मुंबई: होटल में दादरा और नगर हवेली के सांसद की बॉडी और गुजराती में लिखा सुसाइड नोट मिला

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दादरा और नगर हवेली से लोकसभा सदस्य मोहन डेलकर दक्षिण मुंबई के एक होटल में मृत पाए गए हैं। उनका शव मरीन ड्राइव पर होटल सी ग्रीन में मिला। पुलिस को उस कमरे से गुजराती में लिखा एक सुसाइड नोट भी मिला है। उनके शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।

डेलकर की उम्र 58 साल थी। 2019 में वे केंद्र शासित दादरा और नगर हवेली से बतौर निर्दलीय सांसद चुने गए। 1989 में अब तक वे भाजपा, कांग्रेस, भारतीय नवशक्ति पार्टी के उम्मीदवार और निर्दलीय के तौर पर 7 बार लोकसभा के लिए चुने जा चुके थे। उन्होंने 1989 से 2004 तक लगातार 6 बार लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। डेलकर के परिवार में पत्नी कलाबेन डेलकर, दो बच्चे अभिनव और दिविता हैं।

ट्रेड यूनियन लीडर के रूप में करियर शुरू किया
मोहन डेलकर का जन्म 1965 में सिलवासा में हुआ था। डेलकर ने सिलवासा में ट्रेड यूनियन लीडर के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। वे अलग-अलग कारखानों में काम करने वाले आदिवासी लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाया करते थे। इसके बाद 1995 में उन्होंने आदिवासी विकास संगठन बनाया और 1989 में दादरनगर हवेली से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नौवीं लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीते भी। इसके बाद 1991 और 1996 में वे कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने।

1998 में भाजपा से सांसद बने
डेलकर ने 1998 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। कुछ समय बाद उन्होंने भाजपा छोड़ दी और 1999 में निर्दलीय और 2004 में भारतीय नवशक्ति पार्टी के उम्मीदवार के रूप में जीते। इसके बाद 4 फरवरी 2009 को दोबारा कांग्रेस में शामिल हुए और 10 साल बाद यानी 2019 में कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद फिर से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लोकसभा सदस्य बने। इसके बाद अक्टूबर 2020 में डेलकर JDU में शामिल हो गए थे।

गृह मंत्रालय की कमेटी में मिली थी जगह
डेलकर को गृह मंत्रालय की परामर्श कमेटी में नियुक्त किया गया था। गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बनी इस कमेटी में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 28 सांसदों को जगह दी गई थी। 17वीं लोकसभा के 15 वरिष्ठ सांसदों की सूची में रामविलास पासवान के बाद उनका नाम दूसरे नंबर पर था।

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