रुपेश के परिवार को नहीं पच रही पुलिस की बात, कहा- रोड रेज तो रोज होता है, मामूली सी बात पर किसी का मर्डर नहीं होता

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रूपेश हत्याकांड में पटना पुलिस के खुलासे से परिवार संतुष्ट नहीं है. हत्या की वजह जो पुलिस बता रही है उसे परिवार वालों ने नकार दिया है. एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में मृतक रूपेश के भाई नंदेश्वर सिंह ने कहा कि पटना पुलिस ने पूरे मामले की जांच सही तरीके से नहीं की. हत्या की जो वजह पुलिस बता रही है वो रूपेश के नेचर से मेल नहीं खा रहा.

नंदेश्वर सिंह ने पुलिस के उस बात को भी नकार दिया जिसमें कहा जा रहा है कि लोजपा कार्यालय के पास आरोपी और रूपेश सिंह के बीच तीखी बहस हुई थी. इस दौरान रूपेश सिंह ने गाड़ी से उतरकर आरोपी को थप्पड़ जड़ दिया था. परिवार वालों की माने तो रूपेश काफी सॉफ्ट नेचर के इंसान थे. वो कभी भी किसी से ऊंची आवाज में बातें नहीं करते और ना ही किसी पर आजतक थप्पड़ चलाया हो. ऐसे में पुलिस के इस बात पर यकीन नहीं किया जा सकता है. परिजनों ने पटना पुलिस से रोडरेज का सबूत की मांग की है.

बता दें कि  इंडिगो के स्टेशन हेड रूपेश सिंह की हत्या का खुलासा करते हुए एसएसपी उपेन्द्र शर्मा ने कहा कि हत्या एक बाइक चोर ने अपने 3 साथियों के साथ मिलकर की थी. हत्या के मुख्य आरोपी रितुराज को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. जिसने पूछताछ में सारी बातें कबूल कर ली है.

एसएसपी ने बताया कि नवंबर में एयरपोर्ट के पास ही चोरी की बाइक से जाते समय आरोपी और रुपेश की कार से इसकी बाइक टकराई थी. इस टक्कर में आरोपी और रुपेश सिंह के साथ हुई बहस को चोर ने दिल पर ले लिया और बाइपास पर फोर्ड हॉस्पिटल के नजदीक कन्हाई नगर में इस हत्या की साजिश रची. मारपीट के बाद 4-5 दिन तक राजवंशी नगर इलाके में घूमता रहा. वारदात से पहले चार बार आरोपी और उसके दोस्तों ने पीड़ित को मारने का प्रयास किया.

एसएसपी ने बताया कि 4 बार अटेम्प्ट में पहली बार पुनाईचक चक, दूसरी बार घर के पास टर्निंग पर, इसके बाद एक दिन गाड़ी घर में खड़ी थी तब, लेकिन पुलिस रहने की वजह से हत्या को अंजाम नहीं दे सका. इसका खुलासा सीसीटीवी से हुआ है.

एसएसपी उपेन्द्र शर्मा ने बताया कि रुपेश सिंह मर्डर केस में अब तक टेंडर, रोडरेज, प्रेम-प्रसंग, एयरपोर्ट पार्किंग विवाद जैसे एंगल सामने आ चुके हैं. पुलिस मुख्यालय ने इस केस की जांच में स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम को लगाया था. इसके अलावा स्पेशल टास्क फोर्स, क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट के साथ साक्ष्यों पर काम के लिए फॉरेंसिंक टीम को भी लगाया गया था.

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