NHAI फर्जी RTGS मामला: कहीं मामले को दबाने की तो नही हो रही कोशिश, लॉकडाउन में कोटक महिंद्रा बैंक में हो रहा था फर्जीवाड़ा

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कोटक महिंद्रा बैंक में फर्जी डॉक्यूमेंट जमा कर एनएचएआई के खाते से पैसे निकासी का खेल कई महीनों से चल रहा था। लॉकडाउन के समय जब पब्लिक घरों में बंद थी तब भी फर्जीवाड़ा हुआ और जब राज्य में चुनाव चल रहा था तब भी शातिरों ने जालसाजी की। 8 दिसंबर 20 का एनएचएआई का एक कवरिंग लेटर पुलिस को मिला है जिसमें लिखा हुआ है कि हमारे स्टाफ चुनाव में व्यस्त हैं आप आरटीजीएस कर दें।

पुलिस को बैंक ने बताया कि नवंबर तक की जांच हो गई है और 28 करोड़ के आसपास का फर्जी आरटीजीएस हुआ है। जबकि सूत्रों की मानें तो कोटक महिंद्रा बैंक में नवंबर के पहले से ही फर्जीवाड़ा चल रहा था। नवंबर और दिसंबर में मोटी रकम का आरटीजीएस हुआ है। इस खेल में एग्जीबिशन रोड के कई बैंककर्मी शामिल हैं। सिर्फ नवंबर और दिसंबर में 10 करोड़ से अधिक का फर्जी आरटीजीएस विभिन्न खातों में हुआ है।

एक ट्रेडिंग कंपनी के खाते में दो करोड़ का आरटीजीएस
उपलब्ध कागजातों की माने तो सिर्फ दो महीने में ही दस करोड़ से अधिक का फर्जी आरटीजीएस कोटक महिंद्रा बैंक की एग्जीबिशन रोड शाखा से हुआ है। 5 दिसंबर 2020 को एग्जीबिशन रोड शाखा से दो करोड़ का फर्जी आरटीजीएस पटना के एक ट्रेडिंग कंपनी के खाते में हुआ है।

वहीं 27 नवंबर 20 को 5.35 करोड़ का फर्जी आरटीजीएस मोहन अलंकार ज्वेलर्स के खाते में हुआ। 9 दिसंबर 20 को करोड़ों का फर्जी आरटीजीएस अभिषेक नाम के व्यक्ति के खाते में हुआ। अभिषेक का खाता उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक के खाते में हुआ है।

किस दबाव में पटना पुलिस, 12 दिन बाद भी आगे नहीं बढ़ी जांच, गिरफ्तारी भी नहीं

जांच की गति को देखें तो पुलिस दबाव में नजर आ रही है। 2 जनवरी को गांधी मैदान थाने में मामला दर्ज हुआ। उस दिन पुलिस एक जालसाज शुभम गुप्ता को बैंक से ही गिरफ्तार की थी। तब मामला 11.73 करोड़ का ही था। फिर मामला बढ़कर 28 करोड़ का हो गया।

पुलिस बैंक के बोरिंग रोड ब्रांच मैनेजर सुमित सिंह को गिरफ्तार की। मामला दर्ज होने के 12 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस किसी अन्य बैंक अधिकारी या कर्मी को गिरफ्तार नहीं कर सकी। अब सवाल उठता है कि क्या सिर्फ शुभम गुप्ता और सुमित सिंह ने ही 28 करोड़ का फर्जीवाड़ा कर लिया?

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