सिंह ने अनंत सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की और उन्हें जेल भिजवाया. बता दें कि लिपी के पति सुभाष भगत भी आईएएस हैं और वर्तमान में बांका के डीएम हैं.

लिपि सिंह के इस काम के बाद नीतीश कुमार ने उन्हें मुंगेर का पुलिस अधीक्षक बना दिया. 2020 विधानसभा चुनाव के दौरान मुंगेर में दुर्गा मूर्ति विसर्जन के दौरान आम नागरिकों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई और गोलीबारी में एक युवक की मौत हो गई. इस घटना ने तूल पकड़ा और लोगों ने लिपि सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस के तरफ से हुई फायरिंग में युवक की मौत हुई थी. लिपि सिंह को हटाने की मांग तूल पकड़ने के बाद नीतीश कुमार ने उन्हें मुंगेर पुलिस अधीक्षक के पद से हटा दिया.

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