बक्सर: किसान पिता ने लॉकडाउन में बच्चों को दी बंदूक चलाने की ट्रेनिंग, बने स्टेट चैंपियन

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निगाहों ने इरादा क्या बदला, चमन की फिजा ही बदल गयी। ट्रिगर पर उंगलियां तो हमेशा की तरह ही चलती रहीं। इस बार निशाना बदल गया। पेशे से किसान सर्वजीत बहादुर सिंह ने वह कर दिखाया। जो एक पिता का सपना होता है। उन्होंने लॉक डाउन में अपने बच्चों को रायफल और पिस्टल चलाने की बारीकी सिखाई। घर में ही शूटिंग रेंज बनाकर टारगेट हिट करने का गुर सिखाया।

बक्सर जिले के बगेन के रहने वाले सर्वजीत के दोनों बेटे राजवीर और शिवांशु ने स्टेट लेवल रायफल एसोसिएशन द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में ओवरऑल चैंपियन का खिताब जीता है। राजवीर वाराणसी में इंटरमीडिएट और शिवांशु नवीं के स्टूडेंट हैं।

दोनों बच्चों ने बिहार स्टेट लेवल फायरिंग चैंपियनशिप में 7 गोल्ड मेडल, 10 सिल्वर मेडल और एक ब्रॉन्ज मैडल जीतकर एक नई इबारत लिख डाली है। दोनों कहते हैं कि वे ओलंपिक में गोल्ड मैडल जीतना चाहते हैं। इसके लिए जी-तोड़ परिश्रम करेंगे।

लॉकडाउन में खेल नहीं पा रहे थे बच्चे, तो पिता ने करवाई ट्रेनिंग

लॉकडाउन के दौरान स्कूल बंद हुए तो बच्चे गांव आ गए। बच्चों को खेलकूद का मौका नहीं मिल रहा था, तो किसान पिता सर्वजीत सिंह ने रायफल (एयर गन) चलाने की ट्रेनिंग दी। शूटिंग के लिए 2 लाख रुपये का एयर पिस्टल मंगवाया।

अपने मित्र इंटरनेशनल शूटर भूपेंद्र प्रताप सिंह की मदद से दोनों बेटों को निशानेबाजी पारंगत किया। दोनों बेटों ने पहली बार प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। भूपेंद्र प्रताप सिंह उनके कोच बने। सर्वजीत बताते हैं कि वे अखबार में इंटरनेशनल शूटर सौरभ चौधरी के बारे में पढ़े। तभी उन्होंने तय किया कि बच्चों को शूटिंग सिखाएंगे।

हत्या के प्रतिशोध में दादा ने थामी थी बंदूक 

बता दें कि सर्वजीत बहादुर सिंह के दादा बृजराज सिंह की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। पिता की हत्या के प्रतिशोध में राजवीर व शिवांशु के दादा वीर बहादुर सिंह ने तब अपने हाथ में बंदूक थामी थी। सर्वजीत सिंह के पिता जगदीशपुर से विधायक वीर बहादुर सिंह ने अपने पिता की मौत का बदला लिया। उन्होंने बिहार, बंगाल और उत्तरप्रदेश में 40 से अधिक नक्सलियों का कत्ल किया। उनपर 36 मर्डर केस दर्ज हुए।

बेटों ने पिता को भी हराया

सर्वजीत सिंह अपने पैतृक गांव में खेती करते हैं। सीवान जिले में 17-21 फरवरी तक आयोजित स्टेट लेवल चैंपियनशिप में सर्वजीत सिंह ने भी रायफल शूटिंग में हिस्सा लिया था। जिसमें उन्हें बेटों से ही हार का मुंह देखना पड़ा। लेकिन, वे कहते हैं जब बेटे जीत गए तो मैं हारकर भी खुश हूं। गौरतलब है कि शूटिंग चैंपियनशिप में सब जूनियर कैटेगरी के प्रतिभागियों को भी सीनियर के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का प्रावधान था। जिसमें सर्वजीत के दोनों बेटों ने गोल्ड मैडल हासिल किया।

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