सासाराम: रेलकर्मी ने आत्महत्या से पहले लिखा सुसाइड नोट, JDU नेता और उनके गुर्गों और अपने सहकर्मी पर लगाया आरोप

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सासाराम में एक रेलकर्मी धनंजय कुमार ने अपने रिश्तेदार के कमरे में फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया है। धनंजय रेलवे में कार्य सहायक पद पर खगड़िया में कार्यरत था। शनिवार को खगड़िया से सासाराम आया था। कुमार ने खुदकुशी से पहले 5 पेज का सुसाइड नोट लिखा है, जिसमें 5 लोगों को इसके लिए दोषी ठहराया है। सुसाइड नोट के मुताबिक बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान एक राजनीतिक न्यूज पर उसने कोई कमेंट लिखा था। इस कमेंट पर लखीसराय के एक जदयू नेता सत्यनारायण महतो ने अश्लील टिप्पणी की। इसके बाद उन्होंने अपना कमेंट डिलिट कर दिया। फिर मैसेज के जरिए सत्यनारायण महतो से माफी मांग ली। लेकिन इसके बाद भी उसे लगातार परेशान किया जाता रहा। धनंजय ने लोकल पुलिस थाने से लेकर एसपी कार्यालय तक भागदौड़ की। आखिर में बेबस होकर सुसाइड करना ही एकमात्र विकल्प दिखा। धनंजय ने जो सुसाइड नोट लिखा है, उसके अनुसार खुदकुशी के लिए उकसाने और दबाव बनाने में 5 कैरेक्टर सामने आ रहे हैं।

कैरेक्टर1 – जदयू नेता, जिसने कमेंट को बनाया मुद्दा

सुसाइड नोट के मुताबिक माफी मांगने के बाद जदयू नेता सत्यनारायण महतो ने सासाराम के जदयू नेताओं से संपर्क किया। जदयू नेता ने अन्य लोगों के साथ मिलकर मेरे मोबाइल पर पूरी तरह से हैकर्स का कब्जा करवा दिया। इस हैकिंग का उद्धेश्य मेरी नौकरी खत्म कर मुझे क्राइम में धकेलना था। इसके अलावा मोबाइल में जमा नौकरी से संबंधित सभी जानकारी ले ली गई।

कैरेक्टर 2 – मोबाइल हैकिंग में दिया साथ

सोनू उर्फ नीतीश, सासाराम के महारनिया गांव का रहनेवाला है। मृतक ने सुसाइड नोट में इसे जदयू का छात्र नेता बताया है। रेलकर्मी धनंजय को आर्थिक और मानसिक तौर पर परेशान करने में इसका भी नाम है। सुसाइड नोट में मृतक ने मोबाइल को हैक कराने में भी इसका हाथ बताया है। साथ ही बैंक अकाउंट, आधार, पैन कार्ड और मेल से गलत कार्य करने का आरोप लगाया है।

कैरेक्टर 3 – मानसिक दबाव देने में शामिल

धनंजय ने सुसाइड नोट में तीसरा नाम धर्मेंद्र का लिया है। धर्मेंद्र भी सोनू के साथ मिलकर रेलकर्मी को मानसिक दबाव दे रहा था। सुसाइड नोट के मुताबिक मानसिक, आर्थिक और सामाजिक तौर पर प्रताड़ित करने में धर्मेंद्र का भी हाथ है।

कैरेक्टर 4 – सहकर्मी ने ही दी गोपनीय जानकारी

सुसाइड नोट में धनंजय ने चौथा कैरेक्टर अपने सहकर्मी धीरेंद्र कुमार को बताया है। वो खगड़िया के सरकारी आवास E/73A में ही रहता था। सुसाइड नोट के मुताबिक धनंजय को संदेह था कि उसके मोबाइल पासवर्ड के अलावा जीमेल का पासवर्ड भी धीरेंद्र जान गया था। इसके बाद धनंजय ने मोबाइल का सिक्योरिटी पासवर्ड भी बदला था और नोट कर पर्स में रख दिया था। लेकिन सहयोगी धीरेंद्र ने जासूसी की और सारी जानकारी बाकी के दोषियों को दे दिया।

कैरेक्टर 5 – मोबाइल हैकिंग का मुख्य आरोपी

धनंजय कुमार ने सुसाइड के लिए हैकर्स को भी जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा है कि हैकर्स उनके डॉक्यूमेंट के जरिए साइबर क्राइम को अंजाम दे सकते हैं। बैंक अकाउंट, आधार नंबर, पैन नंबर मोबाइल के ही एक ऐप में है। हैकर्स इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

​​पुलिस नहीं कर पाई मदद

सुसाइड नोट के मुताबिक रेलकर्मी मदद मांगने के लिए पुलिस स्टेशन भी गया था। इस शिकायत को लेकर सासाराम टाउन थाना गया था। लेकिन, अधिकारी नहीं थे। फिर लोकल थाना दनिगांव गया। वहां, सिम और बैक अकाउंट बंद कराने की सलाह देकर भेज दिया गया। फिर डेहरी ऑन सोन में एसपी ऑफिस गया। वहां रविवार को वे मौजूद नहीं थे। इसके बाद सीसीटीवी के सामने कुछ देर के लिए खड़ा रहा। फिर खुद को लाचार, बेबस समझ आत्महत्या करने का निर्णय कर लिया।

क्या कहते हैं परिजन

सुसाइड के इस मामले में पुलिस की ओर से मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। मृतक के परिजनों का कहना है कि बीते वर्ष विधानसभा चुनाव के दौरान धनंजय ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक पार्टी से जुड़े नेताओं व पार्टी के लोगों पर टिप्पणी की थी। इसके बाद नेताओं ने धनंजय पर टिप्पणी को डिलिट करने और माफी मांगने का दबाव भी बनाया था। इस पर धनंजय ने चार लाइन की माफी भी सोशल मीडिया पर लिख कर मांग ली थी। इसके बावजूद धनंजय को परेशान किया जा रहा था। इस वजह से उसने फांसी लगाकर जान दे दी। मृतक के परिजन इस मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं, पुलिस ने पांच पन्ने के सुसाइड नोट को अपने कब्जे में ले लिया है। साथ ही शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

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