पटना: कैबिनेट ने राजस्व विभाग में 3883 नए पद बढ़ाए, पटना में डीजल ऑटो सितंबर तक चलेंगे

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बिहार कैबिनेट की आज हो रही बैठक खत्म हो गई है। इस बैठक में कुल 14 एजेंडों पर मुहर लगाई गई है। सबसे बड़ी बात यह है कि कैबिनेट ने बिहार में रोजगार सृजन का सिलसिला जारी रखा है। इस बार भी राजस्व व भूमि सुधार विभाग में 3883 पदों के सृजन को मंजूरी मिली है। इसमें विभिन्न कोटि के पद शामिल हैं। इसके अलावा राजधानी पटना में वायु प्रदूषण पर रोकथाम के लिए डीजल से चलने वाले ऑटो पर रोक लगाने की तारीख को आगे बढ़ा दिया गया है।

इन 3883 पदों पर होगी बहाली

कैबिनेट ने बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में 3883 पदों पर बहाली के एजेंडे पर मुहर लगाई है। जिन पदों पर बहाली होनी है, उनमें अधिकतर पद डाटा एंट्री ऑपरेटरों के हैं।

  • सिस्टम एनालिस्ट – 1
  • प्रोगामर – 5
  • डाटा एंट्री ऑपरेटर के कुल 139 पद : प्रति जिला – 1 और प्रति अनुमंडल – 1
  • डाटा एंट्री ऑपरेटर ग्रेड A के कुल 3738 पद : प्रत्येक अंचल कार्यालय में 7 पद होंगे।

डीजल ऑटो चालकों को बड़ी राहत

राजधानी पटना में डीजल ऑटो चालकों को बड़ी राहत मिली है। पटना नगर निगम, दानापुर, खगौल और फुलवारीशरीफ नगर परिषद में अब 30 सितंबर 2021 तक डीजल ऑटो चलेगा। डीजल ऑटो चालकों ने तारीख बढ़ाने के लिए गुहार लगाई थी। नवंबर 2019 में जारी आदेश के अनुसार पटना नगर निगम में डीजल ऑटो बंद होने की तारीख 31 जनवरी 2021 तथा अन्य इलाकों में 31 मार्च 2021 थी।

कैबिनेट ने अन्य जो फैसले लिए हैं, वे हैं :

  • सभी जिला एवं अनुमंडल अस्पतालों में एडमिट होने वाले पेशेंट को अच्छे भोजन के लिए जीविका की मदद ली जाएगी। जीविका द्वारा चलाई जा रही ‘दीदी की रसोई’ के द्वारा इन अस्पतालों में भर्ती रोगियों को खाना उपलबध कराया जाएगा।
  • जल जीवन हरियाली अभियान के अंतर्गत नए बने जलाशयों की रखवाली और प्रबंधन का काम अब जीविका करेगी।
  • वित्तीय वर्ष 2020-21 में मुख्यमंत्री पेयजल निश्चय योजना के लिए 300 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।

क्या है ‘दीदी की रसोई’

विश्व बैंक के सहयोग से चलनेवाली योजना ‘बिहार लाइवलिहुड प्रोजेक्ट’, यानि जीविका की तरफ से ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को कैटरिंग की खास ट्रेनिंग देकर एक प्रोफेशनल कैटरर की तरह तैयार किया गया है। ये दीदियां वैशाली, बक्सर, गया और पूर्णिया के सदर अस्पतालों में सफलता से कैंटीन चला रही हैं। इस कैंटीन के लिए इन्हें जीविका की तरफ से आधारभूत संरचना तैयार कर दी गई है, जबकि रॉ मेटेरियल ये अपने सहयोग से लाती हैं।

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