NHAI बैंक फ्रॉड मामला:पटना पुलिस ने आरा में की छापेमारी, 2 संदिग्ध साथ लाई पुलिस

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नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के बैंक अकाउंट से 11.73 करोड़ रुपया के फर्जीवाड़े की कोशिश के मामले में पटना पुलिस की टीम ने भोजपुर जिले में छापेमारी की है। इस छापेमारी को आरा और इसके आसपास के एरिया में अंजाम दिया गया। पटना से गई पुलिस टीम को आरा के रहने वाले सौरभ, सागर, अमृत और सिद्धार्थ की तलाश है। इन्हीं चारों के घर को एक-एक करके खंगाला गया, लेकिन छापेमारी के दौरान ये सभी पुलिस के हाथ नहीं लगे। सभी के सभी फरार मिले। इस कांड में इन सभी का महत्वपूर्ण रोल है।

शुरुआत से ही कहा जा रहा है क 2 जनवरी को RTGS फॉर्म के साथ पकड़ा गया शुभम गुप्ता सिर्फ एक मोहरा था। इन चारों ने सुमित का नाम लेकर उसे कोटक महिंद्रा बैंक के गांधी मैदान ब्रांच में भेजा था। पुलिस की पूछताछ में शुभम ने ही इन चारों शातिरों के नाम को उगला था। अब ये चारों फरार हैं, लेकिन छापेमारी के दौरान दो संदिग्ध हाथ जरूर लगे। दोनों संदिग्धों को आरा से पटना लाया गया है। गांधी मैदान थाना में रखकर उनसे पूछताछ की जा रही है।

सामने आए कुछ मोबाइल नंबर
अब तक की जांच में पुलिस के हाथ कुछ मोबाइल नंबर लगे हैं। आशंका है कि उन मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल फर्जीवाड़े के इस खेल के लिए किया जाता था। एक-एक कर जब सभी मोबाइल नंबरों को खंगाला गया तो इसमें भी एक फर्जीवाड़ा सामने आया। एक भी मोबाइल नंबर के ऑरिजनल कागजात नहीं मिले। सारे नंबर दूसरों के नाम और कागजात पर लिए गए हैं। यह देख मामले की जांच कर रही पुलिस टीम भी हैरान है।

एक नए नाम की हुई एंट्री
इस प्रकरण में अब एक नए नाम की एंट्री हो गई है। ये नया नाम है समीर, जो पुलिस के हाथ नहीं लगा है। लेकिन इसके बारे में पूछताछ के लिए उसके पिता को थाना लाकर डिटेन किया गया है। ये समीर कौन है? क्या करता है? इस प्रकरण में इसका क्या रोल है? पटना पुलिस की तरफ से आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है। मगर, सोर्स की मानें तो यह बात पक्की है कि समीर का रोल मुख्य सरगना की तरह हो सकता है।

10 लोगों से अब तक हो चुकी है पूछताछ
जब से यह मामला सामने आया है, तब से पुलिस की टीम लगातार जांच और पूछताछ में जुटी हुई है। इस मामले का कनेक्शन सिर्फ कोटक महिंद्रा बैंक के अंदर में ही नहीं है, बल्कि इसके तार दूसरे बैंक से भी जुड़ चुके हैं। कनेक्शन ICICI बैंक से भी जुड़ चुका है। पुलिस दोनों ही बैंकों के बोरिंग रोड ब्रांच को खंगाल चुकी है। इस केस में अब तक 10 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। इसमें बैंक के कुछ सीनियर अधिकारी भी शामिल हैं।

जिला भू-अर्जन के कुछ स्टाफ हैं गायब
एक आश्चर्य वाली बात यह सामने आई है कि 11.73 करोड़ रुपए का मामला सामने आने के बाद से जिला भू-अर्जन विभाग में पोस्टेड कुछ स्टाफ ऑफिस ही नहीं आ रहे हैं। इस मामले में इनकी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। जांच कर रही पुलिस की टीम ऑफिस नहीं आ रहे स्टाफ के ऊपर है। एक-एक कर सबकी पहचान की जा रही है। हालांकि रविवार को इस मामले पर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी पंकज पटेल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कुछ स्टाफ का ट्रांसफर हो गया है। वहीं ऑफिस नहीं आ रहे हैं, उन्होंने अपना चार्ज भी सौंप दिया है।

अलग-अलग दो टीम कर रही है काम
इस केस में पुलिस की जांच दायरा बढ़ता जा रहा है। पुलिस अपने स्तर पर जांच कर रही है और कोटक महिंद्रा बैंक की टीम अपने स्तर पर। बैंक के इंटरनल जांच में ही फर्जी तरीके से तीन बार के सक्सेसफुल ट्रांजेक्शन की बात सामने आ चुकी है। इसके तहत पहले ही 28 करोड़ रुपए निकाले जा चुके हैं। अब यह मामला और भी बड़ा होता जा रहा है। यही वजह है कि इस के जांच और संदिग्धों से पूछताछ के लिए दो टीम अलग-अलग तरीके से काम कर रही है। इसमें एक टीम गांधी मैदान थानेदार की है तो दूसरी केस के इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर की।

ब्रेन स्ट्रोक के कारण सुमित का चल रहा है इलाज
कोटक महिंद्रा बैंक के बोरिंग रोड ब्रांच के मैनेजर सुमित को पूछताछ के लिए पुलिस ने अपने कब्जे में लिया था। शनिवार को उसकी तबियत पूछताछ के दौरान ही बिगड़ गई थी। अब पता चला है कि उसे ब्रेन स्ट्रोक हुआ था। बेली रोड के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में उसका इलाज चल रहा है। पुलिस का मानना है कि सुमित के पास इस मामले में काफी सारी जानकारी है पर जब तक उसकी हालत सही नहीं हो जाती है तब तक उससे पूछताछ नहीं हो सकती है।

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