शिक्षा के सैद्धांतिक तथा व्यावहारिक पहलुओं के बीच संतुलन महत्वपूर्ण-*प्रो. नागेन्द्र सिंह

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नई शिक्षा नीति (एनईपी) – 2020 के सन्दर्भ में देश की शिक्षा व्यवस्था में कई सुधारों की बात कही गई है जो आज के परिदृश्य में काफी प्रासंगिक एवं महत्वपूर्ण हैं | अध्यापक शिक्षा के सैद्धांतिक तथा व्यावहारिक पहलुओं के बीच की खाई को पाटने का प्रयास करने की आवश्यकता है साथ-ही-साथ स्कूली शिक्षा में होने वाले परिवर्तनों को अध्यापक शिक्षा में शामिल करते हुए ही एक सुदृढ़ शिक्षा व्यवस्था के विकास की परिकल्पना की जा सकती है | ये बातें प्रो. नागेन्द्र सिंह, डीन रिसर्च क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान अजमेर ने दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के स्कूल ऑफ एजुकेशन (शिक्षा पीठ) द्वारा आयोजित तीन-दिवसीय कार्यशाला के समापन समारोह में कही | जन संपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मो० मुदस्सीर आलम ने बताया कि शिक्षा पीठ द्वारा  ‘फ्यूचर टीचर एजुकेशन प्रोग्राम इन इंडिया’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी के मुख्य वकता के रूप में प्रो. नागेन्द्र सिंह ने एनईपी – 2020 के सन्दर्भ में अपने विचार साझा किए | उन्होंने कहा कि पहली बार शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षण संरचना एवं अध्यापक शिक्षा से सम्बंधित सुधार को इंगित किया गया है | वहीं शिक्षणशात्र के ज्ञान साथ- साथ विषयवस्तु की अच्छी समझ भी एक शिक्षक के लिए महत्वपूर्ण है |  

संगोष्ठी के अंतिम सत्र में जुड़े मुख्य अतिथि  प्रो. नागेन्द्र सिंह का स्वागत इंटरनल क्वालिटी असियूरन्स सेल (आईक्यूएसी) के समन्वयक प्रो. वेंकेटेश द्वारा किया गया | वहीँ कार्यशाला के प्रथम सत्र में शिक्षा पीठ के अधिष्ठाता एवं शिक्षक- शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. कौशल किशोर ने शिक्षक- शिक्षा पाठ्यक्रम के एकीकृत मॉडल में निहित दर्शन, इसके प्रकार, अंतराष्ट्रीय एकीकृत मॉडल के स्वरुप तथा इस मॉडल में आने वाले प्रशासनिक बाधाओं पर विस्तृत चर्चा की |  डॉ० तपन कुमार बसंतिया ने प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षक-शिक्षा प्रशिक्षण में शिक्षकों को सैद्धांतिक तथा अनुशासत्मक ज्ञान के साथ साथ व्यवहारात्मक ज्ञान एवं कौशल भी अत्यंत आवश्यक हैं | सत्र की अध्यक्षता डॉ. प्रज्ञा गुप्ता ने की जिसमें उन्होंने प्रतिभागियों के साथ एकीकृत मॉडल को समृद्ध बनाने हेतु विभिन्न संरचनात्मक सुधार एवं राष्ट्रीय सेवा योजना को सम्मिलित करने का सुझाव प्रस्तावित किया | 

तीन – दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन  शिक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा अनुमोदित पंडित मदन मोहन मालवीय नेशनल मिशन ऑन टीचर एंड टीचिंग योज़ना के तत्वाधान में किया गया था |  कार्यशाला के अन्य मुख्य वक्ताओं क्रमशः प्रो. पी. सी अग्रवाल, प्रिंसिपल, क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, भुवनेश्वर, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो. सुनील कुमार सिंह तथा डॉ. रविकांत, एसोसिएट प्रोफेसर, शिक्षक शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा निति – 2020 के सन्दर्भ में अपने विचार साझा किए |   समापन सत्र का अध्यक्षीय सम्बोधन मालवीय मिशन, शिक्षा विद्यापीठ की नोडल ऑफिसर प्रो. रेखा अग्रवाल ने दिया |  कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ तरुण कुमार त्यागी, डॉ. नृपेन्द्र,  डॉ. संदीप कुमार एवं डॉ मनीष कुमार गौतम आदि ने अहम भूमिका निभाई | कार्यशाला की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद समन्वयक डॉ. तरुण कुमार त्यागी ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के साथ – साथ आयोजन मंडल में शामिल प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को धन्यवाद कहा |

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