पटना: हाईकोर्ट में फिजिकल सुनवाई का पहला दिन, कोर्ट रूम में बनी शीशे की भारी भरकम दीवार

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सोमवार को लगभग 9 महीने के बाद पटना हाईकोर्ट में फिजिकल सुनवाई हुई। माहौल पूरी तरह बदला हुआ था। वकीलों को गेट नम्बर 3 से ई-पास के जरिए प्रवेश करने की अनुमति दी गई। कोर्ट रुम का स्वरुप भी पूरी तरह बदला हुआ था। शीशे के भारी भरकम दीवार के उस पार जज साहब बैठकर मामले की सुनवाई करते रहे, जबकि इस पार वकील बहस में भाग लेते रहे। एक बार में केवल चार वकीलों के लिए ही कुर्सी की व्यवस्था कोर्ट रुम में की गई है। शीशे की दीवार के बीच में पेशकार और स्टेनों के बैठने की व्यवस्था है। बरामदे में अपनी बारी का इंतजार करने वाले वकीलों के लिए कुर्सी की व्यवस्था की गई है।

पूरी तरह बदली पहले की स्थिति

कोरोना काल के पहले जो स्थिति थी, वह पूरी तरह बदल चुका है। कोर्ट में जाने और आने के लिए केवल एक ही रास्ता दिया गया है। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन भी सख्ती से किया जा रहा है। हाईकोर्ट के पश्चिमी मैदान में कुर्सियां भी रखी गई है ताकि वकील वहां बैठ कर कुछ देर आराम कर सकें। पूर्वी गेट को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। गेट नम्बर 4 से किसी को प्रवेश की इजाजत नहीं है। इसके कारण बार काउंसिल भवन के चैम्बर में रहने वाले वकीलों तथा महाधिवक्ता कार्यालय में बैठने वाले सरकारी वकीलों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। क्योंकि बगल के कोर्ट रुम में जाने के लिए उन्हें दो किलोमीटर की दूरी तय करने को बाध्य होना पड़ा।

हर कोर्ट में 25-25 मामलों की सुनवाई

पहली पाली में चीफ जस्टिस और जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की खंडपीठ के साथ ही 11 एकल पीठ में भी सुनवाई हुई। दूसरी पाली में जस्टिस हेमंत कुमार श्रीवास्तव और जस्टिस आर के मिश्रा की खंडपीठ और 10 एकल पीठ ने सुनवाई की। हर कोर्ट में केवल 25-25 मामले की ही सुनवाई हुई, जिसमें जमानत, अग्रिम जमानत और क्रिमिनल अपील के मामले शामिल थे।

शुरुआत में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच कहा सुनी भी हुई। लेकिन थोड़ी देर की अफरा तफरी के बाद ई-पास वाले वकीलों को प्रवेश दिया जाने लगा। प्रवेश द्वार पर सैनिटाइजर और टेम्प्रेचर मशीन की व्यवस्था की गई है।

फरियादी को कोर्ट में आने की नहीं है अनुमति

कोरोना के पहले जहां किसी प्रकार की बंदिश नहीं थी और सबकुछ सहज तरीके से चल रहा था। फरियादी आसानी से कोर्ट परिसर में आकर अपने वकील से मुलाकात कर सकते थे। अपने मुकदमे के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते थे। लेकिन कोरोना काल के इस फिजिकल सुनवाई में किसी भी फरियादी को कोर्ट परिसर में आने की अनुमति नहीं है। कोर्ट में केवल वही वकील आ सकेंगे जिनका मुकदमा सुनवाई के लिए किसी कोर्ट में सूचीबद्ध होगा। इसके लिए भी संबंधित वकील को ई-पास लेना होगा।

न वकालतखाना खुलेगा और न ही कैंटीन

कोरोना काल के पहले और कोरोना काल के दौरान शुरु हो रहे फिजिकल सुनवाई में बहुत बड़ा अंतर साफ दिखाई दे रहा है। कोरोना काल के पहले वकीलों को अपने मुकदमे को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने के लिए चीफ जस्टिस के कोर्ट में अनुरोध करने की छूट थी। लेकिन अब यह सुविधा किसी भी वकील को उपलब्ध नहीं होगा। जिन वकीलों के जितने मुकदमे होंगे, उतने ही ई-पास उन्हें ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। सुनवाई समाप्त होने के साथ ही उन्हें कोर्ट परिसर से निकल जाना होगा। न वकालतखाना खुलेगा और न ही कैंटीन। कोरोना के लिए जारी गाइडलाइंस के मद्देनजर सबको बहुत ही सावधानी के साथ सीमित अवधि के लिए ही प्रवेश की इजाजत मिलेगी।

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