मैथिली भाषा की अनदेखी का मामला विधानसभा में उठा, मिथिलांचल में फिर से शुरू हो पढ़ाई

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बिहार विधानसभा में आज मैथिली भाषा की अनदेखी का मामला मिथिलांचल से आने वाले विधायकों ने उठाया. विधानसभा में ध्यानाकर्षण के जरिए बीजेपी विधायक संजय सरावगी समेत अन्य विधायकों ने सरकार से यह मांग की कि मिथिलांचल के इलाके में मैथिली भाषा की पढ़ाई जल्द शुरू की जाएगी. संजय सरावगी ने कहा कि संविधान की अनुसूची में मैथिली भाषा शामिल नहीं थी, उस वक्त मिथिलांचल में मैथिली की पढ़ाई होती थी लेकिन अब जब अष्टम अनुसूची में मैथिली शामिल है, उसके बावजूद राज्य में मैथिली की पढ़ाई नहीं हो रही है.

ध्यानाकर्षण सूचना के जवाब में शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि मैथिली भाषा के विकास के लिए राज्य सरकार संकल्पित है. हम लगातार व्याख्याताओं की नियुक्ति मैथिली भाषा के लिए भी कर रहे हैं. मैथिली अकादमी के द्वारा पुस्तकें भी प्रकाशित की जा रही हैं. मैथिली पांडुलिपियों को संरक्षित करने का काम भी किया गया है.

सरकार के जवाब के बाद विधानसभा में संजय सरावगी ने कहा कि यह जरूरी है कि मिथिलांचल के इलाके में प्राथमिक विद्यालयों में मैथिली भाषा की पढ़ाई शुरू की जाए. एक वक्त था जब मैथिली भाषा को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था. 50 नंबर का एक पेपर मैथिली भाषा का परीक्षाओं में हुआ करता था लेकिन आज ऐसा नहीं है. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. संजय सरावगी ने कहा कि यह मामला भावनात्मक तौर पर भी मिथिला के साथ जुड़ा हुआ है.

जवाब में शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि संविधान की अष्टम अनुसूची में मैथिली अगर शामिल है तो इसके लिए पूर्व से ही लोग जागरूक रहे हैं. विजय कुमार चौधरी ने कहा कि मैथिली का इतिहास बहुत पुराना रहा है, मैथिली की अपनी लिपि रही है.

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