रूपेश हत्याकांड में सुराग: 13 करोड़, 3 बाइक-6 अपराधी, UP का सिम, बेगूसराय का शूटर

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मंगलवार की शाम सचिवालय से 500 मीटर दूर पुनाईचक के शंकर पथ में इंडिगो के स्टेशन हेड रुपेश सिंह की हत्या को लेकर पुलिस की विशेष जांच टीम 5 लाइन पर आगे बढ़ रही है। सभी लाइन जिस एक सिरे पर मिल जाएंगे, वहीं अपराधी की पहचान भी हो जाएगी और उस तक पहुंच भी बन सकती है। इन्वेस्टिगेशन में 5 प्वाइंट्स के अलावा एक छठा प्वाइंट भी निकाला है, जिसके कारण रुपेश सिंह को मंगलवार शाम टारगेट करना सुपारी किलरों के लिए थोड़ा आसान रहा। बड़ी बात इसमें यह है कि हत्याकांड को अंजाम देने में प्रदेश के बेगूसराय से UP के गाजीपुर तक का कनेक्शन जुड़ रहा है।

मर्डर के 5 सुराग कैसे पहुंचाएंगे किलर तक, समझें ऐसे-
1. टेंडर दिलाने को 13 करोड़ लेकर समाजसेवा कर गए रुपेश

वारदात के बाद से लेकर अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि बिजली से जुड़े काम के लिए टेंडर दिलाने के नाम पर रुपेश ने करीब 13 करोड़ रुपए लिए थे। ये रुपए किसी एक के नहीं, बल्कि तीन-चार लोगों से लिए गए थे। हालांकि रुपेश उन लोगों को टेंडर दिलवा नहीं पाए। क्योंकि करीब आधी रकम उन्होंने सोशल वर्क में खर्च कर दिए। छपरा के जलालपुर और उसके आसपास के इलाके 2018-19 की बाढ़ में डूब गए थे। टेंडर के नाम पर मिले रुपयों से ही उन्होंने पीड़ितों की मदद की थी। उनकी इच्छा मढ़ौरा से विधानसभा चुनाव लड़ने की थी। इसी वजह से वो सोशल वर्क को लेकर काफी एक्टिव थे।

2. 3 बाइक पर 6 आए, 2 गली के बाहर, 4 टारगेट तक आए
हत्या के तुरंत बाद यह कहा गया था कि अपराधियों की संख्या दो थी, जो पहले से घात लगाए थे। जब बुधवार को एयरपोर्ट से लेकर पुनाईचक और शंकर पथ तक में लगे सभी CCTV कैमरा को पुलिस की विशेष जांच टीम ने खंगाला तो कुछ अहम सुराग हाथ लगे। जांच में अब यह बात सामने आई कि अपराधियों की कुल संख्या 6 थी। ये सभी तीन बाइक से आए थे। हर एक बाइक पर दो अपराधी थी। इनमें से एक बाइक पर सवार दो अपराधी मेन गली के मोड़ पर ही रूक गया था। जबकि, दो अलग-अलग बाइक पर 4 अपराधी शंकर पथ के अंदर गए। इनमें से एक बाइक से दो अपराधी रुपेश के कार तक गए और बैक टू बैक गोली मारकर फरार हो गए। जांच टीम के हाथ वारदात स्थल से गोली का 6 खोखा भी लगा है। एक बात यह भी पक्की हो गई है कि एयरपोर्ट से ही रुपेश की निकलने की जानकारी अपराधियों को दी गई थी।

3. टावर डम्प में मिला UP ईस्ट का सिम
अपनी जांच के क्रम में पुलिस की विशेष टीम ने वारदात स्थल और उसके आसपास के टावर लोकशनों को खंगाला। टावर कनेक्ट हुए मोबाइल नंबरों की पहचान की गई। इसमें एक मोबाइल नंबर संदिग्ध पाया गया है, जो उत्तर प्रदेश का है। सिमकार्ड वोडाफोन कंपनी का था और नंबर उत्तर प्रदेश ईस्ट का था। सिमकार्ड के जरिए कनेक्शन सीधे गाजीपुर से जुड़ रहा है। संदिग्ध मोबाइल नंबर किसका है? वारदात के वक्त वो नंबर पटना में क्यों एक्टिव था? उसका इस्तेमाल कौन कर रहा था? इसकी पड़ताल अभी जारी है। दूसरी तरफ एक टीम रुपेश के कॉल डिटेल्स की भी जांच कर रही है।

4. पुलिस के राडार पर बेगूसराय का शूटर
पुलिस के रडार पर बेगूसराय का एक शूटर भी आया है। जिसका कनेक्शन पटना के एक लड़की से होने की आशंका है। दरअसल, यह बात सामने आई है कि बेली रोड के एक इलाके की रहने वाली लड़की को अक्सर रुपेश सिंह के साथ देखा जाता था। कई बार रुपेश उसे घर तक छोड़ने भी गए थे। हालांकि इन दोनों के बीच किस तरह का कनेक्शन है? यह बात स्पष्ट नहीं है। लड़की हाइप्रोफाइल है और कई बड़े लोगों उसकी भी पहचान है। पुलिस की टीम इस प्वाइंट पर भी जांच कर रही है।

5. 200 से पूछताछ, किसी ने नहीं, मगर CCTV ने देखा
एयरपोर्ट से लेकर शंकर पथ स्थित घर, छपरा के जलालपुर स्थित पुश्तैनी घर से लेकर गोपालगंज तक पुलिस की अलग-अलग कई टीम जांच, पूछताछ और अपराधियों की पहचान कर गिरफ्तारी के लिए लगी हुई है। मंगलवार की रात से लेकर अब तक करीब 200 लोगों से रुपेश सिंह की हत्या को लेकर पूछताछ की जा चुकी है। इसमें करीब 60 से 70 लोग एयरपोर्ट पर तैनात स्टाफ हैं। इसके साथ ही शंकर पथ के पास चाय दुकानदार नरेश भी शामिल है। हालांकि इन सभी से पूछताछ में कोई ठोस सुराग जांच टीम के हाथ नहीं लगा। जो कुछ भी कैद हुआ वो CCTV में ही हुआ।

6ठा प्वाइंट : उस शाम बच्चे नहीं खेल रहे थे, यहीं मिला ‘खेल’ का मौका

एक चौंकाने वाली बात आज सामने आई है। रुपेश सिंह की हत्या की पटकथा काफी दिनों से चल रही थी। जांच में पता चला है कि अपराधी बीते दो सप्ताह से हत्या की वारदात को अंजाम देने के लिए रेकी कर रहे थे। मगर, प्लानिंग को अंजाम तक पहुंचाने के लिए उन्हें मौका नहीं मिल रहा था। कुसुम विलास अपार्टमेंट के बाहर बच्चे हर दिन क्रिकेट खेलते थे। इस कारण अपराधियों को मौका नहीं मिल रहा था। फिर रुपेश भी अपनी फैमिली के साथ गोवा घूमने चले गए थे। रविवार को रुपेश वापस पटना आ गए थे। मंगलवार की शाम गली में बच्चे न तो क्रिकेट खेल रहे थे और न ही अपार्टमेंट का गार्ड वहां था। इस कारण उस शाम अपराधियों को पूरा मौका मिल गया। रुपेश की हत्या कर अपराधी आर ब्लॉक-दीघा रोड से फरार हो गए।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक हत्या की वजह क्या है, इसे जानने के लिए कई एंगल पर काम हो रहा है। संपत्ति, सर्किल और एयरपोर्ट समेत तमाम संभावित वजहों पर काम चल रहा है। जांच कई बिंदुओं पर जारी है। उनके जानने वाले लोगों से भी पूछताछ की तैयारी है। रूपेश के करीबियों की सूची तैयार की जा रही है। अंतिम संस्कार करने गांव गए परिजनों के पटना लौटने का इंतजार है। उनके पटना आने के बाद पुलिस रूपेश कुमार की हत्या की वजहों को जानने का प्रयास करेगी।

पटना पुलिस की एसआईटी और एसटीएफ की स्पेशल इंटेलिजेंस ग्रुप (एसआईजी) डंप डाटा को खांगलने में जुटी है। घटनास्थल (पुनाईचक) के साथ ही एयरपोर्ट तक के रूट के कई मोबाइल टावरों का डंप डाटा निकाला गया है। डंप डाटा के जरिए वैसे मोबाइल नम्बर की तलाश की जा रही है, जो एयरपोर्ट से लेकर पुनाईचक तक रूपेश के आने के वक्त एक्टिव थे। इस काम में कई विशेषज्ञ पुलिसवालों को लगाया गया है।

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